काशीपुर। किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले ने एक बार फिर प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डीजीपी दीपम सेठ के निर्देश पर इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष अन्वेषण दल (ैप्ज्) का गठन किया गया है। इस टीम में एसटीएफ के अधिकारी नीलेश आनंद भरणे के अलावा अजय गणपति, पुलिस अधीक्षक चंपावत; वंदना वर्मा, सीओ टनकपुर; निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट, जनपद चंपावत और उपनिरीक्षक मनीष खत्री, जनपद चंपावत शामिल हैं। टीम ने उधम सिंह नगर जिले के आईटीआई थाना में पहुँचकर केस डायरी, फाइलें और अन्य अभिलेखों का परीक्षण शुरू कर दिया है। एसआईटी की जांच में सभी साक्ष्यों को गहनता से परखा जा रहा है ताकि इस दुखद घटना के पीछे की वास्तविक वजहों का पता लगाया जा सके।
एसआईटी ने नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना से भी महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें किसान सुखवंत सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मोबाइल फोन और अन्य अभिलेखीय साक्ष्य शामिल हैं। साथ ही सुखवंत के मोबाइल और घटना में उपयोग किए गए थ्पतमंतउ को फोरेंसिक जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (थ्ैस्) भेजा जा रहा है। टेक्निकल टीम ने सुखवंत सिंह द्वारा भेजे गए ई-मेल का भी विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया है। इन ई-मेल में उन्होंने स्थानीय लोगों और पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन परिस्थितियों ने किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
सूत्रों के अनुसार, उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर के निवासी किसान सुखवंत सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र में घूमने आए थे। इस दौरान वह स्थानीय होटल में अपने परिवार के साथ रुके थे। रविवार, 11 जनवरी को जब उनकी पत्नी और बेटा किसी काम से बाहर गए, उसी समय सुखवंत सिंह ने होटल में आत्महत्या कर ली। घटना से पहले उन्होंने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने आत्महत्या की वजह स्पष्ट की थी। वीडियो में सुखवंत सिंह ने बताया कि जमीन खरीदने के नाम पर उनके साथ लगभग चार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की, तो उन्हें न्याय दिलाने की बजाय डराया-धमकाया गया।
इस घटना के बाद काशीपुर के आईटीआई थाना प्रभारी और एक एसआई को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही थाने के अधीन आने वाले पौगा चौकी प्रभारी समेत दस पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था। 15 जनवरी को प्रशासन ने सभी निलंबित और लाइन हाजिर पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर कुमाऊं से गढ़वाल रेंज में कर दिया। यह कदम प्रशासन की ओर से मामले की गंभीरता और पुलिस में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सुखवंत सिंह के परिवार ने भी न्याय की मांग तेज कर दी है। उनकी तहरीर पर पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। इसमें कई स्थानीय लोग और पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। प्रशासन की ओर से इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच पहले ही कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी जा चुकी है। एसआईटी की जांच से इस घटना की पूरी गहराई और इसमें शामिल सभी पक्षों की भूमिका स्पष्ट होगी। डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
एसआईटी की तकनीकी टीम ने सुखवंत सिंह के ई-मेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच भी शामिल है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन परिस्थितियों ने किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर किया और इसमें किन-किन लोगों का हाथ था। इस प्रक्रिया में सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है, ताकि किसी भी तरह का दबाव या दबाव निर्माण की संभावना पूरी तरह समाप्त हो सके।
कुल मिलाकर, किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में एसआईटी की सक्रिय जांच प्रशासन की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस घटना ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया है, बल्कि न्याय और कानून के प्रति समाज की उम्मीदों को भी चुनौती दी है। एसआईटी की जांच से इस मामले में शामिल सभी पक्षों के जिम्मेदारों की पहचान की जाएगी और न्याय दिलाने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।





