रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के एक होनहार छात्र ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी मेधा का लोहा मनवाते हुए पूरे देवभूमि उत्तराखंड का नाम गौरव से ऊंचा कर दिया है। शिक्षा और बौद्धिक विमर्श के क्षेत्र में देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में शुमार की जाने वाली भारत बौद्धिक राष्ट्रीय परीक्षा में इस प्रतिष्ठित संस्थान के एक मेधावी विद्यार्थी ने अपनी कुशाग्र बुद्धि और उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर सांत्वना पुरस्कार हासिल करने का गौरवशाली गौरव प्राप्त किया है। इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता को हासिल करने वाले छात्र का नाम सूरज सिंह रावत है, जो वर्तमान में इस महाविद्यालय में स्नातक द्वितीय सेमेस्टर के संस्थागत छात्र के रूप में अपनी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की इस बेहद कठिन और कड़ी चुनौती वाली परीक्षा में देश भर के हजारों चुनिंदा विद्यार्थियों को पछाड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचना न केवल छात्र की अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा को दर्शाता है, बल्कि रामनगर के इस अग्रणी महाविद्यालय की उच्च शिक्षण गुणवत्ता और वहां के अकादमिक माहौल की श्रेष्ठता पर भी एक बार फिर से अपनी मजबूत मुहर लगाता है।
इस गौरवमयी उपलब्धि और पुरस्कार वितरण के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए परीक्षा के स्थानीय संयोजक डॉ. मूलचंद्र शुक्ल ने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद इस प्रतिभाशाली छात्र को पूर्व में ही आयोजकों की ओर से सम्मानजनक प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया गया था। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अब मुख्य चयन समिति द्वारा छात्र के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए सांत्वना पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत छात्र को एक विशेष सम्मानजनक प्रशस्ति पत्र तथा पच्चीस सौ रुपये (2500) की नगद पुरस्कार धनराशि का बैंक चेक प्रदान किया गया है। महाविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित एक बेहद गरिमामयी और सादगीपूर्ण कार्यक्रम के दौरान संस्थान के यशस्वी प्राचार्य प्रोफेसर एम.सी. पाण्डे, मुख्य नियंता यानी चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एस.एस. मौर्या एवं मुख्य संयोजक डॉ. मूलचंद्र शुक्ल ने संयुक्त रूप से छात्र को यह प्रेषित पुरस्कार और नगद धनराशि सौंपते हुए सम्मानित किया। इस बेहद खास और गौरवशाली क्षण पर पूरे महाविद्यालय परिवार सहित क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने छात्र की इस बड़ी कामयाबी पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसे बधाई दी।
इस बेहद प्रतिष्ठित और बड़े स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिता की पृष्ठभूमि के बारे में बात करें तो भारत बौद्धिक राष्ट्रीय परीक्षा 2025–26 का भव्य आयोजन विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान उत्तराखंड एवं देश के अग्रणी दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के संयुक्त आयोजकत्व में पूरे देश में एक साथ किया गया था। इस गरिमामयी और चुनौतीपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा की तिथि 31 जनवरी निर्धारित थी, जिसमें संपूर्ण भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों से मेधावी छात्र-छात्राओं ने अपनी बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। रामनगर परीक्षा केंद्र पर पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे संस्थागत छात्र-छात्राओं के अलावा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत दूरस्थ शिक्षा के विद्यार्थियों ने भी पूरे उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। दिल्ली विश्वविद्यालय और विद्या भारती जैसे बड़े संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित होने के कारण इस परीक्षा का स्तर बेहद कठिन और अकादमिक रूप से अत्यंत उच्च कोटि का माना जाता है, जिसमें सफलता पाना किसी भी विद्यार्थी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इस बेहद संवेदनशील और बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को स्थानीय स्तर पर पूरी शुचिता और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के लिए एक मजबूत और समर्पित टीम का गठन किया गया था। परीक्षा के सफल संचालन और इसकी गरिमा को बनाए रखने में स्थानीय मुख्य संयोजक डॉ. मूलचन्द्र शुक्ल, उपसंयोजक डॉ. नीमा राणा, डॉ. सुभाष पोखरियाल, डॉ. ममता भदोला जोशी तथा परीक्षा प्रभारी डॉ. शरद भट्ट एवं डॉ. दीपक खाती ने अपनी बेहद महत्वपूर्ण और अग्रणी भूमिका निभाई थी। इन सभी वरिष्ठ प्राध्यापकों, समस्त तैनात कक्ष निरीक्षकों तथा कुशल मूल्यांकन कर्ताओं के आपसी समन्वय, कड़े अनुशासन और संयुक्त सहयोग के चलते ही परीक्षा का आयोजन और उसके बाद कॉपियों का मूल्यांकन कार्य बिना किसी शिकायत के पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सकुशल संपन्न हुआ था। परीक्षा समिति की इसी कड़ी मेहनत का सुखद परिणाम आज इस रूप में सामने आया है कि कॉलेज के छात्र ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है।
छात्र सूरज सिंह रावत की इस शानदार और ऐतिहासिक सफलता पर संस्थान के मुखिया और वरिष्ठ शिक्षाविद प्राचार्य प्रोफेसर एम.सी. पाण्डे ने छात्र की पीठ थपथपाते हुए कहा कि आज का युग केवल किताबी ज्ञान का नहीं बल्कि बौद्धिक तार्किकता और समग्र विकास का है, जिसमें हमारे छात्र निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने छात्र को स्मृति चिह्न और चेक सौंपते हुए उसके उज्ज्वल, समृद्ध और प्रगतिशील भविष्य के लिए अपनी ढेर सारी आत्मीय शुभकामनाएं प्रेषित कीं और उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वह इसी तरह कॉलेज का नाम रोशन करता रहेगा। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एस.एस. मौर्या ने भी छात्र के इस प्रदर्शन की जमकर सराहना करते हुए कहा कि ऐसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के भीतर छिपी वास्तविक क्षमता को बाहर लाने का काम करती हैं और इससे अन्य छात्रों को भी आगे बढ़ने की एक नई प्रेरणा और नई ऊर्जा मिलती है। इस सम्मान समारोह के दौरान कॉलेज परिसर का माहौल बेहद खुशनुमा और गौरव से भरा हुआ नजर आ रहा था।





