spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडमां चामुंडा मंदिर परिसर में 29वें उत्तरायणी मकर संक्रांति मेले ने रचा...

मां चामुंडा मंदिर परिसर में 29वें उत्तरायणी मकर संक्रांति मेले ने रचा श्रद्धा संस्कृति उत्सव

श्रद्धालुओं की भारी भीड़, लोक संस्कृति की रंगारंग झलक, महापौर दीपक बाली के संदेशों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच उत्तरायणी मेले ने आस्था, विकास और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश दिया।

काशीपुर। उत्तर भारत में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला उत्तरायणी मेला हर वर्ष की तरह इस बार भी जनमानस में उल्लास, आस्था और परंपरा की नई ऊर्जा लेकर सामने आया। देवभूमि उत्तराखंड में इस पर्व की विशेष पहचान रही है और ऊधम सिंह नगर जिले का काशीपुर इस सांस्कृतिक प्रवाह का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। मां चामुण्डा देवी मंदिर परिसर में लगातार अट्ठाईस वर्षों से लगते आ रहे उत्तरायणी मेले की उनतीसवीं कड़ी ने इस बार भी श्रद्धा और संस्कृति का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। सुबह तड़के से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी, जहां पूजा-अर्चना, दर्शन और दान-पुण्य के साथ मकर संक्रांति का स्वागत किया गया। पूरे परिसर को पारंपरिक ध्वजों, रंगीन सजावट और रोशनी से इस प्रकार सजाया गया था कि वातावरण पूरी तरह पर्वमय दिखाई दे रहा था। यह आयोजन केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित न रहकर सामाजिक एकजुटता, लोक संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसने काशीपुर को उत्सव की भावना से सराबोर कर दिया।

काशीपुर के मां चामुण्डा देवी मंदिर में आयोजित उत्तरायणी मेले का विधिवत शुभारंभ नगर निगम के महापौर दीपक बाली द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घाटन से पूर्व ऐपण, रंगोली और पारंपरिक सजावटी कलाओं से जुड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं और युवतियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। इन प्रतियोगिताओं ने उत्तराखंड की लोक कला और सांस्कृतिक सौंदर्य को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। दीप प्रज्वलन के बाद महापौर दीपक बाली को पारंपरिक बाजे-गाजे और सांस्कृतिक उल्लास के साथ रामनगर रोड से मेला स्थल तक लाया गया। इस स्वागत यात्रा ने पूरे नगर में उत्साह का संचार कर दिया। मेला परिसर पहुंचने पर मेला समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने माल्यार्पण, बैज अलंकरण और पुष्पवर्षा के साथ उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस अवसर पर पंडित पूरनचंद कांडपाल, अध्यक्ष ज्ञानेंद्र जोशी, सचिव दीपक कुमार पांडे, मेला व्यवस्थापक सुनील टंडन, जतिन कांडपाल, वासु कांडपाल, महेश चंद पांडे, हरीश भट्ट, आदित्य पांडे, निर्मला पांडे, पुष्पा रौतेला, श्रीमती लता, देव सूर्यवंशी, निर्मला कांडपाल, हरीश त्रिपाठी, जीतू कांडपाल, जयंत पांडे, नवीन जोशी, अमित जोशी, गिरीश पांडे, जगदीश जोशी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर दीपक बाली ने उत्तरायणी पर्व और मकर संक्रांति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी सनातन परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और जीवन दर्शन का उत्सव है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ यह पर्व जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और नव आरंभ का संदेश देता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी संस्कृति में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है और मकर संक्रांति का महत्व आध्यात्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत गहरा है। महापौर ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि उत्तरायणी मेले जैसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ रही है और लोक परंपराओं को समझने का अवसर पा रही है। उन्होंने मेला समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्षों से निरंतर इस आयोजन को सफल बनाना समिति के सदस्यों की निष्ठा, परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।

धर्म और विकास के समन्वय पर अपनी बात रखते हुए दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म उनकी आस्था है और विकास उनका संकल्प। उन्होंने कहा कि काशीपुर के सभी धार्मिक स्थलों तक जाने वाले मार्गों की स्वच्छता और सुदृढ़ता उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। मां चामुण्डा देवी मंदिर तक आने वाले मार्ग का निर्माण बिना किसी आग्रह के प्राथमिकता से कराया गया, क्योंकि यह उनकी जिम्मेदारी थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विकास कार्यों की शुरुआत उन्होंने मां बाल सुंदरी मंदिर को जाने वाले मार्ग से की थी। महापौर ने कहा कि कुछ लोगों ने सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठाए, लेकिन उनके लिए वह मार्ग सबसे महत्वपूर्ण था, क्योंकि उसी रास्ते से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए जाते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जिन मार्गों से ईश्वर के भक्त गुजरते हैं, वे उनके लिए सर्वाेच्च प्राथमिकता रखते हैं और ऐसे कार्यों में किसी प्रकार का संकोच नहीं किया जाएगा।

