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उत्तराखंड में खनिज निकासी सख्ती से नियंत्रित, केवल नियमों का पालन करने वाले वाहन ही होंगे

डी एल एम ललित आर्य ने स्पष्ट किया नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर होगी सख्त कार्रवाई, अवैध खनन रोकने और निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार खनिज निकासी सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन सतर्क।

रामनगर। उत्तराखंड में खनिज निकासी व्यवस्था को पारदर्शी, नियंत्रित और नियमबद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार अब और सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं प्रदेश की व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं कि खनिज संसाधनों के दोहन में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार के स्तर पर यह साफ कर दिया गया है कि खनिज निकासी से जुड़े नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सख्ती से पालन भी सुनिश्चित हो। इसी दिशा में प्रशासनिक अमले को जिम्मेदारी के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। अवैध खनन पर लगाम लगाने और राजस्व को नुकसान से बचाने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है, जिससे यह संदेश गया है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

उत्तराखंड राज्य में धरती से निकलने वाले खनिज प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। हर वर्ष राज्य सरकार खनिज निकासी के लिए निर्धारित पॉइंट्स तय करती है, ताकि संसाधनों का संतुलित और नियंत्रित उपयोग हो सके। इन पॉइंट्स के माध्यम से न केवल राजस्व प्राप्त किया जाता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। हालांकि, बीते कुछ वर्षों से अवैध खनन और चोरी की घटनाओं ने प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। यही कारण है कि सरकार अब खनिज निकासी से जुड़े हर पहलू पर कड़ी निगरानी रख रही है। नियमों को और अधिक स्पष्ट करते हुए यह तय किया गया है कि केवल वही वाहन खनिज निकासी कर पाएंगे, जो तय मानकों पर पूरी तरह खरे उतरेंगे।

रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी से खनिज निकासी को हाल ही में सुचारु रूप से शुरू किया गया है। नदी क्षेत्र में खनन कार्य प्रारंभ होने के बाद से स्थानीय स्तर पर गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन इसके साथ ही अवैध खनन की आशंका भी प्रशासन के सामने आई है। कोसी नदी लंबे समय से खनिज संपदा के लिए जानी जाती है और यहां से बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री की आपूर्ति होती है। ऐसे में सरकार और जिम्मेदार विभागों के लिए यह आवश्यक हो गया था कि अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए। इसके लिए केवल कार्यालयों में बैठकर निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अधिकारियों को खुद धरातल पर उतरकर स्थिति का जायजा लेना होगा। इसी सोच के तहत अब जिम्मेदार अधिकारी लगातार मौके पर पहुंचकर निगरानी कर रहे हैं।

उत्तराखंड वन विकास निगम में नव नियुक्त डी एल एम का चार्ज संभालने वाले ललित आर्य ने पदभार ग्रहण करते ही अपने इरादे साफ कर दिए हैं। अपने तेजतर्रार और सख्त फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले ललित आर्य ने खनिज निकासी को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का पालन करने वाले वाहनों को ही नदी में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि खनिज निकासी किसी भी हाल में अव्यवस्थित या गैरकानूनी तरीके से नहीं होने दी जाएगी। उनके अनुसार, हर वाहन की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके। इस बयान के बाद खनन से जुड़े लोगों में हलचल देखी जा रही है।

डी एल एम ललित आर्य ने बताया कि खनिज निकासी में लगे प्रत्येक वाहन के चारों ओर उसका पंजीकरण नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा वाहन में आर एफ डी चिप का होना भी जरूरी होगा, जिससे उसकी निगरानी आसानी से की जा सके। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है, ताकि अवैध खनन में संलिप्त वाहनों की पहचान तुरंत हो सके और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अवैध खनन में लिप्त पाए जाने पर संबंधित वाहन स्वामी और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

खनिज निकासी के समय को लेकर भी प्रशासन ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डी एल एम ललित आर्य ने स्पष्ट किया कि कोई भी वाहन सूर्यास्त के बाद या सूर्याेदय से पहले नदी के अंदर खनिज निकासी करते हुए पाया गया, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा का उल्लंघन करना सीधे तौर पर नियमों की अवहेलना है और इससे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। रात के अंधेरे में खनन गतिविधियां बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए समय सीमा का पालन बेहद जरूरी है। इस फैसले का उद्देश्य अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाना और संसाधनों का संरक्षण करना है।

प्रशासन का यह भी कहना है कि जितनी मात्रा में खनन निकासी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे तय समय के भीतर पूरा करना प्राथमिकता रहेगी। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। ललित आर्य ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना भी है। तय लक्ष्य के अनुरूप ही खनन कार्य किया जाएगा और इसके लिए हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि न तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचे और न ही सरकार को राजस्व का नुकसान हो।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद से खनिज निकासी को लेकर प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण कर रहे हैं और खनन क्षेत्रों में औचक जांच भी की जा रही है। इससे पहले जहां अवैध खनन की शिकायतें आम थीं, अब वहां कार्रवाई का डर साफ दिखाई देने लगा है। सरकार की इस सख्ती से ईमानदारी से काम करने वाले खनन कारोबारियों को भी राहत मिली है, क्योंकि अवैध गतिविधियों के कारण उन्हें अक्सर नुकसान उठाना पड़ता था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पारदर्शी व्यवस्था के चलते खनिज निकासी का काम सुचारु रूप से चलेगा। कुल मिलाकर उत्तराखंड में खनिज निकासी को लेकर सरकार और प्रशासन का रुख पहले से कहीं अधिक कड़ा नजर आ रहा है। नियमों का पालन, समय सीमा का निर्धारण और तकनीकी निगरानी जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि अवैध खनन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू हो चुकी है। डी एल एम ललित आर्य के सख्त तेवर और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सीधी निगरानी से यह साफ हो गया है कि अब केवल मानकों को पूरा करने वाले ही वाहन खनिज निकासी कर पाएंगे। आने वाले समय में इस सख्ती का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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