काशीपुर। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के शांत शहर काशीपुर से उठी एक छोटी सी मानवीय पुकार ने आज सात समंदर पार ब्रिटेन की राजधानी लंदन की दहलीज पर अपनी सशक्त दस्तक दी है। वर्तमान दौर की गलाकाट प्रतिस्पर्धा और केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रहने वाली पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को चुनौती देते हुए उर्वशी दत्त बाली के नेतृत्व में शुरू हुई एक क्रांतिकारी मुहिम “आने वाले 50 तारे” ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपना परचम लहरा दिया है। यह पहल उन अनाथ और वंचित बच्चों के जीवन में आशा की एक ऐसी किरण बनकर उभरी है, जो समाज के हाशिए पर खड़े होकर अपने भविष्य की तलाश कर रहे थे। उर्वशी दत्त बाली का यह दूरदर्शी विजन केवल प्राथमिक साक्षरता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल दर्शन इन बच्चों को स्वावलंबन और आत्मसम्मान के उस शिखर तक पहुँचाना है, जहाँ वे स्कूल की चारदीवारी से बाहर निकलते ही बेरोजगारी के भय से मुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। यह गौरव का विषय है कि काशीपुर की इस जमीनी सच्चाई को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन से जुड़े विद्वानों का साथ मिला है, जो इस अभियान को एक वैश्विक पहचान की ओर ले जा रहा है।
कौशल विकास की इस अद्भुत यात्रा में उर्वशी दत्त बाली ने इस कड़वे सच को पहचाना है कि आधुनिक युग में केवल डिग्री मात्र से जीविकोपार्जन और मानसिक विकास संभव नहीं है, क्योंकि “शिक्षा पर्याप्त है, लेकिन हुनर अनिवार्य है।” इसी मूलमंत्र को साकार करने के लिए उन्होंने काशीपुर के स्थानीय संसाधनों और विशेषज्ञों का एक ऐसा जाल बुना है, जहाँ बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सिलाई कला की बारीकियां सुधा राय और इशिता के निर्देशन में सिखाई जा रही हैं, जबकि बेकिंग की कला में महारत हासिल करने के लिए रामनगर रोड स्थित ऑर्कफ संस्थान इन बच्चों का मार्गदर्शन कर रहा है। इसके साथ ही, होटल प्रबंधन और सेवा क्षेत्र की विशिष्टताओं से भी उन्हें परिचित कराया जा रहा है ताकि वे पर्यटन जैसे बड़े उद्योगों में अपनी जगह बना सकें। तकनीकी क्षेत्रों में भी इन बच्चों को पीछे नहीं रहने दिया गया है; फोटोग्राफी, इलेक्ट्रिकल कार्यों की समझ और सुनील कुमार के निर्देशन में प्लंबिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, डिजिटल क्रांति के इस युग में अल्बख्श मालिक, शिफा मालिक और एनस जी के माध्यम से इन 50 बच्चों को कंप्यूटर और इंटरनेट की बारीकियों में दक्ष बनाया जा रहा है, ताकि वे तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।
व्यक्तित्व निर्माण और संचार कौशल के बिना किसी भी तकनीकी ज्ञान की चमक अधूरी रह जाती है, और इसी कमी को पूरा करने के लिए इस अभियान में अमेरिका से 20 वर्षों का लंबा अनुभव समेट कर लौटे शांतनु चिकारा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह इन बच्चों के भीतर छिपे आत्मविश्वास को जगाने, उनकी बॉडी लैंग्वेज को सुधारने और अंग्रेजी बोलने के प्रवाह में सुधार करने पर निरंतर काम कर रहे हैं, ताकि जब ये बच्चे किसी भी मंच पर खड़े हों, तो उनकी प्रस्तुति किसी अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट पेशेवर से कम न लगे। काशीपुर मेयर की धर्मपत्नी उर्वशी दत्त बाली का स्पष्ट कहना है कि इन बच्चों को न केवल प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि उन्हें प्रतिष्ठित संस्थाओं से प्रमाणित सर्टिफिकेट भी दिलाए जाएंगे, जो उनके भविष्य के लिए पासपोर्ट की तरह काम करेंगे। इसके अलावा, सौंदर्य और स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले बच्चों के लिए राशिद द्वारा हेयर ड्रेसिंग और पार्लर मैनेजमेंट के गुर सिखाए जा रहे हैं। यह व्यापक पाठ्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि काशीपुर की यह धरती अब केवल कृषि और उद्योग के लिए नहीं, बल्कि मानव संसाधन विकास के एक आधुनिक केंद्र के रूप में भी विश्व मानचित्र पर उभर रही है।

इस मुहिम की सबसे बड़ी उपलब्धि तब सामने आई जब यश फाउंडेशन इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के स्कॉलर तेजस डोंगरे इस पहल से गहराई से जुड़ गए। यश फाउंडेशन इंडिया, जो पिछले 14 वर्षों से भारत के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के लिए समर्पित भाव से कार्यरत है, अब काशीपुर के इन ’50 सितारों’ को तराशने में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करेगा। तेजस डोंगरे और उनकी टीम का उत्तराखंड आगमन इस बात का संकेत है कि छोटे शहरों के बड़े सपनों में अब वैश्विक स्तर की रणनीतियों का समावेश हो चुका है। यह सहयोग न केवल इन बच्चों को बेहतर अवसर प्रदान करेगा, बल्कि राज्य के शैक्षणिक ढांचे में भी एक सकारात्मक और सार्थक परिवर्तन की लहर पैदा करेगा। इस पूरे अभियान को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए रूपांकित किया गया है, जहाँ प्रत्येक माह शिक्षक और विशेषज्ञ विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिए एक साथ बैठेंगे। काशीपुर की जनता भी अपनी लोक-लाज और सामुदायिक भावना का परिचय देते हुए इस कार्य में उर्वशी दत्त बाली का कंधा से कंधा मिलाकर साथ दे रही है, जिससे यह अभियान एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
इस पुनीत कार्य में राजकीय तंत्र और निजी शिक्षण संस्थानों का तालमेल भी अतुलनीय देखने को मिल रहा है, जहाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय इंटर कॉलेज, पीरू मदारा के खंड शिक्षा अधिकारी साहू और प्रधानाचार्य ए के पांडे अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। सरकारी विद्यालयों के छात्रों को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंचों और कौशल कार्यक्रमों से जोड़ना अपने आप में एक मिसाल है, जो शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त खाई को पाटने का काम कर रहा है। दूसरी ओर, द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल का प्रबंधन भी इस यज्ञ में अपनी आहुति दे रहा है; संस्थान के चेयरमैन डॉ. नीरज कपूर, डायरेक्टर डॉ. वसुधा कपूर और प्रधानाचार्या मीनल बधवार हर महीने व्यक्तिगत रूप से बच्चों की प्रगति की समीक्षा करते हैं। उनका मानना है कि समाज ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसे सही मायने में लौटाने का श्रेष्ठ माध्यम शिक्षा और सशक्तिकरण ही है। काशीपुर की सड़कों से शुरू हुई यह छोटी सी कोशिश आज जब लंदन के विद्वानों के साथ चर्चा का विषय बनी है, तो यह विश्वास पुख्ता होता है कि यदि नियत साफ हो और संकल्प मजबूत हो, तो देवभूमि का कोई भी बच्चा अनाथ नहीं है, बल्कि वह आने वाले कल का एक चमकता हुआ तारा है। यह पहल केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की वह नींव है जो उत्तराखंड की माटी से तैयार की जा रही है।





