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श्री जगन्नाथ चित्रकला प्रतियोगिता ने बाल प्रतिभाओं संग भारतीय संस्कृति का अद्भुत उत्सव रचा

पुष्कर सोसाइटी के आयोजन में 150 बच्चों ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा पर मनमोहक चित्र उकेरे, जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने रचनात्मकता, संस्कार तथा सांस्कृतिक चेतना को नई पीढ़ी की सबसे बड़ी शक्ति बताया।

रामनगर। भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर रामनगर में धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और बाल प्रतिभाओं का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब पुष्कर सोसाइटी की ओर से भव्य श्री जगन्नाथ चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने न केवल बच्चों की रचनात्मक क्षमता को नया मंच प्रदान किया, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के प्रति नई पीढ़ी को जोड़ने का भी प्रभावी प्रयास किया। नगर तथा आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 150 बच्चों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी कल्पनाशीलता का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा के दिव्य स्वरूपों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक विषयों पर रंगों के माध्यम से आकर्षक चित्र उकेरे। किसी प्रतिभागी ने रथयात्रा की भव्यता को कैनवास पर उतारा तो किसी ने सनातन संस्कृति के प्रतीकों को अपनी कला का विषय बनाया। रंगों और भावनाओं से सजे इन चित्रों ने उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतियोगिता स्थल पर बच्चों की सृजनात्मक ऊर्जा, अभिभावकों का उत्साह और आयोजकों की व्यवस्थित तैयारियां पूरे आयोजन को विशेष बना रही थीं। चित्रों में दिखाई देने वाली मौलिकता, रंगों का संतुलन और धार्मिक विषयों की सुंदर प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि यदि बच्चों को सही मंच और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी प्रतिभा के माध्यम से समाज और संस्कृति दोनों का गौरव बढ़ा सकते हैं।

आयोजन में अनेक सामाजिक, शैक्षिक और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की प्रतिष्ठा को और अधिक बढ़ा दिया। कार्यक्रम के अतिथि के रूप में प्रसून श्रीवास्तव तथा प्रणय श्रीवास्तव मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों की कलात्मक अभिव्यक्तियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं केवल पुरस्कार प्राप्त करने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि बाल मन में छिपी सृजनात्मक शक्ति को पहचानने और उसे आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करती हैं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में ज्येष्ठ प्रमुख संजय नेगी, मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी, “नेकी की दीवार” के संचालक तारा चन्द्र घिल्डियाल, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता, सचिव अखिल मित्तल तथा परिषद की पूरी टीम की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। अतिथियों ने कहा कि आधुनिक समय में जब बच्चे डिजिटल दुनिया की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, तब इस प्रकार के सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजन उन्हें भारतीय सभ्यता, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने पुष्कर सोसाइटी के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में ऐसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो केवल आयोजन तक सीमित न रहकर बच्चों के व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाने का कार्य करती हैं। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों ने प्रतिभागी बच्चों के चित्रों का अवलोकन किया और उनकी कल्पनाशीलता, रंग संयोजन तथा प्रस्तुति की खुले मन से सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

प्रतियोगिता की निष्पक्षता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए चित्रों का मूल्यांकन अत्यंत सावधानी और पारदर्शिता के साथ किया गया। निर्णायक की भूमिका में श्री सत्यप्रकाश मिश्रा तथा डॉ. रति चौधरी ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का सूक्ष्म अवलोकन करते हुए उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति, विषय की समझ, रंगों के उपयोग, मौलिकता तथा प्रस्तुतीकरण के आधार पर मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में शामिल अधिकांश बच्चों ने अपनी आयु से कहीं अधिक परिपक्व सोच और कलात्मक क्षमता का परिचय दिया है, जो अत्यंत प्रेरणादायक है। इस अवसर पर हेमा जोशी, बेबी, भावना जोशी, मधु ध्यानी, योगाचार्य अनुभा शर्मा, प्रीति गोला, खुशी शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनाओं, संस्कारों और विचारों को अभिव्यक्त करने का सबसे प्रभावी साधन भी है। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने अपने बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुतियों पर गर्व व्यक्त किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, सौहार्द और सकारात्मक वातावरण बना रहा, जिससे यह प्रतियोगिता केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और पारिवारिक मूल्यों का भी सुंदर उदाहरण बन गई। बच्चों के चेहरे पर दिखाई दे रही खुशी और आत्मविश्वास ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऐसे आयोजन उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समारोह के दौरान पुष्कर सोसाइटी की सचिव नीतू चौहान, अध्यक्ष पूनम गुप्ता तथा उपाध्यक्ष भावना कांडपाल ने सभी अतिथियों, निर्णायकों, अभिभावकों और प्रतिभागी बच्चों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना, रचनात्मक सोच और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की दिशा में संस्था लगातार कार्य कर रही है तथा भविष्य में भी समाजहित, शिक्षा, संस्कृति और बाल प्रतिभाओं के विकास को समर्पित ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़कर ही नई पीढ़ी अपने व्यक्तित्व का संतुलित विकास कर सकती है और समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को बेहतर ढंग से निभा सकती है। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागी बच्चों को शुभकामनाएं, सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। आयोजन का एक विशेष आकर्षण भगवान श्री जगन्नाथ की मनमोहक रूप-सज्जा रही, जिसे मिनी अरोरा के विशेष सहयोग से भव्य रूप प्रदान किया गया। इस दिव्य प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराया और कार्यक्रम की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया। प्रतियोगिता को सफल बनाने में ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल हिम्मतपुर, ग्रेट मिशन स्कूल दुर्गापुरी, सनराइज पब्लिक स्कूल, मेहरा पब्लिक स्कूल, मॉडर्न पब्लिक स्कूल, दयानंद पब्लिक स्कूल, यू.एस.आर. सहित अनेक अन्य शिक्षण संस्थानों का उल्लेखनीय सहयोग रहा। विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि शिक्षा और संस्कृति का समन्वय ही बच्चों के सर्वांगीण विकास का सबसे प्रभावी आधार है। पूरे आयोजन ने रामनगर में सांस्कृतिक एकता, सामाजिक सहयोग और बाल प्रतिभाओं के सम्मान का एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी सराहना कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने खुले मन से की।

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