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महाविद्यालय के युवाओं ने भरा स्वरोजगार का दम और उद्यमिता विकास से आत्मनिर्भरता का लिया संकल्प

देवभूमि उद्यमिता विकास योजना के तहत पीएनजी महाविद्यालय के छात्रों ने सीखी स्टार्टअप की बारीकियां, अब नौकरी की कतार छोड़ स्वरोजगार के जरिए देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य को संवारने के लिए तैयार हैं रामनगर के युवा।

रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में बृहस्पतिवार को एक नए युग की आहट सुनाई दी, जब देवभूमि उद्यमिता विकास योजना के अंतर्गत उद्यमिता अभिमुखीकरण कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मात्र एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह उन युवा सपनों को हकीकत में बदलने की एक सुनहरी कोशिश थी जो नौकरी की कतारों से बाहर निकलकर खुद का साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं। 22 अप्रैल 2026 की यह तारीख महाविद्यालय के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गई क्योंकि आज यहाँ के विद्यार्थियों ने पारंपरिक करियर से हटकर स्टार्टअप और स्वरोजगार की अनंत संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाया। कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय के दूरदर्शी प्राचार्य प्रो. एम.सी. पाण्डे द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार किया कि वर्तमान दौर में केवल सरकारी या निजी नौकरियों पर निर्भर रहना आत्मनिर्भरता का मार्ग नहीं हो सकता। प्राचार्य ने जोर देकर कहा कि आज के युवाओं को अपने भीतर के नवाचार को पहचानना होगा ताकि वे स्टार्टअप के माध्यम से न केवल स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त करें, बल्कि समाज के अन्य वर्गों के लिए भी रोजगार के द्वार खोलकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

इस प्रेरणादायक सत्र में महाविद्यालय के लगभग 100 छात्र-छात्राओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें से 30 से अधिक विद्यार्थियों ने उद्यमिता के जटिल क्षेत्रों में अपनी गहरी जिज्ञासा और विशेष रुचि प्रदर्शित कर यह साबित कर दिया कि रामनगर की प्रतिभा अब वैश्विक बाजार में अपनी धमक दिखाने को बेताब है। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के सुप्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. भूपेन्द्र सिंह मेहरा ने विद्यार्थियों के समक्ष उद्यमिता के विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को इतनी सरलता से रखा कि हर छात्र के मन में एक उद्यमी बनने की इच्छा प्रबल हो गई। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की उन कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया जो नए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। डॉ. मेहरा ने एक जीवंत संवाद के माध्यम से छात्रों को समझाया कि उद्यमिता केवल धन कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक जीवन दर्शन है जो आपको विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता खोजने की क्षमता प्रदान करता है। उनकी बातों ने विद्यार्थियों के भीतर छिपे हुए संकोच को आत्मविश्वास में बदल दिया, जिससे कार्यशाला का वातावरण पूरी तरह से ऊर्जावान और संवादात्मक हो गया।

तकनीकी सत्र के दौरान पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से डिजिटल स्क्रीन पर व्यापारिक मॉडल को विस्तार से समझाया गया, जहाँ विद्यार्थियों ने यह सीखा कि किस प्रकार एक छोटे से विचार को निवेश योग्य व्यवसाय में परिवर्तित किया जा सकता है। कार्यशाला में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बड़ी सफलता प्राप्त करने के लिए हमेशा बड़ी शुरुआत की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि छोटे स्तर से शुरू कर निरंतरता और कड़ी मेहनत के साथ ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। छात्रों को उद्यमिता के अनिवार्य कौशलों जैसे कि नवाचार (Innovation), जोखिम उठाने का साहस (Risk Taking), प्रभावी नेतृत्व (Leadership), चतुर विपणन (Marketing) और कुशल प्रबंधन (Management) के साथ-साथ वित्तीय योजना बनाने की कला के बारे में भी गहन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रस्तुति ने विद्यार्थियों को यह समझने में मदद की कि आधुनिक युग में ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स उद्यमिता के लिए वरदान साबित हो रहे हैं, जहाँ न्यूनतम निवेश के साथ वैश्विक ग्राहकों तक पहुँचा जा सकता है। यह सत्र छात्रों के लिए ज्ञान का एक ऐसा भंडार साबित हुआ जिसने उनके करियर की दिशा को पूरी तरह से नया आयाम दे दिया।

कार्यक्रम का अत्यंत सुचारू और प्रभावी संचालन डॉ. डी.एन. जोशी द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी वाकपटुता से पूरे सत्र में विद्यार्थियों के उत्साह को बनाए रखा। इस गौरवशाली अवसर पर महाविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव सहित प्रो. जे.एस. नेगी, डॉ. लोतिका अमित, डॉ. जे.पी. त्यागी, डॉ. ममता जोशी और डॉ. प्रकाश सिंह बिष्ट जैसे प्रबुद्ध शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की सार्थकता को और अधिक बढ़ा दिया। इन प्राध्यापकों ने भी समय-समय पर छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ही यह था कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री धारक बेरोजगार न बनाकर उन्हें एक आत्मनिर्भर और स्वावलंबी नागरिक के रूप में तैयार किया जाए। शिक्षकों ने अपनी साझा राय में कहा कि पीएनजी महाविद्यालय हमेशा से ही छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है और उद्यमिता विकास की यह पहल इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। उपस्थित विद्यार्थियों ने भी अपने शिक्षकों के इस प्रयास की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की इच्छा व्यक्त की।

कार्यशाला के अंतिम चरण में वातावरण अत्यंत उत्साहजनक हो गया जब प्रो. एम.सी. पाण्डे और मुख्य वक्ता डॉ. भूपेन्द्र सिंह मेहरा ने सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इन प्रमाण पत्रों को प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर जो मुस्कान और आत्मविश्वास था, वह इस बात का गवाह था कि वे अब चुनौतियों से लड़ने और खुद का रास्ता खुद बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्राचार्य ने समापन संदेश में छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि डिजिटल युग की अपार संभावनाओं का लाभ उठाएं और केवल नौकरी की तलाश करने वाले (Job Seeker) न बनकर रोजगार के सृजनकर्ता (Job Creator) बनने का संकल्प लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वरोजगार ही देश की आर्थिक मजबूती का आधार है और युवा शक्ति ही इस परिवर्तन की वाहक बन सकती है। कार्यक्रम के अंत में नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने इस गरिमामय आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी अतिथियों, शिक्षकों और ऊर्जावान छात्र-छात्राओं का हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई, बल्कि इसने रामनगर के छात्र समुदाय में नवाचार की एक नई चिंगारी सुलगा दी है, जो आने वाले समय में एक धधकती हुई मशाल बनकर उद्यमिता के क्षेत्र में प्रकाश फैलाएगी।

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