देहरादून। राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधि ने उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर गर्माहट ला दी है। प्रदेश में वर्ष 2026 के बजट सत्र को लेकर तैयारियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं और भले ही सरकार ने अब तक सत्र की तिथियों की औपचारिक घोषणा नहीं की हो, लेकिन आयोजन स्थल को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी विधानसभा बजट सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में ही आहूत किया जाएगा। इस घोषणा के साथ ही यह संकेत भी मिल गया है कि सरकार गैरसैंण को लेकर अपने पूर्व संकल्पों पर कायम है और इसे केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी राज्य की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह फैसला न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि भावनात्मक और राजनीतिक रूप से भी राज्यवासियों के लिए खास संदेश देता है।
राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बजट सत्र से जुड़े अहम निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया जा चुका था। इसी क्रम में सरकार ने यह ठोस निर्णय लिया कि विधानसभा का आगामी बजट सत्र गैरसैंण के भराड़ीसैंण भवन में आयोजित किया जाएगा। हालांकि, सत्र की तारीखों को लेकर अभी इंतजार बना हुआ है, लेकिन स्थान तय हो जाने से तैयारियों की दिशा और गति दोनों स्पष्ट हो गई हैं। सरकार के इस फैसले को यह भी माना जा रहा है कि वह गैरसैंण को केवल एक वैकल्पिक राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि नीति निर्धारण के मंच के तौर पर स्थापित करना चाहती है। पिछले कुछ वर्षों में गैरसैंण को लेकर चली राजनीतिक बहसों और जनभावनाओं के बीच यह निर्णय सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि राज्य की विधानसभा की महत्वपूर्ण कार्यवाही केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं इस निर्णय के पीछे की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए बताया कि बीते वर्ष भी सरकार की मंशा बजट सत्र को गैरसैंण में आयोजित करने की थी। उस समय भराड़ीसैंण विधानसभा भवन के अंदर रखरखाव और मेंटेनेंस का कार्य चल रहा था, जिसके कारण परिस्थितिवश सत्र वहां आयोजित नहीं हो सका। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उस दौरान मजबूरी में सत्र का स्थान बदलना पड़ा और बाद में इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को भी स्थिति से अवगत कराया गया था। लेकिन इस बार सरकार पहले से पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है, ताकि किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आड़े न आए। मुख्यमंत्री के इन बयानों से साफ है कि गैरसैंण को लेकर सरकार इस बार किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है।
वित्तीय मोर्चे पर भी राज्य सरकार की गतिविधियां तेज़ हो चुकी हैं और बजट निर्माण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। इस संदर्भ में वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने जानकारी दी कि वित्त विभाग की ओर से लगभग एक माह पूर्व ही सभी विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए थे। इन निर्देशों के तहत आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी-अपनी बजटीय मांगों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से वित्त विभाग तक पहुंचाने को कहा गया था। सभी विभागों ने समयसीमा के भीतर अपनी आवश्यकताओं और प्रस्तावों को पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, जिसके बाद अब पोर्टल को बंद कर दिया गया है। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि सरकार इस बार बजट को लेकर समयबद्ध और सुनियोजित ढंग से काम कर रही है।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो विभागों की ओर से भेजी गई सभी बजटीय मांगों का प्रारंभिक परीक्षण पूरा किया जा चुका है। इसके बाद वित्त विभाग द्वारा प्रत्येक विभाग के साथ अलग-अलग बैठकों का दौर शुरू कर दिया गया है। इन बैठकों का उद्देश्य केवल आंकड़ों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि विभागों की प्राथमिकताओं, योजनाओं और जमीनी जरूरतों को समझना भी है। वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, इन संवादों के जरिए यह तय किया जाता है कि किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। बजट संबंधी यह गहन प्रक्रिया इसलिए भी जरूरी मानी जाती है, ताकि तैयार होने वाला बजट केवल कागजी न रह जाए, बल्कि प्रदेश की वास्तविक जरूरतों को भी प्रतिबिंबित कर सके।
