काशीपुर। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की 301वीं पावन जयंती के पावन अवसर पर वैचारिक चेतना और सामाजिक समरसता का एक बेहद अद्भुत और भव्य नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को राष्ट्रभक्ति और गौरव के अनूठे रंग में सराबोर कर दिया। इस बेहद गरिमामयी और ऐतिहासिक उपलक्ष्य पर आयोजित मुख्य विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए महानगर कांग्रेस कमेटी की बेहद ओजस्वी, प्रखर और लोकप्रिय जिला अध्यक्ष अलका पाल जी ने अपने हृदयस्पर्शी उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी का संपूर्ण जीवन, उनका महान कृतित्व और उनका अलौकिक चरित्र आज सदियों बाद भी हम सभी के लिए एक अत्यंत पवित्र और सर्वकालिक प्रेरणा का महास्रोत बना हुआ है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इतिहास के पन्नों में लोकमाता का नाम एक ऐसी न्यायप्रिय और जनवत्सल शासिका के रूप में दर्ज है, जिन्होंने राजपाट की सुख-सुविधाओं को त्यागकर सदैव जनहित, न्याय और धार्मिक पुनरुत्थान को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय माना और उनका यही आदर्श आज की आधुनिक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के लिए भी एक मार्गदर्शिका की तरह काम कर रहा है।
महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में लोकमाता के अप्रतिम योगदान की परतों को बहुत ही खूबसूरती और तार्किक ढंग से खोलते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री अलका पाल जी ने जनसमुदाय को बताया कि मालवा साम्राज्य की महान मराठा महारानी, पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी ने अपने गौरवशाली शासनकाल के दौरान जनकल्याण की एक ऐसी अमिट इबारत लिखी जो आज के दौर में अकल्पनीय प्रतीत होती है। उन्होंने अपनी प्रजा की सुख-सुविधाओं का ध्यान रखते हुए बिना किसी सरकारी तामझाम के अपने व्यक्तिगत और राजकीय प्रयासों से देश के कोने-कोने में 1000 से भी अधिक पवित्र कुओं, भव्य सरोवरों, आलीशान मंदिरों, विशाल घाटों और राहगीरों के विश्राम के लिए सर्वसुविधायुक्त धर्मशालाओं आदि का व्यापक स्तर पर जनहित निर्माण कराया, जो उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। अलका पाल ने अत्यंत गर्व के साथ रेखांकित किया कि जब विदेशी आक्रांताओं ने देश के सनातन गौरव को चोट पहुंचाई, तब अहिल्याबाई होल्कर ने ही आगे बढ़कर गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश के पावन काशी विश्वनाथ मंदिर, मर्यादा पुरुषोत्तम की नगरी अयोध्या और भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा जैसे अति महत्वपूर्ण और पौराणिक धार्मिक स्थलों के भव्य जीर्णोद्धार, मंदिरों और विशाल धर्मशालाओं के नवनिर्माण में अपनी अत्यंत सक्रिय, युगांतरकारी और ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
लोकमाता के संघर्षमयी जीवन और उनकी समदृष्टि की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए प्रखर नेत्री अलका पाल ने अपने संबोधन में आगे कहा कि वह जीवन भर बिना किसी विश्राम के केवल और केवल जनहित के महान कार्यों से पूरी निष्ठा के साथ जुड़ी रहीं और उन्होंने जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर बिना किसी भेदभाव के संघर्ष को ही अपने जीवन का मुख्य आयाम और आभूषण बनाया। उन्होंने बेहद तार्किक अंदाज में देश के वर्तमान हालातों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सैकड़ो साल बीत जाने के बाद भी आज के इस आधुनिक युग में उनके द्वारा किए गए जनहित के अद्वितीय कार्य संपूर्ण मानव जाति के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और अनुकरणीय हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। अलका पाल ने महिला अधिकारों पर विशेष प्रकाश डालते हुए समाज को बताया कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने उस दकियानूसी दौर में भी समाज की सबसे उपेक्षित और असहाय विधवा महिलाओं के कल्याण, उनकी उच्च शिक्षा, आत्मसम्मान और उन्हें संपत्ति में अधिकार दिलाने जैसे बेहद संवेदनशील विषयों को लेकर अपने शासनकाल में अद्भुत सजगता और प्रशासनिक दृढ़ता दिखाई थी, जो उनके समय से बहुत आगे की सोच थी।

काशी विश्वनाथ जैसी वैश्विक और सांस्कृतिक धरोहर के पुनरुद्धार के लिए लोकमाता द्वारा किए गए अप्रतिम कार्यों का स्मरण करते हुए कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने भावुक शब्दों में कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार के लिए उनका अटूट समर्पण और त्याग इतिहास में हमेशा एक विशाल और बेमिसाल मिसाल के रूप में जाना जाएगा, जिसने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। उन्होंने आज के युवाओं और राजनेताओं का सीधे तौर पर आह्वान करते हुए कहा कि हमारी वर्तमान पीढ़ी को लोकमाता के इन महान जनहित के कार्यों और उनकी लोक-कल्याणकारी नीतियों से गहरी प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि एक समतामूलक और मजबूत समाज का निर्माण किया जा सके। दूसरी ओर, इसी पावन जयंती के उपलक्ष्य में काशीपुर के मुख्य केंद्र महाराणा प्रताप चौक पर पाल महासभा द्वारा एक अत्यंत भव्य और विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां भारी संख्या में एकत्रित हुए पाल समाज और नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस भीषण और तपती गर्मी के मौसम में पाल महासभा के कार्यकर्ताओं ने राहगीरों, वाहन चालकों और आम जनता को भीषण गर्मी से राहत पहुंचाने के पवित्र उद्देश्य से बड़े पैमाने पर शीतल शरबत वितरण का स्टाल लगाया, जहां देर शाम तक हजारों लोगों को प्रेमपूर्वक शरबत पिलाकर लोकमाता के सेवा भाव को जीवंत किया गया।
इस ऐतिहासिक, श्रद्धापूर्ण और भव्य सामाजिक आयोजन को सफल बनाने तथा लोकमाता के चरणों में अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए पाल महासभा के बैनर तले नगर और क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग पूरी मुस्तैदी और उत्साह के साथ उपस्थित रहे। इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य रूप से अपनी सेवा देने वालों और उपस्थिति दर्ज कराने वालों में ब्रह्मपाल, सुभाष पाल, प्रबुद्ध चिकित्सक डॉ. करण सिंह पाल, समाज के मार्गदर्शक अमर सिंह पाल, जागरूक नागरिक जगदीश पाल, राजपाल सिंह पाल, वरिष्ठ समाजसेवी विजय चौधरी, ऊर्जावान अनिल पाल, राजकुमार पाल, युवा तुर्क मुकुल पाल, सोमपाल, धीर-गंभीर उपेंद्र पाल, धीरज पाल, नारायण पाल, हेम पाल, प्रदीप पाल, सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल, ओम प्रकाश पाल, करण सिंह पाल, राजकुमार पाल, हेमसिंह पाल, तुलाराम पाल, राजेंद्र पाल, विजेंद्र पाल, गजेंद्र पाल, ओम प्रकाश पाल, कुंवर सिंह, कुमार पाल, विनोद पाल तथा अल्पसंख्यक समुदाय से आपसी सौहार्द की मिसाल पेश करने वाले मुशर्ऱफ हुसैन एवं जितेंद्र सरस्वती आदि भारी संख्या में प्रमुखता से उपस्थित थे, जिन्होंने इस पूरे जयंती समारोह को काशीपुर के इतिहास में एक यादगार और ऐतिहासिक मील का पत्थर बना दिया।





