- दीपक बाली ने काशीपुर में मकर संक्रांति मेले का भव्य उद्घाटन कर संदेश दिया
- महापौर दीपक बाली ने धर्म और विकास को जोड़ते हुए जनता को किया प्रेरित
- दीपक बाली बोले धर्म मेरी आस्था है विकास मेरा संकल्प
- दीपक बाली ने उत्तरायणी मेले से दिया सनातन धर्म और विकास साथ चलने का संदेश
- मकर संक्रांति पर उत्तरायणी मेले ने काशीपुर को रंग संस्कृति और श्रद्धा से भर दिया
काशीपुर। उत्तर भारत में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला उत्तरायणी मेला हर वर्ष की तरह इस बार भी जनमानस में उल्लास, आस्था और परंपरा की नई ऊर्जा लेकर सामने आया। देवभूमि उत्तराखंड में इस पर्व की विशेष पहचान रही है और ऊधम सिंह नगर जिले का काशीपुर इस सांस्कृतिक प्रवाह का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। मां चामुण्डा देवी मंदिर परिसर में लगातार अट्ठाईस वर्षों से लगते आ रहे उत्तरायणी मेले की उनतीसवीं कड़ी ने इस बार भी श्रद्धा और संस्कृति का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। सुबह तड़के से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी, जहां पूजा-अर्चना, दर्शन और दान-पुण्य के साथ मकर संक्रांति का स्वागत किया गया। पूरे परिसर को पारंपरिक ध्वजों, रंगीन सजावट और रोशनी से इस प्रकार सजाया गया था कि वातावरण पूरी तरह पर्वमय दिखाई दे रहा था। यह आयोजन केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित न रहकर सामाजिक एकजुटता, लोक संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसने काशीपुर को उत्सव की भावना से सराबोर कर दिया।
काशीपुर के मां चामुण्डा देवी मंदिर में आयोजित उत्तरायणी मेले का विधिवत शुभारंभ नगर निगम के महापौर दीपक बाली द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। उद्घाटन से पूर्व ऐपण, रंगोली और पारंपरिक सजावटी कलाओं से जुड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं और युवतियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। इन प्रतियोगिताओं ने उत्तराखंड की लोक कला और सांस्कृतिक सौंदर्य को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। दीप प्रज्वलन के बाद महापौर दीपक बाली को पारंपरिक बाजे-गाजे और सांस्कृतिक उल्लास के साथ रामनगर रोड से मेला स्थल तक लाया गया। इस स्वागत यात्रा ने पूरे नगर में उत्साह का संचार कर दिया। मेला परिसर पहुंचने पर मेला समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने माल्यार्पण, बैज अलंकरण और पुष्पवर्षा के साथ उनका गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस अवसर पर पंडित पूरनचंद कांडपाल, अध्यक्ष ज्ञानेंद्र जोशी, सचिव दीपक कुमार पांडे, मेला व्यवस्थापक सुनील टंडन, जतिन कांडपाल, वासु कांडपाल, महेश चंद पांडे, हरीश भट्ट, आदित्य पांडे, निर्मला पांडे, पुष्पा रौतेला, श्रीमती लता, देव सूर्यवंशी, निर्मला कांडपाल, हरीश त्रिपाठी, जीतू कांडपाल, जयंत पांडे, नवीन जोशी, अमित जोशी, गिरीश पांडे, जगदीश जोशी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर दीपक बाली ने उत्तरायणी पर्व और मकर संक्रांति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी सनातन परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और जीवन दर्शन का उत्सव है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ यह पर्व जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और नव आरंभ का संदेश देता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी संस्कृति में सूर्य देव को ग्रहों का राजा माना गया है और मकर संक्रांति का महत्व आध्यात्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत गहरा है। महापौर ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि उत्तरायणी मेले जैसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ रही है और लोक परंपराओं को समझने का अवसर पा रही है। उन्होंने मेला समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्षों से निरंतर इस आयोजन को सफल बनाना समिति के सदस्यों की निष्ठा, परिश्रम और समर्पण का परिणाम है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।
धर्म और विकास के समन्वय पर अपनी बात रखते हुए दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म उनकी आस्था है और विकास उनका संकल्प। उन्होंने कहा कि काशीपुर के सभी धार्मिक स्थलों तक जाने वाले मार्गों की स्वच्छता और सुदृढ़ता उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। मां चामुण्डा देवी मंदिर तक आने वाले मार्ग का निर्माण बिना किसी आग्रह के प्राथमिकता से कराया गया, क्योंकि यह उनकी जिम्मेदारी थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विकास कार्यों की शुरुआत उन्होंने मां बाल सुंदरी मंदिर को जाने वाले मार्ग से की थी। महापौर ने कहा कि कुछ लोगों ने सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठाए, लेकिन उनके लिए वह मार्ग सबसे महत्वपूर्ण था, क्योंकि उसी रास्ते से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए जाते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जिन मार्गों से ईश्वर के भक्त गुजरते हैं, वे उनके लिए सर्वाेच्च प्राथमिकता रखते हैं और ऐसे कार्यों में किसी प्रकार का संकोच नहीं किया जाएगा।
