गढ़ीनेगी। मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानने की भावना एक बार फिर उस समय साकार होती दिखाई दी, जब ब्रांच गढ़ीनेगी स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में संत निरंकारी मिशन की सामाजिक इकाई संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। समाजहित और जनकल्याण को समर्पित इस सेवा अभियान में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए निःस्वार्थ सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने मानवता के प्रति समर्पण की प्रेरक मिसाल कायम की। शिविर में मिशन से जुड़े लगभग 75 श्रद्धालु भक्तों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों के जीवन की रक्षा में अपना योगदान दिया, जबकि 82 श्रद्धालुओं ने रक्तदान के लिए अपना पंजीकरण कराया। आयोजन के दौरान रक्तदान को केवल चिकित्सकीय आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने का सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताते हुए अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। रक्त संग्रहण की संपूर्ण व्यवस्था एल० डी० भटृ राजकीय अस्पताल के ब्लड बैंक की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने संभाली। चिकित्सकों और तकनीकी कर्मचारियों ने आधुनिक स्वास्थ्य मानकों का पालन करते हुए प्रत्येक रक्तदाता की आवश्यक जांच के बाद सुरक्षित रूप से रक्त संग्रहित किया। पूरे शिविर में सेवा, अनुशासन और समर्पण का वातावरण बना रहा तथा रक्तदाताओं के चेहरे पर किसी पुरस्कार की अपेक्षा नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने की संतुष्टि स्पष्ट दिखाई दे रही थी। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ऐसे जनहितकारी कार्यों के माध्यम से ही सार्थक रूप से किया जा सकता है।
आयोजन के दौरान संत निरंकारी मिशन के केंद्रीय प्रचारक श्री नेपाल सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने रक्तदान करने वाले सभी श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी सेवा भावना की मुक्तकंठ से सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन सदैव मानवता की सेवा, प्रेम, भाईचारे और निःस्वार्थ समर्पण की भावना को समाज तक पहुंचाने का कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज तथा निरंकारी राजपिता रमित जी के दिव्य मार्गदर्शन में मिशन का प्रत्येक अनुयायी केवल आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सतगुरु की शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतारते हुए प्रेम, नम्रता, करुणा और सेवा की भावना को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि रक्तदान ऐसा दान है, जिसका लाभ सीधे किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन से जुड़ता है और इससे बड़ा कोई मानवीय योगदान नहीं हो सकता। उन्होंने मिशन के प्रेरक संदेश “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाला ऐसा संदेश है, जो प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज का प्रत्येक सक्षम नागरिक समय-समय पर रक्तदान करे तो रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके संबोधन ने उपस्थित श्रद्धालुओं और रक्तदाताओं में सेवा के प्रति नया उत्साह और समर्पण का भाव उत्पन्न किया।
रक्तदान शिविर के सफल संचालन में चिकित्सकीय टीम की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। एल० डी० भटृ राजकीय अस्पताल के ब्लड बैंक से पहुंचे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान रक्त संग्रहण की प्रक्रिया को अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया। प्रत्येक रक्तदाता का स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श और रक्तदान के बाद उनकी देखभाल का विशेष ध्यान रखा गया। रक्तदाताओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ विश्राम और अल्पाहार की भी समुचित व्यवस्था की गई थी, जिससे सभी प्रतिभागियों ने सुरक्षित और सहज वातावरण में रक्तदान किया। आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी सेवा कार्यों में सक्रिय सहयोग करते हुए व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश बार-बार दोहराया गया कि रक्तदान केवल किसी अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने भविष्य में भी नियमित रक्तदान करने का संकल्प व्यक्त किया। शिविर में आए अनेक युवाओं ने पहली बार रक्तदान कर इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बताया और कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने की भावना से बढ़कर कोई संतोष नहीं हो सकता। पूरे आयोजन में सामाजिक सहभागिता, अनुशासन और सेवा भावना का ऐसा वातावरण देखने को मिला, जिसने रक्तदान को एक जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में सकारात्मक संदेश दिया। उपस्थित लोगों ने भी मिशन द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले ऐसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत उपयोगी पहल बताया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर ब्रांच गढ़ीनेगी की मुखी पूज्य विजय सुधा ने रक्तदान शिविर में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, रक्तदाताओं, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और सहयोगी कार्यकर्ताओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन लंबे समय से देशभर में रक्तदान अभियान चलाकर मानव सेवा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता आ रहा है और समाजहित के प्रत्येक कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि मिशन द्वारा अब तक पूरे देश में 9,255 रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से लगभग 14,94,196 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया है। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को नई उम्मीद देने वाले सेवा अभियान का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन रक्तदान के अतिरिक्त समाज उत्थान, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरण तथा अन्य अनेक लोककल्याणकारी परियोजनाओं का भी निरंतर संचालन कर रहा है और निष्काम सेवा की भावना के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग तक सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे सेवा अभियान निरंतर जारी रहेंगे और अधिक से अधिक लोगों को मानवता की सेवा से जोड़ने का कार्य करेंगे। कार्यक्रम का समापन मानव कल्याण, विश्व बंधुत्व और सेवा के संकल्प के साथ हुआ। इस पूरे आयोजन की जानकारी स्थानीय मीडिया सहायक प्रकाश खेड़ा द्वारा उपलब्ध कराई गई। रक्तदान शिविर ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक प्रेरणा एक साथ जुड़ते हैं, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव स्वतः तैयार हो जाती है और मानवता की सच्ची सेवा का मार्ग और अधिक विस्तृत हो जाता है।





