काशीपुर। देवभूमि के पावन आंगन में आस्था, संस्कृति और परंपराओं का संगम कहे जाने वाले सुप्रसिद्ध चैती मेला के वैभवशाली समापन के पश्चात अब भक्ति के साथ शक्ति और शुचिता का अनूठा संगम देखने को मिलने वाला है। काशीपुर के प्रथम नागरिक यानी महापौर दीपक बाली ने एक दूरदर्शी और अनुकरणीय पहल करते हुए आगामी 29 अप्रैल, दिन बुधवार को प्रातः काल 7:00 बजे से समूचे मेला क्षेत्र में एक विराट स्वच्छता अभियान चलाने का उद्घोष कर दिया है। नगर निगम की इस विशेष मुहिम को “जहां उत्सव, वहां स्वच्छता” के मंत्र के साथ धरातल पर उतारा जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य मेले की चकाचौंध के बाद पीछे छूटे अपशिष्ट को हटाकर इस पावन भूमि की गरिमा को पुनः स्थापित करना है। महापौर ने इस अभियान को केवल एक प्रशासनिक कार्य न मानकर इसे एक सामाजिक चेतना का उत्सव करार दिया है, जिसमें शहर के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक की भागीदारी अनिवार्य बताई गई है।
मेला परिसर की पवित्रता को लेकर अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए महापौर दीपक बाली ने हृदयस्पर्शी शब्दों में कहा कि चैती मेला जैसे वृहद धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान न केवल हमारी पहचान हैं, बल्कि ये हमारी आस्था के जीवंत केंद्र भी हैं। आयोजन के दौरान जुटने वाली लाखों की भीड़ और तमाम गतिविधियों के कारण परिसर में गंदगी का होना स्वाभाविक है, किंतु मेला संपन्न होने के तुरंत बाद उस स्थान को स्वच्छ बनाना हम सभी का परम नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने बल देकर कहा कि इस परिसर में अनेक सिद्ध धार्मिक स्थल और देवस्थान विद्यमान हैं, जिनकी दिव्यता और शुचिता को बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। श्री दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि जब राहगीर और श्रद्धालु इस क्षेत्र से गुजरें, तो उन्हें यहाँ के वातावरण में एक विशेष प्रकार की निर्मलता और स्वच्छता की अनुभूति होनी चाहिए, जो काशीपुर की सभ्य छवि को प्रदर्शित करे।
इस स्वच्छता महायज्ञ की रूपरेखा को और अधिक विस्तार देते हुए महापौर ने नगर के समस्त प्रबुद्ध नागरिकों, ऊर्जावान युवाओं और जागरूक परिवारों से सीधा संवाद करते हुए आह्वान किया है कि वे अपने मित्रों और परिजनों सहित इस श्रमदान का हिस्सा बनें। उनका मानना है कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति स्वच्छता के इस संकल्प से नहीं जुड़ेगा, तब तक कोई भी अभियान पूर्णतः सफल नहीं हो सकता। दीपक बाली ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नगर निगम काशीपुर द्वारा संचालित यह विशाल अभियान मात्र कूड़ा-कचरा उठाने तक ही सीमित नहीं है, अपितु यह जन-मानस में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति एक गहरी चेतना जागृत करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने शहरवासियों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक स्वच्छ शहर ही स्वस्थ समाज की नींव होता है और इस नींव को मजबूत करने के लिए 29 अप्रैल की सुबह हम सभी को एकजुट होकर अपनी सेवा भावना का परिचय देना होगा।
प्रशासनिक और सामाजिक सामंजस्य की मिसाल पेश करते हुए महापौर ने काशीपुर के समस्त सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, वार्ड पार्षदों और विशेषकर युवा शक्ति से इस पुनीत कार्य में सहयोग की विशेष अपेक्षा जताई है। उन्होंने कहा कि “आइए, हम सब मिलकर अपने प्रिय काशीपुर को उत्तराखंड का एक स्वच्छ, सुंदर और आदर्श शहर बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाएं।” दीपक बाली का यह विजन दर्शाता है कि वे काशीपुर को केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि धरातल पर भी एक मिसाल के तौर पर विकसित करना चाहते हैं। 29 अप्रैल को होने वाला यह कार्यक्रम वास्तव में जनभागीदारी का एक ऐसा उदाहरण बनेगा, जो आने वाले वर्षों में बड़े आयोजनों के बाद सफाई प्रबंधन के लिए एक नजीर पेश करेगा। अब समय आ गया है कि काशीपुर का हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और इस सफाई अभियान को एक जन-आंदोलन का रूप देकर अपनी देवतुल्य भूमि का मान बढ़ाए।
स्वच्छता के इस महासंग्राम को लेकर नगर निगम काशीपुर ने अपनी सभी आंतरिक तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ मानव बल का भी उचित प्रबंधन किया गया है। महापौर दीपक बाली ने व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि बुधवार की सुबह जब सूर्य की पहली किरण मेला परिसर पर पड़े, तब सफाई नायकों और आम जनता का उत्साह चरम पर हो। उनका कहना है कि इस अभियान के माध्यम से हम आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देना चाहते हैं कि उत्सव मनाना जितना महत्वपूर्ण है, उत्सव के पश्चात अपने परिवेश को संवारना उससे भी कहीं अधिक आवश्यक है। काशीपुर की जनता में इस अपील के बाद एक नया जोश देखा जा रहा है, और उम्मीद जताई जा रही है कि भारी संख्या में लोग मेला परिसर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे और काशीपुर की सुंदरता में चार चांद लगाएंगे।
नगर निगम की इस पहल को क्षेत्र के विभिन्न वर्गों से व्यापक समर्थन मिल रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और शहर की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। महापौर ने अंत में यह विश्वास व्यक्त किया कि काशीपुर के लोग अपनी गौरवशाली परंपरा को निभाते हुए इस अभियान को ऐतिहासिक सफलता दिलाएंगे। उनके अनुसार, चैती मेला की संपन्नता तभी पूर्ण मानी जाएगी जब वह भूमि उतनी ही स्वच्छ हो जाए जितनी वह मेले के आरंभ से पूर्व थी। इस विशेष अभियान को लेकर शहर के मुख्य चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर भी चर्चाएं तेज हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महापौर की इस मार्मिक अपील ने नागरिकों के दिलों को छुआ है। अब सबकी निगाहें 29 अप्रैल की उस सुबह पर टिकी हैं, जब काशीपुर के जागरूक बाशिंदे हाथों में झाड़ू थामकर और मन में सेवा का भाव लेकर अपने शहर की कायाकल्प करने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।





