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ब्राह्मण सभा चुनाव पर फूटा अमित कुमार शर्मा का गुस्सा चुनावी धांधली पर भड़के

महज एक घंटे के भीतर मतदाता सूची से लेकर परिणाम तक घोषित करने की अकल्पनीय जादुई प्रक्रिया को सोची-समझी साजिश बताकर अब कोर्ट और रजिस्ट्रार सोसाइटीज की शरण में जाएंगे प्रखर समाजसेवी।

काशीपुर।उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जनपद के अंतर्गत आने वाले काशीपुर क्षेत्र में इन दिनों ब्राह्मण सभा समिति के त्रिवार्षिक चुनाव को लेकर एक नया और बेहद गंभीर विवाद खड़ा हो गया है, जिसने संपूर्ण क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। काशीपुर की इस प्रतिष्ठित धार्मिक एवं सामाजिक संस्था के शीर्ष पद यानी अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार के रूप में उभरे प्रखर समाजसेवी तथा समर्पित शिक्षक अमित कुमार शर्मा ने चुनाव संपन्न होने के तौर-तरीकों पर बेहद कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में आरोप लगाया कि इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को जिस तानाशाही अंदाज में अंजाम दिया गया है, वह असल में संपूर्ण काशीपुर क्षेत्र के प्रबुद्ध ब्राह्मण समाज की साख, उनकी भावनाओं और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ किया गया एक बहुत बड़ा विश्वासघात है। अमित कुमार शर्मा का यह तीखा बयान सामने आते ही समिति के भीतर वर्षों से पनप रही गुटबाजी और असंतोष की ज्वाला अब पूरी तरह से धधक उठी है, जिसने पूरी चुनावी निष्पक्षता पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान रखने वाले अमित कुमार शर्मा ने चुनावी व्यवस्थापकों को आड़े हाथों लिया और अत्यंत संगीन आरोप जड़ते हुए कहा कि यह कोई सामान्य या निष्पक्ष चुनाव नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह से एक पूर्व-नियोजित और पहले से तय पटकथा के आधार पर खेला गया एक प्रशासनिक ड्रामा था। उन्होंने आश्चर्य और क्षोभ प्रकट करते हुए मीडिया के सामने यह सनसनीखेज दावा किया कि महज साठ मिनट यानी एक घंटे से भी कम की अल्पावधि के भीतर संपूर्ण चुनावी औपचारिकताओं को आनन-फानन में निपटा दिया गया, जो न केवल व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का सरेआम गला घोंटने जैसा घिनौना कृत्य भी है। इस तरह की हड़बड़ी और अपारदर्शिता यह साफ बयां करती है कि पर्दे के पीछे कुछ खास चेहरों को फायदा पहुंचाने के लिए एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया था, जिसमें आम मतदाताओं और योग्य उम्मीदवारों की आवाज को दबाने की हरसंभव कोशिश की गई।

चुनावी धांधली की परतों को सिलसिलेवार ढंग से खोलते हुए विद्रोही सुर बुलंद करने वाले अमित कुमार शर्मा ने तार्किक रूप से सवाल उठाया कि दुनिया के किसी भी कोने में या किसी भी वैध पंजीकृत संस्था में क्या मात्र एक घंटे के भीतर इतनी सारी जटिल प्रक्रियाएं पूरी की जा सकती हैं। उन्होंने हैरान करने वाला ब्योरा देते हुए कहा कि इसी साठ मिनट की समय सीमा के अंदर पहले तो आनंद-फानन में मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया, जिसके तुरंत बाद प्रत्याशियों के नामांकन पत्र जमा करवा लिए गए, और फिर बिना किसी उचित समय अंतराल के नामांकन पत्रों की जांच करके कतिपय आवेदनों को खारिज करने की मनमानी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इतना ही नहीं, इसके तत्काल बाद वैध पाए गए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया गया, जिसके फौरन बाद मतदान करवाकर, मतों की गिनती भी कर ली गई और अंत में अंतिम रूप से चुनाव परिणामों की घोषणा कर विजेता को ताज भी पहना दिया गया, जो कि संवैधानिक नियमों का मखौल उड़ाने जैसा है।

इस अविश्वसनीय गति से संपन्न कराए गए तथाकथित लोकतांत्रिक ड्रामे को एक पूर्व-निर्धारित और गहरी सोची-समझी साजिश का जीवंत उदाहरण बताते हुए अमित कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की जादुई चुनावी प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति और अपनों को उपकृत करने के उद्देश्य से ही रची जा सकती है। उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण और गौरवशाली संस्था के चुनाव को इस तरह से मजाक बना देना यह साबित करता है कि वर्तमान में व्यवस्था पर काबिज लोग निष्पक्ष मुकाबले से बुरी तरह डरे हुए थे और वे किसी भी कीमत पर लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव नहीं चाहते थे। यही वजह रही कि समाज के आम प्रबुद्ध जनों को न तो मतदाता सूची देखने का पर्याप्त अवसर मिला और न ही योग्य उम्मीदवारों को अपनी दावेदारी को सही ढंग से प्रस्तुत करने का कोई वैधानिक मौका दिया गया, जिसने इस पूरी कवायद को पूरी तरह से संदेहास्पद और अपवित्र बना दिया है।

पूरी तरह से आक्रोशित और न्याय की मांग पर अड़े अमित कुमार शर्मा ने ब्राह्मण सभा समिति काशीपुर के इस पूरे त्रिवार्षिक चुनावी घटनाक्रम को वैधानिक कसौटी पर पूरी तरह शून्य और अवैध घोषित करते हुए साफ लफ्जों में कहा है कि वे इस घोर अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने साफ कर दिया है कि इस पूरी धांधली और तानाशाही पूर्ण रवैये के खिलाफ वे बहुत जल्द देश की न्यायप्रणाली और प्रशासनिक तंत्र का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं, जिसके तहत वे रजिस्ट्रार सोसाइटीज चिट्स एवं फंड के समक्ष अपनी विधिवत आपत्ति दर्ज करवाएंगे। इसके साथ ही अमित कुमार शर्मा ने यह भी दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है कि समाज के हक और सच की लड़ाई को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए वे सक्षम न्यायालय की शरण में जाकर इस पूरे फर्जीवाड़े को चुनौती देंगे, ताकि काशीपुर के संपूर्ण ब्राह्मण समाज को इस संगठित विश्वासघात से मुक्ति मिल सके और संस्था में पुनः लोकतंत्र बहाल हो सके।

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