काशीपुर। देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच काशीपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने युवाओं के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जब किसी राष्ट्र की युवा शक्ति अपने सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात कठिन परिश्रम करती है, तब उस मेहनत का सम्मान करना सरकारों और व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने कहा कि आज देशभर में लाखों छात्र-छात्राएं सरकारी नौकरियों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वर्षों तक संघर्ष करते हैं। कई युवा अपनी सामाजिक और व्यक्तिगत खुशियों का त्याग कर केवल एक लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं। कोई नींद और आराम छोड़ देता है तो कोई आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद किताबों और कोचिंग का खर्च उठाता है। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बार-बार संदेह उत्पन्न होने लगें, पेपर लीक जैसी घटनाओं की चर्चाएं सामने आएं अथवा पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगने लगें, तो इसका सबसे बड़ा आघात उन युवाओं के मनोबल पर पड़ता है जो अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। अलका पाल ने कहा कि देश का हर जिम्मेदार नागरिक चाहता है कि परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष, पारदर्शी और पूर्ण रूप से भरोसेमंद हो, ताकि मेहनत करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को यह विश्वास रहे कि उसकी सफलता केवल उसकी योग्यता और परिश्रम से तय होगी, किसी अन्य कारण से नहीं।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं केवल प्रश्नपत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं का खेल नहीं होतीं, बल्कि इनके साथ लाखों परिवारों की उम्मीदें और भविष्य जुड़ा होता है। एक युवा जब किसी परीक्षा के लिए तैयारी करता है तो उसके पीछे पूरे परिवार का सहयोग और त्याग भी शामिल होता है। माता-पिता अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च करके बच्चों को बेहतर शिक्षा और संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर बार-बार सवाल खड़े होते हैं तो युवाओं के साथ-साथ उनके परिवारों का विश्वास भी कमजोर होने लगता है। अलका पाल ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि व्यवस्था पर जनता का भरोसा मजबूत किया जाए। युवाओं को यह महसूस होना चाहिए कि उनकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि परीक्षा हो रही है या नहीं, बल्कि असली चिंता यह है कि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कितना मजबूत है। यदि युवाओं के मन में यह भावना घर कर जाए कि परिणाम उनके परिश्रम के बजाय किसी अन्य कारण से प्रभावित हो सकते हैं, तो यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक होगी। इसलिए समय की मांग है कि पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा हर स्तर पर निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि देश के युवा आज एक स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि उन्हें केवल परीक्षा नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा चाहिए। उन्हें केवल अवसर नहीं, बल्कि समान अवसर चाहिए। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले लाखों विद्यार्थियों की यह स्वाभाविक अपेक्षा है कि उनके सपनों की कीमत किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या लापरवाही के कारण कम न आंकी जाए। यदि कोई छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करके परीक्षा केंद्र तक पहुंचता है तो उसे यह भरोसा होना चाहिए कि उसकी मेहनत का मूल्यांकन पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ होगा। अलका पाल ने कहा कि युवाओं की यह मांग किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है। जब युवाओं का विश्वास मजबूत होगा तभी देश की प्रगति का मार्ग भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकारों और संबंधित संस्थाओं को यह समझना होगा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की साख केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं की भावनाओं और आकांक्षाओं से जुड़ा हुआ मुद्दा है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही या संदेह की गुंजाइश समाप्त करने के लिए कठोर और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
अलका पाल ने आगे कहा कि युवाओं के सामने आज सबसे बड़ा द्वंद्व यह खड़ा हो गया है कि वे केवल मेहनत करें या फिर व्यवस्था पर भी लगातार नजर रखें। यह स्थिति किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र और मजबूत शिक्षा प्रणाली के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि जब कोई विद्यार्थी अपना पूरा समय पढ़ाई को समर्पित करता है तो उसका ध्यान केवल अपनी तैयारी पर होना चाहिए, न कि इस चिंता पर कि कहीं परीक्षा प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो जाए। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य किताबों, शिक्षा और प्रतिभा से तैयार होता है, इसलिए उन लोगों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए जो परीक्षा व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अलका पाल ने कहा कि युवा वर्ग देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि यही वर्ग व्यवस्था के प्रति अविश्वास महसूस करने लगे तो यह किसी भी राष्ट्र के लिए चिंता का विषय हो सकता है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रत्येक तंत्र को और अधिक मजबूत, आधुनिक तथा पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी अभ्यर्थी को अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। युवाओं का विश्वास जीतना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।

अपने वक्तव्य के अंतिम चरण में कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि जब मेहनत ईमानदार हो तो व्यवस्था को भी उतना ही ईमानदार दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवाओं की आकांक्षाएं किसी भी राजनीतिक बहस से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं और इन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। युवाओं को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने के लिए केवल अपनी मेहनत पर भरोसा करना पड़े, किसी अन्य कारक पर नहीं। अलका पाल ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य उन युवाओं के हाथों में सुरक्षित होता है जो शिक्षा और परिश्रम के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। इसलिए उनकी उम्मीदों और सपनों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाले हर सवाल का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान किया जाए, ताकि युवाओं के मन में किसी प्रकार की शंका न रहे। उन्होंने कहा कि देश तभी सशक्त और विकसित बन सकता है जब उसके युवाओं को न्यायपूर्ण अवसर, पारदर्शी व्यवस्था और अपनी मेहनत के अनुरूप सफलता प्राप्त करने का भरोसा मिले। यही विश्वास एक मजबूत भविष्य, सशक्त समाज और समृद्ध भारत की आधारशिला बनेगा।





