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जिम मैनेजर पर गंभीर आरोपों पर अदालत सख्त आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश

दुष्कर्म, ब्लैकमेल, गर्भपात और लाखों रुपये हड़पने के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुनः सुनवाई के बाद अदालत ने काशीपुर पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

काशीपुर। लगभग दो वर्ष पुराने एक बहुचर्चित और गंभीर आपराधिक प्रकरण ने एक बार फिर न्यायिक गलियारों से लेकर पुलिस प्रशासन तक हलचल तेज कर दी है। लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी एक महिला को अब अदालत से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सचिन कुमार की अदालत ने काशीपुर कोतवाली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मामले में नामजद आरोपी जिम स्वामी रंजीत सिंह लाडी के विरुद्ध विधिसम्मत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ किसी सक्षम अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह आदेश ऐसे समय आया है जब प्रकरण पहले न्यायालय से खारिज हो चुका था, लेकिन बाद में पुनर्निरीक्षण के दौरान उच्चतर अदालत ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए थे। न्यायालय के इस ताजा आदेश को पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जांच के दायरे में प्रवेश कर चुका है। न्यायिक आदेश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस किस दिशा में अपनी जांच आगे बढ़ाती है। अदालत के आदेश ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि यदि किसी प्रार्थना पत्र में प्रथमदृष्टया जांच योग्य तथ्यों का उल्लेख हो और विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया हो, तो ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से जांच का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

प्रकरण से जुड़े अभिलेखों के अनुसार पीड़ित महिला ने अपने अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश के माध्यम से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में विस्तृत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। महिला ने न्यायालय को बताया कि वह पटेलनगर स्थित एक जिम में मैनेजर के रूप में कार्यरत थी। उसी दौरान उसकी पहचान जिम संचालक रंजीत सिंह लाडी से हुई। महिला ने आरोप लगाया कि 11 जुलाई 2024 की दोपहर जिम में सामान्य कार्य के दौरान आरोपी ने पहले वहां लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और इसके बाद उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। महिला का कहना है कि नशीले पदार्थ के प्रभाव से वह बेहोश हो गई और इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए आरोपी ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। महिला ने अदालत को यह भी बताया कि जब उसे होश आया और उसने घटना का विरोध करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही, तब आरोपी ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। आरोप है कि आरोपी ने कहा कि यदि उसने किसी से इस घटना का जिक्र किया या पुलिस तक पहुंची, तो उसके पास मौजूद वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी। महिला का दावा है कि इसी धमकी और मानसिक दबाव के कारण वह तत्काल पुलिस के पास जाने का साहस नहीं जुटा सकी। प्रार्थना पत्र में इस पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित, भय पैदा करने वाला और लगातार दबाव बनाने वाला बताया गया है।