अपने वक्तव्य के दौरान महापौर दीपक बाली ने काशीपुर में हाल ही में घटित एक दुखद घटना का उल्लेख करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक आत्महत्या की घटना ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया और विदेश में होने के बावजूद उन्होंने हर संभव प्रयास किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पीड़ित परिवार की बात कराई। महापौर के अनुसार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि चाहे दोषी कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि काशीपुर में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी, बदमाशी या आपराधिक गतिविधियों को पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने निर्भीक स्वर में कहा कि वे बिना किसी भय के कार्य कर रहे हैं, क्योंकि जनता और मां का आशीर्वाद उनके साथ है। उनके अनुसार हम सभी एक सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और हमारा दायित्व है कि एक सुरक्षित, संवेदनशील और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करें।

स्वच्छता को लेकर महापौर दीपक बाली ने मंच से और मीडिया के समक्ष विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम अपने घर को मंदिर मानकर साफ-सुथरा रखते हैं, उसी भावना के साथ पूरे शहर को भी अपना घर समझकर स्वच्छ रखना चाहिए। उन्होंने नगरवासियों से आग्रह किया कि नगर निगम के प्रयास तभी सफल होंगे, जब जनता भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस दिन काशीपुर का हर नागरिक स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझ लेगा, उस दिन यह शहर देश के सुंदर और स्वच्छ नगरों की सूची में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म और विकास दोनों एक साथ चलेंगे और इनमें से किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा। जब धर्म की बात होगी, तो वे सनातन धर्म के साथ खड़े रहेंगे और जब विकास की बात आएगी, तो वह सभी के लिए होगा, बिना किसी भेदभाव के।

उत्तरायणी मेले की भव्यता ने पूरे काशीपुर नगर को उत्सव के रंग में रंग दिया। मेला स्थल पर खेल-खिलौनों, पारंपरिक हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और स्वादिष्ट व्यंजनों के दो दर्जन से अधिक आकर्षक स्टाल लगाए गए थे, जहां बच्चों, युवाओं और परिवारों की भारी भीड़ उमड़ी। नगर निगम द्वारा भी दो स्टाल स्थापित किए गए, जिनके माध्यम से स्वच्छता, जनहित योजनाओं और नागरिक जागरूकता से जुड़ी जानकारियां दी गईं। नगर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मेले में पहुंचे। विभिन्न मोहल्लों, बस्तियों और विद्यालयों की टीमों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करीब चार सौ बच्चों, युवक-युवतियों और पर्वतीय अंचलों से आई लोक कलाकारों की टोलियों ने पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

मेले की पूर्व संध्या पर पर्वतीय क्षेत्र से आई छोलिया नृतकों की टोली ने नगर के मुख्य बाजारों में भ्रमण कर पारंपरिक संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इन कलाकारों ने कई गणमान्य नागरिकों के घरों पर जाकर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। छोलिया नृतकों की इस परंपरा का उद्देश्य नगरवासियों को यह संदेश देना होता है कि अगले दिन उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला आयोजित होने जा रहा है और सभी श्रद्धालु मां चामुण्डा देवी मंदिर में आमंत्रित हैं। इस परंपरा ने पूरे नगर में मेले को लेकर उत्साह और प्रतीक्षा को और बढ़ा दिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया था। मेले की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग पूरे वर्ष इस आयोजन का इंतजार करते हैं और इसे काशीपुर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।

कार्यक्रम के दौरान पीसीयू चेयरमैन राम मल्होत्रा, भाजयुमो के प्रदेश कोषाध्यक्ष शाहनवाज, चौधरी समरपाल सिंह, सफाई निरीक्षक मनोज बिष्ट, बाल सुंदरी मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री, अनिल मित्तल सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने मेले की व्यवस्थाओं, अनुशासन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की। मीडिया से बातचीत में भी महापौर दीपक बाली ने उत्तरायणी मेले को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला माध्यम है। अंततः काशीपुर में आयोजित यह 29वां उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का ऐसा जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने नगरवासियों के मन में गर्व और उल्लास की भावना भर दी तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा दी।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!