काशीपुर। श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (SIMT) के प्रांगण में आज तकनीक, मेधा और रचनात्मकता का एक ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने शिक्षा जगत में आधुनिकता की एक नई इबारत लिख दी है। संस्थान के ‘इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल’ (IIC) के तत्वावधान में आयोजित ‘हैकाथॉन 2026’ और ‘विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार दिवस’ का यह भव्य उत्सव मात्र एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भविष्य के तकनीकी दिग्गजों को तैयार करने वाली एक कार्यशाला सिद्ध हुआ। सुबह से ही संस्थान में भारी उत्साह और ऊर्जा का संचार था, क्योंकि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए युवा मस्तिष्क अपनी कोडिंग और समस्या समाधान की क्षमताओं को परखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब युवाओं के पास नवाचार की दृष्टि और संस्थान का दृढ़ सहयोग हो, तो वे किसी भी जटिल वैश्विक चुनौती का समाधान खोजने में सक्षम हैं। यह पूरा आयोजन रचनात्मक सोच को व्यावहारिक धरातल पर उतारने और डिजिटल इंडिया के सपनों को पंख देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल तकनीकी स्पर्धा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अम्रपाली यूनिवर्सिटी हल्द्वानी, श्री राम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी बरेली, सत्येंद्र चंद्र गुड़िया आईएमटी काशीपुर, ईएसटीसी-एसीईएल रामनगर, मुरादाबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मुरादाबाद और स्वयं श्रीराम इंस्टीट्यूट काशीपुर सहित 25 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों की टीमों ने अपनी दावेदारी पेश की। कुल 120 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी मेधा का प्रदर्शन करते हुए कोडिंग, प्रोग्रामिंग और टीम वर्क के माध्यम से ऐसे प्रोजेक्ट्स और प्रोटोटाइप्स तैयार किए, जिन्हें देखकर निर्णायक मंडल भी दंग रह गया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों के बीच का कड़ा मुकाबला और जीत का जज्बा देखते ही बनता था। प्रत्येक टीम ने आधुनिक युग की तकनीकी समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए अपनी रचनात्मकता की सीमाओं को चुनौती दी। यह मंच न केवल तकनीकी कौशल के प्रदर्शन का माध्यम बना, बल्कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच आपसी संवाद और वैचारिक आदान-प्रदान का एक मजबूत सेतु भी साबित हुआ।
प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होने का क्षण सबसे रोमांचक रहा, जिसमें हल्द्वानी की अम्रपाली यूनिवर्सिटी की टीम अपेक्स (Team Apex) ने अपनी असाधारण प्रतिभा और सटीक समस्या समाधान के बल पर प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इस विजेता टीम को 10,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि और गौरवशाली प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, मेजबान संस्थान श्रीराम इंस्टीट्यूट काशीपुर की टीम रेडहैट कोडर्स (Team Redhat Coders) ने अपनी तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाते हुए द्वितीय स्थान प्राप्त किया और 8,000 रुपये का नगद पुरस्कार अपने नाम किया। तृतीय स्थान के लिए श्री राम मूर्ति स्मारक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी बरेली की टीम कोड क्वेस्टर्स (Team Code Questers) ने बाजी मारी, जिन्हें 6,000 रुपये के नगद पुरस्कार से नवाजा गया। विजेताओं के चेहरों पर झलकता गौरव और आत्मविश्वास यह बता रहा था कि यह पुरस्कार केवल एक राशि नहीं, बल्कि उनकी रातों की मेहनत और तकनीकी सूझबूझ का सच्चा सम्मान है। प्रबंधन ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर उनके जज्बे की सराहना की।
संस्थान के अध्यक्ष रवींद्र कुमार ने इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के भीतर छिपी हुई नैसर्गिक प्रतिभा को तराशने का कार्य करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की कठोर चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना होगा। उनके अनुसार, हैकाथॉन जैसे मंच विद्यार्थियों को दबाव में कार्य करने और सामूहिक रूप से नवाचार करने की प्रेरणा देते हैं, जो उनके भविष्य के करियर में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने सभी विजेता टीमों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और यह विश्वास दिलाया कि संस्थान भविष्य में भी तकनीकी उत्कृष्टता के ऐसे दीप जलाता रहेगा। अध्यक्ष महोदय का यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि श्रीराम इंस्टीट्यूट केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य के दूरदर्शी नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण कर रहा है।

