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श्रीराम इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के वार्षिकोत्सव ने नवाचार संस्कृति और प्रतिभा को भव्य मंच दिया

22 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा का उत्सव जहां सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, वेव ऑफ इनोवेशन एक्सपो, छात्रवृत्तियों, पूर्व छात्रों के सम्मान और उद्योग जगत के मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों में नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी की नई चेतना जगाई।

काशीपुर। काशीपुर के शैक्षणिक परिदृश्य में इस वर्ष एक भव्य और स्मरणीय अध्याय तब जुड़ा, जब श्रीराम इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी ने अपने वार्षिक उत्सव का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया। “Waves of Change – A Journey of Growth Innovation & Transformation” शीर्षक से सजे इस समारोह ने केवल रंगारंग प्रस्तुतियों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि संस्थान की वर्षों की मेहनत, अकादमिक प्रतिबद्धता, सामाजिक चेतना और तकनीकी उन्नयन को एक ही मंच पर सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। यह आयोजन विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और शहर के गणमान्य नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। समारोह का उद्देश्य स्पष्ट था—शिक्षा को नवाचार से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के भीतर नेतृत्व, रचनात्मकता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करना। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करते ही सजावट, प्रकाश व्यवस्था और अनुशासित आयोजन ने यह संकेत दे दिया कि यह केवल एक औपचारिक वार्षिक दिवस नहीं, बल्कि संस्थान की पहचान और भविष्य दृष्टि का उत्सव है, जिसमें हर वर्ग की सहभागिता और ऊर्जा समान रूप से झलकती रही।

कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और ऊँचाई दी। मुख्य अतिथि के रूप में शुभम चमोली, प्लांट हेड, सूर्या रोशिनी लिमिटेड, काशीपुर की मौजूदगी रही, वहीं उषा चौधरी, भूतपूर्व मेयर, काशीपुर ने विशिष्ट अतिथि के रूप में आयोजन की शोभा बढ़ाई। इनके अतिरिक्त राजीव घई, अध्यक्ष, काशीपुर डेवलपमेंट फोरम, बिजेंद्र चौधरी, अध्यक्ष, उत्तराखंड एथेलेटिक्स एसोसिएशन, गोपाल किशन, चेयरमैन, एग्रोन रेमेडीज तथा गोपाल चौहान, एम0 डी0, SPCC जैसे प्रतिष्ठित नाम मंच पर उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक और आधुनिक शैली के संतुलन के साथ किया गया, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सम्मान का भाव स्पष्ट दिखा। संस्थान की ओर से चुनी गई थीम का उद्देश्य अतिथियों के अनुभवों और विद्यार्थियों की आकांक्षाओं के बीच सेतु बनाना था, ताकि शिक्षा, उद्योग और समाज के बीच संवाद और सहयोग को नई दिशा मिल सके।

समारोह की शुरुआत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुई, जब बीसीए के छात्र-छात्राओं ने दुर्गा स्तुति की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। मंच पर सधे हुए कदमों, लयबद्ध संगीत और भावों की अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात बी.एड. के विद्यार्थियों ने “राजुला मालू साही” पर आधारित नृत्य और संगीत का ऐसा समन्वय प्रस्तुत किया, जिसने लोक संस्कृति की गहराई और सौंदर्य को जीवंत कर दिया। यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं थी, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के प्रति युवाओं के सम्मान और समझ का प्रमाण भी बनी। सभागार में उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। आरंभिक प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले कार्यक्रमों में रचनात्मकता, अनुशासन और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जो पूरे दिन दर्शकों को बांधे रखेगा।

विविधता से भरपूर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने मंच को रंगों और भावों से सराबोर कर दिया। विद्यार्थियों ने कुमाऊँनी लोकनृत्य, बॉलीवुड डांस, नेपाली नृत्य, भांगड़ा जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-विदेश की सांस्कृतिक झलक पेश की। हर प्रस्तुति में अभ्यास, समर्पण और समूह भावना स्पष्ट दिखाई दी। तकनीकी युग की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए साइबर सिक्योरिटी विषय पर आधारित प्रस्तुति ने युवाओं की जागरूकता और विषयगत समझ को दर्शाया। सामाजिक कुरीतियों पर केंद्रित नाटकों और नृत्यों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दिया। तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साहवर्धन ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को नई उड़ान दी। यह मंच केवल प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि विचारों के आदान-प्रदान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करने का माध्यम बन गया, जिसमें हर प्रस्तुति का अपना संदेश और उद्देश्य था।

