काशीपुर। नाबालिग से दरिंदगी की उस काली रात का सच अब दुनिया के सामने आ चुका है, जहाँ खाकी की मुस्तैदी ने गुनहगारों को पाताल से भी खोज निकाला है। काशीपुर में एक मासूम बच्ची की अस्मत से खिलवाड़ करने वाले दो दरिंदों को कोतवाली आईटीआई पुलिस ने सलाखों के पीछे भेजकर न्याय की उम्मीद जगाई है। पुलिस अधीक्षक काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह ने आज देर शाम इस सनसनीखेज कांड का आधिकारिक रूप से पर्दाफाश करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक और मानवीय खुफिया तंत्र के तालमेल ने इस अंधे कत्ल जैसी गुत्थी को सुलझाया। दरअसल, बीते 3 अप्रैल को जब पूरा शहर चैती मेले की रौनक में डूबा था, तब इन वहशियों ने अपनी गंदी नजरें एक नाबालिग पर गड़ा दी थीं। वे उसे बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठाकर ले गए और बांसखेड़ा के समीप बने सुनसान ओवरब्रिज के नीचे ले जाकर उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। 10 अप्रैल को जब पीड़िता की व्यथित माँ ने अपनी कलेजे के टुकड़े के साथ हुई इस बर्बरता की दास्तां पुलिस को सुनाई, तो महकमे में हड़कंप मच गया और तत्काल अज्ञात के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी गई।
इस बेहद संवेदनशील और घृणित अपराध की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों के कड़े रुख के बाद एसपी स्वप्न किशोर सिंह ने अपराधियों के गिरेबान तक पहुँचने के लिए आईटीआई कोतवाली पुलिस और एसओजी (SOG) की एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया। इस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अपराधी अज्ञात थे और सुराग के नाम पर पुलिस के पास कुछ भी ठोस नहीं था। लेकिन जांच दल ने हार नहीं मानी और चैती मेला परिसर में लगे 120 सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच शुरू की। इतना ही नहीं, पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए कोतवाली आईटीआई, कोतवाली काशीपुर और उत्तर प्रदेश से लगे सीमावर्ती बॉर्डर क्षेत्रों के लगभग 150 से अधिक कैमरों की फुटेज को रात-दिन एक करके खंगाला। डिजिटल साक्ष्यों के इस विशाल महासागर में गोता लगाते हुए पुलिस ने संदिग्धों के रास्तों को ट्रैक करना शुरू किया। सर्विलांस की मदद से उस समय सक्रिय सैकड़ों मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया, जिससे जांच की सुई धीरे-धीरे मुरादाबाद की सीमा से लगे आरोपियों की ओर घूमने लगी।

तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के जरिए जब पुलिस को पुख्ता सबूत मिले, तो टीम ने जाल बिछाकर दोनों मुख्य अभियुक्तों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान पंकज कुमार पुत्र संतोष कुमार, जो मूल रूप से ग्राम बोहरनपुर कला, थाना भगतपुर, जिला मुरादाबाद का निवासी है और वर्तमान में आईटीआई क्षेत्र की कृष्णा कॉलोनी में रह रहा था, तथा उसके साथी अरविंद पुत्र महिपाल, निवासी ग्राम बोहरनपुर कला के रूप में हुई है। पुलिस द्वारा की गई कड़ी पूछताछ में इन दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पीड़िता ने भी अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए इन दरिंदों को स्पष्ट रूप से पहचान लिया है। एसपी स्वप्न किशोर सिंह ने बताया कि इन अभियुक्तों का पिछला आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है ताकि इनके अन्य काले कारनामों का भी खुलासा किया जा सके। इस गिरफ्तारी के साथ ही काशीपुर पुलिस ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है कि कानून की नजरों से बच पाना नामुमकिन है।
इस चुनौतीपूर्ण मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली पुलिस टीम की चारों ओर सराहना हो रही है, जिसने महज कुछ धुंधले फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर आरोपियों को बेनकाब किया। इस साहसिक टीम में आईटीआई कोतवाली निरीक्षक रवि कुमार, एसओजी प्रभारी सुनील सुतेड़ी, वरिष्ठ उप निरीक्षक अरविंद बहुगुणा, उपनिरीक्षक मीनाक्षी मनराल, और अपर उपनिरीक्षक दीपक चौहान जैसे जांबाज अधिकारी शामिल थे। इनके साथ ही हेड कांस्टेबल एसओजी विनय यादव, कैलाश तोमक्याल, कांस्टेबल एसओजी हरीश, कांस्टेबल धर्मेंद्र भारती और सुरेंद्र कंबोज ने भी इस ऑपरेशन में अपनी जान झोंक दी थी। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल पीड़ित परिवार को न्याय की आस दी है, बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को भी और अधिक मजबूत किया है। अब इन दोनों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में कोई भी मासूम की अस्मत की ओर आँख उठाने की जुर्रत न कर सके।





