रामनगर। पर्यावरण संरक्षण और गंगा स्वच्छता को लेकर एक सशक्त संदेश उस समय जनमानस तक पहुंचा, जब नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत रामनगर में एक व्यापक और प्रेरणादायक अभियान का आयोजन किया गया। 24 फरवरी 2026 को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर का परिसर स्वच्छता, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के रंग में रंगा नजर आया। इस अवसर पर आयोजित भव्य स्वच्छता अभियान और जागरूकता कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण अब केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षण संस्थानों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. एस. एस मौर्य द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवनशैली की धुरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यदि आज की युवा पीढ़ी गंगा और जल स्रोतों की स्वच्छता के लिए सजग होगी, तभी भविष्य सुरक्षित और संतुलित रह सकेगा। उनके शब्दों ने छात्रों और उपस्थित जनसमूह को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए कार्यक्रम की गंभीरता और उद्देश्य को मजबूती प्रदान की।
कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाते हुए महाविद्यालय परिसर से एक विशेष जागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। इस रैली को प्रभारी प्राचार्य प्रो. एस. एस मौर्य ने हरी झंडी दिखाकर गार्जिया मंदिर के लिए रवाना किया। रैली में शामिल छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर, पोस्टर और संदेशात्मक तख्तियां लेकर गंगा नदी, उसकी सहायक नदियों और जल स्रोतों की स्वच्छता का आह्वान किया। रैली का प्रमुख उद्देश्य आम लोगों के भीतर यह समझ विकसित करना था कि स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण के बिना सतत विकास की कल्पना अधूरी है। छात्रों के नारों और संदेशों ने मार्ग में उपस्थित नागरिकों, दुकानदारों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे यह रैली केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर जनसंवाद का माध्यम बन गई। इस दौरान यह भी स्पष्ट रूप से महसूस किया गया कि जब शिक्षा और सामाजिक सरोकार एक साथ आते हैं, तो उनका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक और स्थायी होता है।

रैली के साथ-साथ महाविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों को कार्यक्रम से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए गए। अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को ‘नमामि गंगे’ के संदेश से युक्त टी-शर्ट और कैप वितरित की गईं, जिससे उनमें एकता और जिम्मेदारी की भावना और अधिक प्रबल हुई। यह प्रतीकात्मक पहल छात्रों के लिए गर्व और सहभागिता का प्रतीक बनी। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों को गंगा नदी एवं अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। वक्ताओं ने यह समझाया कि घरेलू कचरा, प्लास्टिक और रसायनों का अनियंत्रित उपयोग किस प्रकार नदियों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। छात्रों को यह भी बताया गया कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास, जैसे कचरे का सही निस्तारण और जल का संयमित उपयोग, बड़े स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। इस जागरूकता सत्र ने छात्रों को केवल श्रोता नहीं, बल्कि परिवर्तन का सक्रिय वाहक बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पक्ष तब सामने आया, जब छात्रों ने गार्जिया मंदिर परिसर में पहुंचकर स्वयं श्रमदान करते हुए सफाई अभियान चलाया। इस दौरान मंदिर क्षेत्र और आसपास के सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई की गई तथा पर्यटकों और स्थानीय लोगों से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई। छात्रों ने विशेष रूप से कोसी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया और लोगों को समझाया कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता तभी बनी रह सकती है, जब उनके आसपास का पर्यावरण भी स्वच्छ हो। यह दृश्य अपने आप में अत्यंत प्रभावशाली था, जहां युवा हाथों में झाड़ू और कूड़ेदान लेकर समाज को स्वच्छता का वास्तविक अर्थ समझा रहे थे। पर्यटकों ने भी छात्रों के इस प्रयास की सराहना की और कई लोगों ने मौके पर ही स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लिया। इस पहल ने यह साबित किया कि जब युवा नेतृत्व करता है, तो समाज स्वतः उसके पीछे चलने को तैयार हो जाता है।

कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ नीमा राणा ने इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और उद्देश्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह योजना केवल नदी सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जैव विविधता संरक्षण, जनभागीदारी, सीवेज प्रबंधन और सतत विकास जैसे कई महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं। उनके अनुसार ‘नमामि गंगे’ ने गंगा संरक्षण को एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान किया है, जिससे दीर्घकालिक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे इस अभियान को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और अपने परिवार तथा समाज में भी इसके संदेश को पहुंचाएं। उनके विचारों ने छात्रों को कार्यक्रम की गंभीरता और व्यापकता को समझने में मदद की और उन्हें दीर्घकालिक सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
इस पूरे आयोजन में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. मुरली धर कापड़ी का योगदान भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए छात्रों का मार्गदर्शन किया और स्वच्छता अभियान को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में सहयोग दिया। उनकी सहभागिता ने यह दर्शाया कि जब शिक्षक और छात्र एक साझा उद्देश्य के लिए साथ आते हैं, तो शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित न रहकर समाज के लिए उपयोगी बन जाती है। कार्यक्रम के समापन पर यह स्पष्ट महसूस किया गया कि यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली चेतना का प्रारंभ है। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर द्वारा आयोजित यह स्वच्छता और जागरूकता अभियान निश्चित रूप से गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ, जिसने युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी और समाज को स्वच्छ, स्वस्थ तथा जागरूक भविष्य की ओर अग्रसर किया।