महिला ने अपने आवेदन में आगे यह भी आरोप लगाया कि पहली घटना के बाद आरोपी का उत्पीड़न समाप्त नहीं हुआ, बल्कि कथित रूप से वह लगातार उसे ब्लैकमेल करता रहा। महिला का कहना है कि वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आरोपी ने कई बार उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, उसने मानसिक भय का वातावरण बनाकर उससे ऑनलाइन लेन-देन तथा नकद रूप में लगभग तीन लाख रुपये भी प्राप्त कर लिए। महिला का आरोप है कि यह धनराशि उसकी सहमति से नहीं बल्कि लगातार डर, धमकी और ब्लैकमेलिंग के दबाव में ली गई। प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि आरोपी कथित रूप से हर बार यही कहता था कि यदि उसने किसी को कुछ बताया या विरोध किया, तो उसकी निजी वीडियो सार्वजनिक कर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा नष्ट कर दी जाएगी। महिला ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना, भय और सामाजिक अपमान की आशंका का सामना करना पड़ा। उसके अनुसार आरोपी ने इस कथित दबाव का लाभ उठाकर लंबे समय तक उसका शोषण किया। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आवेदन में महिला ने यह भी कहा कि उसने कई बार इस स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी की कथित धमकियों के कारण वह स्वयं को असहाय महसूस करती रही। अब उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन में महिला ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि इस कथित संबंध के दौरान वह कई बार गर्भवती हुई। उसके अनुसार प्रत्येक बार आरोपी ने उसे दवाइयां खिलाकर गर्भपात कराने का दबाव बनाया और कथित रूप से गर्भ समाप्त कराया। महिला ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि एक अवसर पर जब वह गर्भवती हुई तो आरोपी उसे मुरादाबाद रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले गया, जहां उसका गर्भपात कराया गया। महिला ने अदालत को बताया कि इन घटनाओं के दौरान उसकी इच्छा और स्वास्थ्य दोनों की अनदेखी की गई। उसने आरोप लगाया कि आरोपी केवल अपने खिलाफ किसी प्रकार का कानूनी या सामाजिक विवाद खड़ा न हो, इसलिए लगातार उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाता रहा। महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पूरे घटनाक्रम ने उसके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। इसके अतिरिक्त महिला ने आरोप लगाया कि 19 सितंबर 2025 को आरोपी ने जिम परिसर में उसके साथ फिर जबरन शारीरिक संबंध बनाए और उससे अपने कुछ मित्रों के साथ भी संबंध बनाने का दबाव डाला। महिला ने कहा कि उसने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। महिला के अनुसार इसके बाद भी उसे कई बार गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती रही, जिसके कारण वह भय और तनाव में जीवन व्यतीत करने को विवश रही। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आवेदन में इन सभी आरोपों को विस्तार से दर्ज कराया गया है।

इस पूरे मामले की न्यायिक यात्रा भी कम महत्वपूर्ण नहीं रही। उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों के अनुसार प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 20 जनवरी 2026 को महिला का प्रार्थना पत्र यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर संज्ञेय अपराध कारित होना प्रथम दृष्टया प्रतीत नहीं होता। हालांकि इस आदेश के विरुद्ध पीड़िता के अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश ने द्वितीय अपर जिला जज, काशीपुर की अदालत में पुनर्निरीक्षण याचिका दायर की। पुनर्निरीक्षण के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों तथा अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने 12 मई 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए 20 जनवरी 2026 का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए कि वह मामले की दोबारा सुनवाई कर विधि के अनुरूप नया आदेश पारित करें। इसके बाद प्रकरण पुनः अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सचिन कुमार की अदालत में आया, जहां आवेदन, उपलब्ध दस्तावेजों और समस्त पत्रावली का विस्तृत अवलोकन किया गया। न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के अंतर्गत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए इसे स्वीकार कर लिया और काशीपुर कोतवाली पुलिस को आरोपी रंजीत सिंह लाडी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने तथा स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ किसी सक्षम अधिकारी से विधिसम्मत जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए।

अदालत के इस आदेश के बाद अब पूरा मामला पुलिस विवेचना के चरण में प्रवेश कर चुका है। न्यायिक आदेश का आशय किसी आरोपी को दोषी ठहराना नहीं होता, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर विधिक जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कराना होता है। अब पुलिस की जिम्मेदारी होगी कि वह न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य आधारित जांच करे। विवेचना के दौरान संबंधित दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, चिकित्सीय अभिलेख, वित्तीय लेन-देन, संभावित गवाहों के बयान तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों का परीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई निर्धारित होगी। इस मामले ने एक बार फिर यह प्रश्न भी खड़ा किया है कि यदि किसी महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़े, तो प्रारंभिक स्तर पर शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया कितनी प्रभावी और संवेदनशील है। फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद सभी की निगाहें काशीपुर कोतवाली पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। वहीं यह भी स्पष्ट है कि इस मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी न्यायिक परीक्षण और पुलिस जांच के अधीन हैं तथा अंतिम सत्य का निर्धारण केवल निष्पक्ष विवेचना और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

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