देहरादून। धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न होने के बाद राज्य सरकार के बड़े फैसलों की तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुई इस बैठक में कुल 19 अहम प्रस्तावों पर सहमति बनी, जिनका सीधा असर कर्मचारियों, किसानों, युवाओं, न्याय व्यवस्था, पर्यटन और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा। बैठक समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री सचिव शैलेश बगौली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कैबिनेट के निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री सचिव बंशीधर तिवारी भी मौजूद रहे। सरकार के इन फैसलों को राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। खासतौर पर उपनल कर्मचारियों, गन्ना किसानों और न्यायिक ढांचे से जुड़े निर्णयों को लेकर लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सरकार ने ठोस रुख अपनाया है, जिससे विभिन्न वर्गों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल की बैठक में सबसे अधिक चर्चा उपनल कर्मचारियों को लेकर हुई, जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए उनके हित में बड़ा फैसला किया है। कैबिनेट ने समान कार्य समान वेतन के सिद्धांत पर सहमति जताई है, जिससे उपनल कर्मचारियों को लंबे समय से चली आ रही असमानता से राहत मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय का लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा, ताकि वित्तीय संतुलन बना रहे। पहले चरण में 7000 से अधिक उपनल कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। सैनिक कल्याण विभाग के अंतर्गत भी उपनल कार्मिकों को लेकर निर्णय लिया गया है, जिसमें वर्ष 2015 से जुड़े करीब सात हजार कर्मचारियों को पहले चरण में समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के मनोबल बढ़ाने वाला और सेवा शर्तों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
गन्ना एवं चीनी उद्योग से जुड़े निर्णय भी इस कैबिनेट बैठक का अहम हिस्सा रहे। सरकार ने गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग के तहत चीनी मिलों को बैंकों से ऋण लेने की अनुमति दी है, जिसमें राज्य सरकार गारंटी देगी। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही गन्ना विकास के लिए गन्ने के मूल्य विचलन को भी मंजूरी दी गई है। सामान्य प्रजाति के लिए गन्ने का मूल्य 405 रुपये प्रति कुंतल और अन्य प्रजाति के लिए 395 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है और राज्य में गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कैबिनेट बैठक में प्रशासनिक सुधारों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। निर्वाचन विभाग में वरिष्ठ निजी सचिव, निजी सचिव और सचिव पदों के लिए नई सेवा नियमावली को मंजूरी दी गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नियम तय होंगे। वहीं संस्कृत शिक्षा विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड संस्कृत संस्थाओं से जुड़े विषयों पर भी निर्णय लिया गया है, जिससे पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत अल्मोड़ा और चंपावत जनपदों के लिए छह-छह नए पदों की स्वीकृति दी गई है, जो स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक और तकनीकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक साबित होंगे।
ऊर्जा विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर भी कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई है। वर्ष 2024-25 की एनुअल फाइनेंशियल रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने की सहमति दी गई है, जिससे विभाग की वित्तीय स्थिति पर पारदर्शी चर्चा संभव होगी। इसके अलावा बागवानी मिशन के अंतर्गत एनटी हैलेट राज्य सहायता को 25 प्रतिशत तक देने का निर्णय लिया गया है। यह कदम बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों और उद्यमियों के लिए लाभकारी साबित होगा और राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के इन फैसलों से ऊर्जा और कृषि दोनों क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा और उच्च शिक्षण संस्थानों को लेकर भी कैबिनेट ने अहम निर्णय लिए हैं। दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र के लिए छह नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है, जिससे शोध और अध्ययन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल से जुड़े प्रस्तावों पर भी सहमति बनी है। खेल महाकुंभ के अंतर्गत विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार राशि तय की गई है। विधानसभा स्तर पर ट्रॉफी के साथ एक लाख रुपये, संसदीय स्तर पर दो लाख रुपये और राज्य स्तर पर पांच लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी, जिससे युवाओं में खेल के प्रति उत्साह बढ़ेगा।
न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। न्याय विभाग के तहत विशेष न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। प्रथम चरण में 16 विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे, जिनके लिए कुल 144 पद सृजित किए जाएंगे। ये विशेष न्यायालय देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर में स्थापित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन न्यायालयों के गठन से मामलों के त्वरित निस्तारण में मदद मिलेगी और न्याय प्रणाली पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा गृह विभाग की नियमावली में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े संशोधन को भी हरी झंडी दी गई है। इसके साथ ही न्यूनतम अपर सचिव स्तर के अधिकारी बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे प्रशासनिक ढांचे में स्पष्टता आएगी। सब रजिस्ट्रार को अपील का अधिकार भी प्रदान किया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिलने की संभावना है। इसके अलावा उत्तराखंड की पंचम विधानसभा सत्र सहित कराने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है, जिससे आगामी विधायी कार्यों को गति मिलेगी। इन फैसलों को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पर्यटन विभाग से जुड़े प्रस्ताव भी इस कैबिनेट बैठक में खास रहे। सरकार ने होम स्टे योजना के तहत स्थानीय निवासियों को सीधा लाभ देने की व्यवस्था को मंजूरी दी है, जो पहले लागू नहीं थी। अब होम स्टे संचालन के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, जिससे व्यवस्था अधिक संगठित और पारदर्शी बनेगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गोबर के उपले और चीड़ की पत्तियों को 50-50 प्रतिशत मिश्रण कर उपयोग करने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इस योजना के तहत नगर पालिका द्वारा टेकओवर किया जाएगा, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर धामी कैबिनेट के ये फैसले राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखे जा रहे हैं।