अपने वक्तव्य के दौरान महापौर दीपक बाली ने काशीपुर में हाल ही में घटित एक दुखद घटना का उल्लेख करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक आत्महत्या की घटना ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया और विदेश में होने के बावजूद उन्होंने हर संभव प्रयास किया। भारत लौटने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पीड़ित परिवार की बात कराई। महापौर के अनुसार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि चाहे दोषी कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि काशीपुर में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी, बदमाशी या आपराधिक गतिविधियों को पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने निर्भीक स्वर में कहा कि वे बिना किसी भय के कार्य कर रहे हैं, क्योंकि जनता और मां का आशीर्वाद उनके साथ है। उनके अनुसार हम सभी एक सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और हमारा दायित्व है कि एक सुरक्षित, संवेदनशील और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करें।
स्वच्छता को लेकर महापौर दीपक बाली ने मंच से और मीडिया के समक्ष विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह हम अपने घर को मंदिर मानकर साफ-सुथरा रखते हैं, उसी भावना के साथ पूरे शहर को भी अपना घर समझकर स्वच्छ रखना चाहिए। उन्होंने नगरवासियों से आग्रह किया कि नगर निगम के प्रयास तभी सफल होंगे, जब जनता भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस दिन काशीपुर का हर नागरिक स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझ लेगा, उस दिन यह शहर देश के सुंदर और स्वच्छ नगरों की सूची में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म और विकास दोनों एक साथ चलेंगे और इनमें से किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा। जब धर्म की बात होगी, तो वे सनातन धर्म के साथ खड़े रहेंगे और जब विकास की बात आएगी, तो वह सभी के लिए होगा, बिना किसी भेदभाव के।
उत्तरायणी मेले की भव्यता ने पूरे काशीपुर नगर को उत्सव के रंग में रंग दिया। मेला स्थल पर खेल-खिलौनों, पारंपरिक हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और स्वादिष्ट व्यंजनों के दो दर्जन से अधिक आकर्षक स्टाल लगाए गए थे, जहां बच्चों, युवाओं और परिवारों की भारी भीड़ उमड़ी। नगर निगम द्वारा भी दो स्टाल स्थापित किए गए, जिनके माध्यम से स्वच्छता, जनहित योजनाओं और नागरिक जागरूकता से जुड़ी जानकारियां दी गईं। नगर और आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मेले में पहुंचे। विभिन्न मोहल्लों, बस्तियों और विद्यालयों की टीमों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करीब चार सौ बच्चों, युवक-युवतियों और पर्वतीय अंचलों से आई लोक कलाकारों की टोलियों ने पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
मेले की पूर्व संध्या पर पर्वतीय क्षेत्र से आई छोलिया नृतकों की टोली ने नगर के मुख्य बाजारों में भ्रमण कर पारंपरिक संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इन कलाकारों ने कई गणमान्य नागरिकों के घरों पर जाकर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। छोलिया नृतकों की इस परंपरा का उद्देश्य नगरवासियों को यह संदेश देना होता है कि अगले दिन उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला आयोजित होने जा रहा है और सभी श्रद्धालु मां चामुण्डा देवी मंदिर में आमंत्रित हैं। इस परंपरा ने पूरे नगर में मेले को लेकर उत्साह और प्रतीक्षा को और बढ़ा दिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया था। मेले की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग पूरे वर्ष इस आयोजन का इंतजार करते हैं और इसे काशीपुर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।
कार्यक्रम के दौरान पीसीयू चेयरमैन राम मल्होत्रा, भाजयुमो के प्रदेश कोषाध्यक्ष शाहनवाज, चौधरी समरपाल सिंह, सफाई निरीक्षक मनोज बिष्ट, बाल सुंदरी मंदिर के मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री, अनिल मित्तल सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने मेले की व्यवस्थाओं, अनुशासन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की। मीडिया से बातचीत में भी महापौर दीपक बाली ने उत्तरायणी मेले को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने वाला माध्यम है। अंततः काशीपुर में आयोजित यह 29वां उत्तरायणी मकर संक्रांति मेला श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का ऐसा जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने नगरवासियों के मन में गर्व और उल्लास की भावना भर दी तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा दी।