इसी क्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. योगराज सिंह ने नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हैकाथॉन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने की प्रवृत्ति को जन्म देता है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ तकनीकी मंचों के एकीकरण को अनिवार्य बताया और कहा कि SIMT अपने छात्रों को विश्वस्तरीय तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। डॉ. योगराज सिंह के अनुसार, रचनात्मकता और नवाचार दिवस मनाने का वास्तविक उद्देश्य छात्रों की कल्पनाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए पूरी IIC टीम की पीठ थपथपाई और कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य समाज की समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजना होना चाहिए। उनके मार्गदर्शन में संस्थान निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है और युवाओं को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है जहाँ वे अपने सपनों को हकीकत में बदलने का साहस जुटा सकें।
प्राचार्य डॉ. एस. एस. कुशवाहा ने विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार दिवस की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि आज के युग में नवाचार ही प्रगति की एकमात्र कुंजी है। उन्होंने कहा कि यह हैकाथॉन छात्रों के लिए अपनी प्रोग्रामिंग स्किल्स को तराशने का एक सुनहरा अवसर था, जहाँ उन्होंने वास्तविक समस्याओं का तकनीकी समाधान प्रस्तुत किया। प्राचार्य ने आयोजन समिति और विभिन्न शहरों से आए प्रतिभागी संस्थानों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में तकनीकी मेधाओं का एक छत के नीचे आना ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है। उन्होंने विशेष रूप से कोडिंग और डिजिटल टीम वर्क की सराहना की, जिसने प्रतियोगिता के स्तर को वैश्विक मानकों के करीब पहुँचा दिया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों से छात्रों के भीतर का संकोच दूर होता है और वे बड़े मंचों पर अपनी बात रखने में सक्षम बनते हैं। डॉ. कुशवाहा ने इस सफल आयोजन के लिए पूरी आयोजन समिति के सूक्ष्म नियोजन और क्रियान्वयन की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
कार्यक्रम को भव्य और सुचारू बनाने में संस्थान के विभिन्न विभागों के दिग्गजों ने अपनी विशेषज्ञता का योगदान दिया। कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष बलविंदर सिंह, वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शोभित त्रिपाठी और शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष रविंद्र कुमार के कुशल निर्देशन और अनुभवी मार्गदर्शन में ही यह आयोजन अपनी पूर्णता को प्राप्त कर सका। इन वरिष्ठ सदस्यों ने न केवल प्रतियोगिता की रूपरेखा तैयार की, बल्कि प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने में भी अग्रणी भूमिका निभाई। आयोजन समिति ने पूरी पारदर्शिता और व्यावसायिकता के साथ प्रत्येक सत्र का संचालन किया, जिससे प्रतिभागियों को एक स्वच्छ और प्रतिस्पर्धी माहौल मिल सका। इनके सहयोग से ही संस्थान ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयास और स्पष्ट विज़न के माध्यम से किसी भी बड़े आयोजन को ऐतिहासिक बनाया जा सकता है। इन प्रबुद्ध विभागाध्यक्षों की देखरेख में हैकाथॉन के प्रत्येक चरण को वैज्ञानिक पद्धति से क्रियान्वित किया गया।
इस महा-आयोजन की सफलता के पीछे कंप्यूटर विज्ञान विभाग के जुझारू शिक्षकों और स्टाफ का भी अहम योगदान रहा, जिन्होंने दिन-रात एक कर व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखा। विशेष रूप से कंप्यूटर विज्ञान विभाग के सह-प्रवक्ता डॉ. महेंद्र सिंह बोरा, सहायक प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह लटवाल, भूपेंद्र सिंह, पंकज तिवारी, शशांक गौड़ और सुश्री छवि चौधरी ने तकनीकी पहलुओं और समन्वय को बखूबी संभाला। साथ ही, समस्त संकाय सदस्यों, गैर-शिक्षण स्टाफ और आयोजक छात्र-छात्राओं के सामूहिक सहयोग ने इस कार्यक्रम को यादगार बना दिया। SIMT काशीपुर आज शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में न केवल उत्तराखंड बल्कि संपूर्ण उत्तर भारत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। युवाओं को नई दिशा और असीमित अवसर प्रदान करने वाला यह संस्थान अपनी निरंतर उत्कृष्ट कार्यप्रणाली से तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहा है। निदेशक प्रो. (डॉ.) योग राज सिंह के नेतृत्व में यह आयोजन तकनीकी इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों के साथ दर्ज हो गया है।