वार्षिक उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण “वेव ऑफ इनोवेशन” एक्सपो रहा, जिसने कार्यक्रम को शैक्षणिक ऊँचाई प्रदान की। इस एक्सपो में विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने अपने नवोन्मेषी प्रोजेक्ट, शोध मॉडल और रचनात्मक अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं। तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक सोच और समस्या-समाधान की क्षमता को दर्शाते इन प्रोजेक्ट्स ने उपस्थित अतिथियों और दर्शकों को प्रभावित किया। विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास के साथ अपने विचार समझाए, प्रश्नों के उत्तर दिए और वास्तविक जीवन में उपयोगिता को रेखांकित किया। यह एक्सपो संस्थान की उस शिक्षण पद्धति का प्रमाण बना, जिसमें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव को समान महत्व दिया जाता है। दर्शकों ने विद्यार्थियों की मौलिकता और मेहनत की सराहना की, वहीं अतिथियों ने ऐसे मंचों को भविष्य के नवाचार की प्रयोगशाला बताया, जो युवाओं को प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए तैयार करते हैं।

समारोह के औपचारिक सत्र में संस्थान के अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बीते 22 वर्षों की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार संस्थान ने सीमित संसाधनों से शुरू होकर आज शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासित वातावरण और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रमों के कारण यहां के छात्र-छात्राएं देश-विदेश की प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संस्थान का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उनके वक्तव्य ने अभिभावकों और विद्यार्थियों में विश्वास को और मजबूत किया, साथ ही यह संदेश दिया कि निरंतर प्रयास और स्पष्ट दृष्टि से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्य अतिथि शुभम चमोली ने अपने प्रेरक संबोधन में संस्थान की प्रगति की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला तथा कहा कि इनका सही उपयोग कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है। उनके अनुभवजन्य विचारों ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की प्रेरणा दी। विशिष्ट अतिथियों ने भी अपने विचार साझा करते हुए शिक्षा, खेल, उद्योग और समाज के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। अतिथियों के वक्तव्यों में युवाओं के लिए संदेश स्पष्ट था—कठिन परिश्रम, नवाचार और नैतिकता के साथ आगे बढ़ने से सफलता सुनिश्चित होती है। इन विचारों ने समारोह को केवल उत्सव नहीं, बल्कि मार्गदर्शन का मंच बना दिया।

सम्मान और उपलब्धियों का दौर उस समय शुरू हुआ, जब प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत 25 पूर्व विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह क्षण वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, जिन्होंने अपने वरिष्ठों की सफलता को निकट से देखा। इसके साथ ही संस्थान में कार्यरत गिरीश चंद्र फुलारा को 10 वर्षों की सेवा के लिए ‘लॉन्ग सर्विस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जिससे कर्मचारियों के समर्पण और निष्ठा को मान्यता मिली। कार्यक्रम में 55 मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्तियाँ प्रदान की गईं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहन मिला। रील मेकिंग प्रतियोगिता के 17 विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया, जो रचनात्मकता और डिजिटल कौशल के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। ये सभी सम्मान समारोह की गरिमा और उद्देश्य को और सुदृढ़ करते नजर आए।

शैक्षणिक दृष्टिकोण से समारोह को और समृद्ध करते हुए निदेशक प्रो. (डॉ.) योगराज सिंह ने युवाओं को समाज की सृजनात्मक शक्ति बताते हुए शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और प्रेरणा से युवा न केवल अपने करियर को दिशा दे सकते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक भी बन सकते हैं। प्राचार्य डॉ. एस.एस. कुशवाहा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया तथा संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मंच संचालन की जिम्मेदारी कुलदीप, डॉ. फरहा नईम, डॉ. प्रतिभा राघव और छवि चौधरी ने अत्यंत कुशलता से निभाई, जबकि वार्षिकोत्सव का समन्वयन डॉ. गुलनाज सिद्द्की द्वारा किया गया। समापन पर यह स्पष्ट था कि यह आयोजन केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि संस्थान की उत्कृष्टता, विद्यार्थियों की प्रतिभा और सामूहिक प्रयासों का सजीव प्रमाण बनकर इतिहास में दर्ज हो गया।

इसके अतिरिक्त, समारोह के दौरान पूरे परिसर में जिस अनुशासन, आपसी समन्वय और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला, उसने संस्थान की कार्यसंस्कृति को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। अभिभावकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों, आत्मविश्वास और मंचीय कौशल की मुक्तकंठ से सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। शहर के गणमान्य नागरिकों और शिक्षाविदों ने भी माना कि श्रीराम इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी जैसे शैक्षणिक संस्थान न केवल शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक संरक्षण और नवाचार को भी समान महत्व दे रहे हैं। वार्षिकोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, नए विचार साझा करने और सामूहिक प्रयास की ताकत समझने का अवसर मिला। कुल मिलाकर यह आयोजन काशीपुर के शैक्षणिक और सांस्कृतिक जीवन में एक प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि जब शिक्षा, संस्कृति और तकनीक एक साथ आगे बढ़ती हैं, तब भविष्य की मजबूत नींव तैयार होती है।

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