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लखनऊ कोचिंग अग्निकांड ने खोली सुरक्षा की पोल, मीनू गुप्ता ने उठाए कड़े सवाल

मुनाफे की अंधी दौड़ में मासूम सपनों की बलि, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर फूटा जनाक्रोश। कांग्रेस नेत्री ने प्रशासनिक जवाबदेही तय कर दोषियों के खिलाफ ऐतिहासिक और कठोर कार्रवाई की मांग उठाई।

काशीपुर। उत्तर प्रदेश की राजधानी में घटित हुए एक बेहद वीभत्स और रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसने एक बार फिर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। लखनऊ के एक नामचीन कोचिंग सेंटर में लगी इस भीषण और विकराल आग की लपटों ने कई मासूम छात्र-छात्राओं को असमय ही मौत की आगोश में सुला दिया, जिससे चारों तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल पसरा हुआ है। इस अत्यंत हृदयविदारक और रोंगटे खड़े कर देने वाले अग्निकांड पर उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से भी बेहद तीखी और भावुक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में काशीपुर की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मीनू गुप्ता ने इस पूरी घटना पर अपना गहरा दुख और असीम संवेदना व्यक्त करते हुए इसे आधुनिक समाज के माथे पर एक बहुत बड़ा कलंक करार दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस दर्दनाक वाकये ने देश के हर एक संवेनशील नागरिक की अंतरात्मा को पूरी तरह से लहूलुहान कर दिया है क्योंकि जिन बच्चों को देश का भविष्य बनना था, वे व्यवस्था की भेंट चढ़ गए।

महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक फैले इस अनियंत्रित कोचिंग हब और व्यावसायिक शिक्षा के इस विकृत दौर पर मीनू गुप्ता ने बेहद कड़ा और वैचारिक प्रहार किया है। उन्होंने इस बात को प्रमुखता से उठाया कि आज का मौजूदा दौर पूरी तरह से अंधी और अनियंत्रित होड़ का शिकार हो चुका है, जहां लोगों के भीतर किसी भी जायज-नाजायज तरीके से केवल और केवल अकूत धन-दौलत अर्जित करने का एक पागलपन सवार हो गया है। वरिष्ठ नेत्री का मानना है कि इस अनैतिक और अंधी व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा की वजह से आज के समाज में इंसानी जिंदगी का मोल लगातार घटता जा रहा है और वह कौड़ियों के भाव बिक रही है। पैसे की हवस में डूबे ये तथाकथित बड़े संस्थान और बड़े-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान मूलभूत सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख चुके हैं, जिनका एकमात्र और अंतिम उद्देश्य केवल और केवल भारी-भरकम मुनाफा कमाना रह गया है। इस घोर लापरवाही का खामियाजा उन निर्दोष और आम लोगों को अपनी बेशकीमती जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है, जो यहां अपने सुनहरे सपने लेकर आते हैं।

हादसे की भयावहता और इसके पीछे छिपे असल गुनहगारों को बेनकाब करते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ महिला नेता ने इस पूरे घटनाक्रम के प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं की भी गहराई से पड़ताल की है। मीनू गुप्ता का यह स्पष्ट और दृढ़ मत है कि लखनऊ की इस बेहद भयावह घटना को महज एक इत्तेफाक या कोई प्राकृतिक हादसा मानकर रफा-दफा बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सरासर एक बड़ी प्रशासनिक और व्यक्तिगत लापरवाही का जीता-जागता परिणाम है। यह उन रसूखदार और रईस लोगों के घोर गैर-जिम्मेदाराना रवैये की वजह से हुआ है जो अपने तुच्छ निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए कड़े सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने में जरा भी संकोच नहीं करते। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इन गगनचुंबी इमारतों, बड़े शिक्षण संस्थानों और अन्य तमाम तरह के कमर्शियल सेंटर्स में फायर सेफ्टी के सभी तय मानकों का पूरी तरह और कड़ाई से अनुपालन किया जाता, तो शायद आज इन मासूमों को इस तरह तड़प-तड़प कर अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।

इस तरह की बार-बार होने वाली त्रासदियों को रोकने के लिए व्यवस्था में एक बहुत बड़े और आमूल-चूल परिवर्तन की मांग करते हुए कांग्रेस नेत्री ने शासन को कड़े कदम उठाने की नसीहत दी है। मीनू गुप्ता ने कहा कि अब वह समय आ चुका है जब स्थानीय प्रशासन और संबंधित सरकारी महकमों को अपनी गहरी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा और ऐसे बेलगाम संस्थानों के खिलाफ एक बेहद व्यापक और सख्त दंडात्मक अभियान की शुरुआत करनी होगी। उनके अनुसार, कानून का उल्लंघन करने वाले और मानवीय जीवन के साथ इस कदर भयंकर खिलवाड़ करने वाले अपराधियों को मिलने वाली सजा इतनी ज्यादा कठोर, ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाली होनी चाहिए कि भविष्य में कोई भी रसूखदार व्यक्ति या बिल्डर सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने का ख्वाब में भी साहस न कर सके। जब तक इस भ्रष्ट तंत्र के भीतर कानून का एक गहरा और वास्तविक खौफ पैदा नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी दर्दनाक और रोंगटे खड़े करने वाली घटनाओं पर प्रभावी रूप से रोक लगाना पूरी तरह नामुमकिन होगा।

इस भीषण अग्निकांड में असमय काल के गाल में समा गए उन मासूम और होनहार विद्यार्थियों को याद करते हुए वरिष्ठ नेत्री पूरी तरह से भावुक हो उठीं और उन्होंने पीड़ित परिवारों के दर्द को महसूस किया। मीनू गुप्ता ने उन दिवंगत आत्माओं के प्रति अपनी सच्ची और अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिन अभागे माता-पिता ने अपने जिगर के टुकड़ों को इस भयानक लापरवाही के कारण हमेशा के लिए खो दिया है, उनके इस अंतहीन और गहरे दुख की थाह ले पाना किसी भी इंसान के लिए मुमकिन नहीं है। यह एक ऐसी अपूरणीय और कभी न पूरी होने वाली क्षति है, जिसने न केवल उन विशिष्ट परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया है बल्कि समूचे राष्ट्र को भीतर तक हिलाकर रख दिया है। अपनी बात के समापन पर मीनू गुप्ता ने अत्यंत व्याकुल मन से सर्वशक्तिमान ईश्वर से यह करुण प्रार्थना की कि वे उन तमाम मृत विद्यार्थियों की पुण्य आत्माओं को अपने चरणों में परम शांति प्रदान करें और इस असहनीय, वज्रपात जैसे दुख को सहन करने के लिए उन शोकाकुल परिजनों को अपार मानसिक शक्ति और संबल दें।

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