काशीपुर। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शामिल कोतवाली के सामने स्थित फड़ व्यवसायियों के सामने इन दिनों गहरा संकट खड़ा हो गया है। वर्षों से इसी स्थान पर छोटे-छोटे फड़ लगाकर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले व्यापारियों की आजीविका पर प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र में संचालित सभी 29 फड़ों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से स्थान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद से फड़ संचालकों में हड़कंप मच गया है और पूरे इलाके में असमंजस का माहौल बना हुआ है। कोतवाली के आसपास रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बेचने वाले इन छोटे दुकानदारों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इन्हीं फड़ों के सहारे उनके परिवारों का गुजारा चलता आ रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, फड़ संचालकों को इससे पहले भी कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर यह प्रक्रिया नई नहीं है और पूर्व में भी प्रशासन द्वारा मौखिक व लिखित रूप से चेतावनी दी जाती रही है। इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए फड़ संचालकों को 17 जनवरी तक जगह खाली करने का अल्टीमेटम दिया था। इस निर्देश के बाद फड़ व्यवसायियों में बेचौनी और चिंता और बढ़ गई। हालांकि, बाद में प्रशासन की ओर से मंगलवार तक के लिए अस्थायी राहत दी गई है, जिससे फिलहाल फड़ हटाने की कार्रवाई टल गई है। लेकिन यह राहत कितने समय तक जारी रहेगी और इसके बाद क्या कदम उठाए जाएंगे, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
नोटिस मिलने के बाद से फड़ संचालकों के बीच लगातार बैठकों और आपसी चर्चाओं का दौर चल रहा है। अपनी आजीविका पर मंडरा रहे इस संकट से निपटने के लिए वे अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कुछ व्यापारी प्रशासन से पुनर्विचार की अपील करने की बात कह रहे हैं, तो कुछ वैकल्पिक स्थान की मांग उठाने की तैयारी में हैं। हालांकि, इस पूरी कवायद के बावजूद फड़ व्यवसायियों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है। रोज कमाने और रोज खाने वाले इन छोटे व्यापारियों के लिए अचानक कारोबार बंद हो जाने का मतलब जीवन की बुनियादी जरूरतों पर सीधा असर पड़ना है। इसी कारण वे किसी भी निर्णय को लेकर बेहद सतर्क और आशंकित नजर आ रहे हैं।
इस पूरे मामले में फड़ संचालक मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखने से भी बचते दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि कहीं सार्वजनिक बयानबाजी से स्थिति और न बिगड़ जाए। कई फड़ व्यवसायियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे वर्षों से इसी स्थान पर व्यापार कर रहे हैं और प्रशासन को भी इसकी जानकारी है। उनका तर्क है कि यदि अतिक्रमण का मुद्दा है तो उन्हें पहले वैकल्पिक व्यवस्था दी जानी चाहिए, ताकि उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो। हालांकि, खुले तौर पर कोई भी फड़ संचालक कैमरे के सामने आने को तैयार नहीं दिखा, जिससे उनकी आशंका और भय का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का भी इस मुद्दे पर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि कोतवाली के सामने फड़ों की वजह से अक्सर यातायात बाधित होता है और अव्यवस्था बनी रहती है, इसलिए प्रशासन की कार्रवाई जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, बड़ी संख्या में नागरिक ऐसे भी हैं जो फड़ संचालकों के पक्ष में खड़े नजर आते हैं। उनका मानना है कि ये छोटे व्यापारी शहर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और इन पर अचानक की गई कार्रवाई से कई परिवारों की रोजी-रोटी छिन सकती है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कोई संतुलित समाधान निकालना चाहिए।
कुल मिलाकर प्रशासन की इस कार्रवाई ने फड़ व्यवसायियों को मानसिक दबाव में डाल दिया है। वर्षों से एक ही स्थान पर बैठकर छोटे व्यापार के जरिए अपने बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य जिम्मेदारियां निभा रहे ये लोग अब अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्हें डर है कि अगर फड़ हटाए गए तो नया ठिकाना ढूंढना आसान नहीं होगा और तब तक आय का कोई साधन नहीं बचेगा। कई फड़ संचालकों ने बताया कि उन्होंने इसी कारोबार के भरोसे कर्ज लिया हुआ है, जिसे चुकाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अंततः कोतवाली के सामने स्थित फड़ों को लेकर चल रहा यह विवाद अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह छोटे व्यापारियों के जीवन और आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। प्रशासन की ओर से दी गई अस्थायी राहत ने भले ही कुछ समय के लिए राहत की सांस दी हो, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बरकरार है। आने वाले दिनों में प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस पर न केवल फड़ व्यवसायियों बल्कि पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं। यदि कोई स्थायी समाधान नहीं निकला तो यह मामला सामाजिक और आर्थिक स्तर पर और गहराता नजर आ सकता है।





