हरिद्वार। धर्मनगरी की पहचान को सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने की दिशा में एक सख्त प्रशासनिक पहल उस समय देखने को मिली, जब 2027 अर्धकुंभ मेले की तैयारियों की पृष्ठभूमि में शहर के प्रमुख इलाकों में अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सोमवार को देवपुरा चौक से लेकर रेलवे स्टेशन तक का पूरा क्षेत्र प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र बना रहा, जहां वर्षों से फुटपाथों और नालों पर फैले अस्थायी ढांचे शहर की यातायात व्यवस्था और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए थे। सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने इस पूरे मार्ग पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए फुटपाथों को पूरी तरह खाली कराया। अभियान के दौरान रेड़ी-पटरी, ठेले और अस्थायी दुकानों को हटाया गया, वहीं नालों के ऊपर और आसपास बनी अवैध संरचनाओं को जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त किया गया। कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती और पहले से दी गई चेतावनियों के बावजूद अतिक्रमण बनाए रखने वालों पर सीधे कदम उठाए। इस दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि धार्मिक आयोजनों के मद्देनज़र शहर की छवि और यातायात व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शहर के इस हिस्से में चली कार्रवाई केवल फुटपाथ तक सीमित नहीं रही, बल्कि रेलवे की सीमा में अवैध रूप से बनाए गए गोदामों और संरचनाओं पर भी प्रशासन की नजर पड़ी। रेलवे स्टेशन की दीवार से सटे नाले के ऊपर बनी दुकानों को हटाने के साथ-साथ दीवार के पीछे बनाए गए अवैध गोदामों की पहचान कर उन्हें तोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। टीम ने मौके पर पाया कि कई लोगों ने लंबे समय से इन गोदामों में सामान जमा कर रखा था, जिससे न केवल सार्वजनिक भूमि पर कब्जा हो रहा था बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े खतरे भी पैदा हो रहे थे। कार्रवाई के दौरान कुछ गोदामों की दीवारें तोड़कर भीतर रखा गया सामान जब्त किया गया, जबकि शेष अवैध ढांचों को हटाने के निर्देश रेलवे अधिकारियों को मौके पर ही दे दिए गए। पूरे अभियान के दौरान दुकानदारों और कब्जाधारियों में अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दिया; कई लोग अपने ठेले और अस्थायी ढांचे समेटकर वहां से हटते नजर आए। कुछ स्थानों पर विरोध के स्वर भी उठे, लेकिन प्रशासनिक अमला अपने फैसले पर अडिग रहा और किसी भी दबाव में आए बिना कार्रवाई को अंतिम रूप तक पहुंचाया।
इस व्यापक अभियान को गति देने के पीछे राज्य स्तर पर लिए गए निर्णयों की भी अहम भूमिका रही। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2027 अर्धकुंभ मेले की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अवैध अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ शहर में लगने वाले जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में जिला और नगर प्रशासन ने संयुक्त रूप से रणनीति तैयार की और सबसे पहले उन क्षेत्रों को चुना, जहां अतिक्रमण के कारण यातायात बाधित होता रहा है। देवपुरा चौक और रेलवे स्टेशन के आसपास का इलाका लंबे समय से भीड़ और जाम के लिए कुख्यात रहा है, ऐसे में यहां कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों का मानना है कि अर्धकुंभ जैसे विशाल आयोजन से पहले यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यह अभियान केवल तात्कालिक कार्रवाई नहीं, बल्कि दीर्घकालिक योजना का हिस्सा बताया जा रहा है।

सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और मीडिया से बातचीत में यह साफ किया कि अतिक्रमण हटाने की यह मुहिम किसी एक दिन या एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगी। उनके अनुसार शहर के सभी फुटपाथों और सार्वजनिक स्थलों को चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा, ताकि पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और यातायात सुचारु रूप से संचालित हो। उन्होंने यह भी बताया कि नो-पार्किंग क्षेत्रों में खड़े ई-रिक्शाओं और अन्य वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई के निर्देश पुलिस को दिए गए हैं, जिससे सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग पर रोक लगाई जा सके। इससे पहले भी रेलवे स्टेशन के बाहर फुटपाथ खाली कराए गए थे, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा अतिक्रमण हो गया था। इस बार प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हटाए गए स्थानों पर फिर से कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और लगातार निगरानी रखी जाएगी।