बताया गया है कि विभागों के साथ बजट पर चलने वाली यह चर्चा प्रक्रिया करीब एक महीने तक जारी रहेगी। इस दौरान हर विभाग अपनी योजनाओं, चुनौतियों और अपेक्षाओं को वित्त विभाग के सामने रखेगा। साथ ही यह भी ध्यान रखा जाएगा कि बजट संतुलित रहे और राज्य की आर्थिक स्थिति पर अनावश्यक बोझ न पड़े। इसी बीच एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि एक फरवरी को केंद्र सरकार की ओर से देश का आम बजट पेश किया जाना है। भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला बजट राज्यों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसमें कई ऐसी घोषणाएं और प्रावधान होते हैं, जिनका सीधा असर राज्यों की वित्तीय योजनाओं पर पड़ता है। यही कारण है कि राज्य सरकार विधानसभा बजट सत्र से पहले केंद्रीय बजट का गहन अध्ययन करती है।
केंद्र सरकार के बजट का विश्लेषण करने के बाद ही राज्य सरकार अपने बजट को अंतिम रूप देती है। इसमें यह देखा जाता है कि केंद्र से मिलने वाले अनुदान, योजनाओं और वित्तीय सहायता का स्वरूप क्या रहेगा। उसी आधार पर राज्य के बजट में संशोधन और समायोजन किया जाता है। वित्त विभाग की ओर से तैयार किए गए बजट के प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही बजट को विधानसभा में पेश किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया दर्शाती है कि बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि नीति, प्राथमिकता और दूरदृष्टि का दस्तावेज होता है, जिस पर पूरे राज्य की विकास दिशा निर्भर करती है।
पिछले विधानसभा बजट सत्र की बात करें तो उस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया था, जिनका असर राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ता है। इनमें उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों हेतु विशेष प्राविधान (संशोधन) विधेयक, 2025 प्रमुख रहा, जिसने शहरी प्रशासन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए। इसके अलावा उत्तराखंड निक्षेपक (जमाकर्ता) हित संरक्षण (वित्तीय अधिष्ठानों में) (निरसन) विधेयक 2025 को भी मंजूरी दी गई, जो जमाकर्ताओं के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून माना गया। उत्तराखंड राज्य विधान सभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) (संशोधन) विधेयक, 2025 भी उसी सत्र में पारित हुआ, जिसने विधायकों से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी पिछले सत्र के दौरान अहम कदम उठाए गए। उत्तराखंड राज्य कीड़ा विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को पारित कर राज्य में उच्च शिक्षा और शोध के नए आयाम खोलने की दिशा में पहल की गई। इसके साथ ही उत्तराखंड निरसन विधेयक, 2025 और उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास (संशोधन) विधेयक, 2025 जैसे कानूनों को भी मंजूरी मिली। खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड लोक सेवा (कुशल खिलाड़ियों के लिये क्षैतिज आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया गया, जिससे खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर मिलने की संभावनाएं बढ़ीं।
सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े मामलों में भी विधानसभा ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा दृ शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993 (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित कर इन वर्गों के हितों को और मजबूत किया गया। भूमि सुधार से जुड़े उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025 ने भी व्यापक चर्चा बटोरी। निजी शिक्षा क्षेत्र को लेकर उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025 और कर व्यवस्था में बदलाव से संबंधित उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 भी उसी सत्र में पास हुए।
इसके अतिरिक्त उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959) (संशोधन) विधेयक, 2024 को प्रवर समिति द्वारा मूल रूप में यथासंस्तुत किए जाने के बाद स्वीकृति दी गई। वित्तीय दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण उत्तराखंड विनियोग विधेयक, 2025 को भी मंजूरी मिली, जिसके माध्यम से राज्य सरकार को विभिन्न मदों में खर्च करने की संवैधानिक अनुमति प्राप्त हुई। इन सभी विधेयकों के पारित होने से यह स्पष्ट होता है कि पिछले बजट सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए थे। अब आगामी बजट सत्र से भी इसी तरह की सक्रियता और निर्णायक कदमों की उम्मीद की जा रही है, खासकर तब जब सत्र गैरसैंण की धरती पर आयोजित होने जा रहा है।





