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भाजपा की मास्टरस्ट्रोक घर वापसी से उधमसिंहनगर में विपक्ष बेहाल संगठन हुआ और मजबूत

खटीमा में मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी में दो प्रभावशाली नगर पंचायत अध्यक्षों ने फिर थामा भगवा दामन, काशीपुर महापौर दीपक वाली की रणनीतिक भूमिका बनी चर्चा का केंद्र, जिले की राजनीति में बदलते समीकरणों से बढ़ी विपक्ष की चिंता।

खटीमा। उत्तराखंड की देवभूमि में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक शक्ति को एक नया आयाम देते हुए विरोधी खेमों में खलबली मचा दी है। सीमांत जिले उधमसिंहनगर के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने आने वाले चुनावों से पहले सूबे के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पुलट कर रख दिया है। दरअसल, काफी समय से चल रही आपसी खींचतान, कड़वाहट और भारी राजनीतिक दूरियों को पूरी तरह से समाप्त करते हुए भाजपा ने एक बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत दो दिग्गज नगर पंचायत अध्यक्षों की ससम्मान घर वापसी करा दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल विपक्षी दलों के हौसले पस्त कर दिए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि भाजपा अपने पुराने और कद्दावर नेताओं को दोबारा गले लगाने के लिए कितनी गंभीर है। जिले के भीतर इसे एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे कुमाऊं मंडल की राजनीति में एक बार फिर से पूरी तरह भगवा रंग गहरा होता दिखाई दे रहा है।

इस बेहद महत्वपूर्ण और सनसनीखेज राजनीतिक मिलन की गवाही एक खास तस्वीर भी दे रही है, जो इस वक्त सोशल मीडिया से लेकर हर सियासी चाय की दुकान पर जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। वायरल हो रही इस ऐतिहासिक फोटो में रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा, काशीपुर के महापौर दीपक वाली, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या और दराज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला एक साथ बेहद मुस्कुराते हुए और गर्मजोशी से लबरेज अंदाज में दिखाई दे रहे हैं, जो जिले की राजनीति में आए इस भारी बदलाव की कहानी को खुद-ब-खुद बयां कर रही है। इन तमाम दिग्गज चेहरों की एक साथ मौजूदगी यह साफ संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर का पुराना मनमुटाव अब पूरी तरह से दफन हो चुका है और सभी नेता अब एक सुर में संगठन को मजबूत करने के मिशन में जुट गए हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन कद्दावर नेताओं का एक मंच पर आना सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा बुना गया एक ऐसा चक्रव्यूह है, जिसे भेद पाना विरोधियों के लिए फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है।

पार्टी के भीतर अनुशासन और मजबूती की नई इबारत लिखने के लिए भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय और प्रांतीय संगठन इन दिनों एक विशेष अभियान पर काम कर रहा है, जिसके तहत रूठे हुए जनप्रतिनिधियों और पुराने जमीनी नेताओं को फिर से मुख्यधारा में वापस लाया जा रहा है। इसी कूटनीतिक कवायद के तहत उधमसिंहनगर जिले की बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली गढ़ीनेगी नगर पंचायत और गूलरभोज नगर पंचायत के अध्यक्षों ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए दोबारा से भाजपा का दामन थाम लिया है। इन दोनों ही नगर निकायों के अध्यक्षों का अपने-अपने क्षेत्रों में भारी जनसमर्थन और व्यक्तिगत दबदबा है, जिसके चलते उनके वापस आने से भाजपा को जमीनी स्तर पर एक अप्रत्याशित और अभूतपूर्व मजबूती मिलना बिल्कुल तय माना जा रहा है। संगठन के रणनीतिकारों ने इस पूरे अभियान को इतनी गोपनीयता और सटीकता के साथ अंजाम दिया कि जब तक विपक्षी खेमे को इसकी भनक लगती, तब तक पूरी बाजी पलटी जा चुकी थी और दोनों नेता भगवा खेमे में शामिल हो चुके थे।

इस ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित घर वापसी को बेहद भव्य और यादगार बनाने के लिए सीमांत क्षेत्र खटीमा में एक विशेष और विशाल राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहां सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेहद गर्मजोशी के साथ दोनों सम्मानित जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया, उन्हें पार्टी का पारंपरिक पटका पहनाया और अत्यंत गौरव के साथ भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कराई। मुख्यमंत्री की सीधी मौजूदगी में हुए इस बड़े ज्वाइनिंग कार्यक्रम से यह साफ संदेश गया है कि पार्टी अपने हर एक पुराने सिपाही की अहमियत को बखूबी समझती है और उनके मान-सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। इस बेहद प्रभावशाली कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह आम राय बन चुकी है कि उधमसिंहनगर जिले के भीतर अब भाजपा का संगठनात्मक ढांचा पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा शक्तिशाली, अटूट और अपराजेय हो चुका है, जिसे हिला पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।