अतिक्रमण विरोधी इस अभियान के दौरान नगर निगम, पुलिस और रेलवे विभाग के बीच तालमेल भी देखने को मिला, जिसे प्रशासन ने आने वाले महीनों के लिए एक मॉडल के रूप में पेश किया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी संबंधित विभाग एक साथ मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक शहर को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त बनाना संभव नहीं है। इसी वजह से कार्रवाई के बाद नगर निगम और पुलिस को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे नियमित रूप से इन क्षेत्रों का निरीक्षण करें और किसी भी नई अवैध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करें। रेलवे अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि उनकी भूमि पर दोबारा कब्जा न होने दिया जाए और यदि कहीं अवैध निर्माण की कोशिश होती है तो तुरंत जिला प्रशासन को सूचित किया जाए। इस संयुक्त प्रयास का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न होने देना है, ताकि अर्धकुंभ और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर की व्यवस्थाएं चरमराने न पाएं।
सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने भी इस पूरे अभियान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हरिद्वार में आने वाले समय में कांवड़ मेले, स्नान पर्वों और अर्धकुंभ जैसे आयोजनों की श्रृंखला है, जिन्हें देखते हुए प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। उनके अनुसार अतिक्रमण के कारण न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित होती है, जो किसी बड़े आयोजन के दौरान गंभीर समस्या बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस, नगर निगम और प्रशासन मिलकर लगातार मॉनिटरिंग करेंगे और जहां कहीं भी दोबारा कब्जा किया जाएगा, वहां तत्काल चालानी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि हरिद्वार को अतिक्रमण मुक्त बनाने का लक्ष्य तय कर लिया गया है और इसे हासिल करने के लिए किसी भी तरह की सख्ती से पीछे नहीं हटा जाएगा। इस बयान से यह साफ झलकता है कि आने वाले दिनों में शहर में अवैध कब्जों के खिलाफ और भी तीव्र अभियान देखने को मिल सकते हैं।

कार्रवाई के दौरान स्थानीय व्यापारियों और ठेला संचालकों के बीच हलचल का माहौल रहा, क्योंकि कई लोग वर्षों से उन्हीं स्थानों पर अपनी आजीविका चला रहे थे। हालांकि प्रशासन का तर्क है कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, खासकर तब जब शहर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के धार्मिक आयोजन की तैयारी कर रहा हो। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में व्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि छोटे व्यापारियों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए जा सकें और शहर की व्यवस्था भी प्रभावित न हो। फिलहाल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि फुटपाथ, सड़कें और नाले पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त हों, जिससे स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके। प्रशासन का मानना है कि यदि अभी सख्ती नहीं बरती गई, तो मेले के समय हालात संभालना मुश्किल हो सकता है।
कुल मिलाकर, देवपुरा चौक से रेलवे स्टेशन तक चली इस कार्रवाई ने यह संकेत दे दिया है कि 2027 अर्धकुंभ मेले को लेकर प्रशासन किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है। अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ जाम की समस्या, अव्यवस्थित पार्किंग और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी समानांतर रूप से काम किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले महीनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिलेगी। हरिद्वार को श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों दोनों के लिए सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से चल रहा यह अभियान प्रशासन की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। यदि यह सख्ती और निगरानी इसी तरह जारी रही, तो उम्मीद की जा सकती है कि अर्धकुंभ से पहले शहर की तस्वीर काफी हद तक बदली हुई नजर आएगी, जहां अव्यवस्था की जगह सुव्यवस्था और अतिक्रमण की जगह खुले, सुरक्षित सार्वजनिक स्थल दिखाई देंगे।