यदि इस पूरे घटनाक्रम के सबसे रोमांचक और दिलचस्प पहलू पर नजर डाली जाए, तो गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष का भाजपा में आना सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और सियासी तौर पर बेहद गरमागरम माना जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष ने पिछले काफी लंबे समय से भाजपा के ही कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा वर्तमान विधायक अरविंद पाण्डेय के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल रखा था और दोनों के बीच की जुबानी जंग सरेआम जगजाहिर थी। इन दोनों नेताओं के बीच की यह आपसी अदावत इतनी गहरी हो चुकी थी कि जिले की राजनीति में इसे संभालना संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था, लेकिन अब गूलरभोज अध्यक्ष का सीधे भाजपा में शामिल हो जाना एक अविश्वसनीय मोड़ है। इस अप्रत्याशित और नाटकीय घटनाक्रम को जिले की आंतरिक राजनीति में एक बहुत बड़ा और युगांतरकारी मोड़ माना जा रहा है, जिसने पुरानी तमाम कड़वाहटों पर एक ही झटके में पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया है।

उत्तराखंड की राजनीति को बहुत करीब से देखने और समझने वाले अनुभवी राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को आगामी स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों से पहले भाजपा की एक बेहद आक्रामक और सोची-समझी चुनावी रणनीति के रूप में देख रहे हैं। भाजपा आलाकमान इस बात को अच्छी तरह जानता है कि अगर चुनावों में बंपर जीत हासिल करनी है, तो सबसे पहले अपने घर के भीतर के बिखराव को पूरी तरह से ठीक करना होगा और आंतरिक गुटबाजी को जड़ से खत्म करना होगा। यही वजह है कि पार्टी ने विरोधियों को पछाड़ने से पहले अपने पुराने कुनबे को एक छत के नीचे लाने की इस बेहद प्रभावी रणनीति पर काम किया और उसमें एक बड़ी कामयाबी भी हासिल कर ली है। जानकारों का कहना है कि उधमसिंहनगर जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जिले में इस तरह का सामंजस्य बिठाकर भाजपा ने अपने इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं कि वह आने वाले समय में किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।

इस पूरी बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल और सफल घर वापसी के पीछे छिपे असली सूत्रधारों और रणनीतिकारों को लेकर भी अब पर्दा पूरी तरह से उठ चुका है, जिसमें कई दिलचस्प नाम सामने निकलकर आ रहे हैं। सियासी हलकों में इस बात की बेहद तेज चर्चाएं हैं और सूत्रों के हवाले से यह साफ कहा जा रहा है कि अभिषेक सुखीजा की इस धमाकेदार घर वापसी को मुकम्मल कराने में काशीपुर के महापौर दीपक वाली ने सबसे बड़ी और अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। काशीपुर के महापौर दीपक वाली ने अपनी बेहतरीन राजनीतिक सूझबूझ, व्यक्तिगत संबंधों और कुशल मध्यस्थता का परिचय देते हुए बंद कमरों में कई दौर की लंबी बातचीत की और दोनों पक्षों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने का काम किया। दीपक वाली की इसी अथक मेहनत और शानदार कूटनीति का नतीजा रहा कि पुरानी दूरियां पूरी तरह खत्म हो गईं और अभिषेक सुखीजा ने एक बार फिर से अपनी पुरानी पार्टी में लौटने का मन बना लिया, जिसने भाजपा के भीतर उनकी सांगठनिक पकड़ और कद को और ज्यादा ऊंचा कर दिया है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो अखबार के पन्नों पर छपने वाली इस बेहद सनसनीखेज और गरम राजनीतिक खबर ने उत्तराखंड की पूरी सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और विपक्ष को नए सिरे से अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा, काशीपुर के महापौर दीपक वाली, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या और राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला की संयुक्त ताकत और एकजुटता अब जिले में भाजपा के लिए एक अभेद्य दीवार बन चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जिले के भीतर पुराने नेताओं का यह महामिलन आने वाले समय में राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा, लेकिन फिलहाल भाजपा इस बड़ी कामयाबी से बेहद गदगद और आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही है।

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