spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडकाशीपुर में सड़क सुरक्षा माह अभियान शुरू यातायात पुलिस ने नियमों के...

काशीपुर में सड़क सुरक्षा माह अभियान शुरू यातायात पुलिस ने नियमों के पालन का लिया संकल्प

काशीपुर। काशीपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस ने एक बार फिर जनहित में बड़ा कदम उठाया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन में 16 जनवरी से 14 फरवरी तक 36वां सड़क सुरक्षा माह जागरूकता अभियान पूरे शहर में संचालित किया जा रहा है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन को यातायात नियमों की जानकारी देना, सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम करना और सुरक्षित वाहन संचालन के प्रति लोगों को सजग बनाना है। यातायात पुलिस की ओर से शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा, नशे में वाहन न चलाने और मोबाइल फोन का प्रयोग न करने जैसे महत्वपूर्ण संदेश लोगों तक पहुँचाए जा रहे हैं, ताकि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।

शहर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह अभियान बेहद अहम माना जा रहा है। यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जागरूकता के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। इस दौरान वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों के बारे में पंपलेट वितरित किए जा रहे हैं और मौके पर ही नियमों की जानकारी दी जा रही है। पुलिसकर्मी राहगीरों और वाहन चालकों से संवाद कर उन्हें यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने और चारपहिया वाहन चालकों को सीट बेल्ट लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इस जनजागरूकता पहल की औपचारिक शुरुआत काशीपुर के मुख्य चौराहा से की गई, जहाँ बड़ी संख्या में यातायात पुलिस और सीपीयू की टीम मौजूद रही। अभियान के उद्घाटन के दौरान TSI अरुण कुमार और TSI रमेश कुमार ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। दोनों अधिकारियों ने वाहन चालकों को समझाया कि यातायात नियम केवल चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि जीवन की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। चौराहे पर रुकने वाले वाहनों को नियमों की जानकारी दी गई और लोगों से अपील की गई कि वे अपने परिवार और समाज की सुरक्षा के लिए नियमों का पालन करें।

अभियान के दौरान सीपीयू सब इंस्पेक्टर जसवंत सिंह, सुरेश रावत और हेम सुयाल भी सक्रिय रूप से मौजूद रहे। इन अधिकारियों ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखते हुए लोगों को दुर्घटनाओं से बचाव के उपायों की जानकारी दी। सीपीयू टीम ने विशेष रूप से उन स्थानों पर निगरानी रखी जहाँ अक्सर लोग नियमों की अनदेखी करते हैं। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने वाहन चालकों को गति सीमा, ज़ेब्रा क्रॉसिंग और संकेतकों के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। कई लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान लगातार चलने चाहिए ताकि लोग नियमों को गंभीरता से लें।

सीपीयू सब इंस्पेक्टर जसवंत सिंह ने सड़क सुरक्षा माह अभियान के दौरान कहा कि यातायात नियमों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में अधिकांश घटनाएं लापरवाही, तेज गति, नशे में वाहन चलाने और हेलमेट या सीट बेल्ट न पहनने के कारण होती हैं। यदि लोग थोड़ी सी सावधानी बरतें, तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। जसवंत सिंह ने कहा कि यह जागरूकता अभियान आमजन को डराने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने दोपहिया वाहन चालकों से अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने और चारपहिया वाहन चालकों से सीट बेल्ट लगाने की अपील की। साथ ही उन्होंने युवाओं से खास तौर पर ट्रैफिक नियमों को समझने और उनका पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता के सहयोग से ही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण कर सकती है और सुरक्षित यातायात व्यवस्था कायम कर सकती है।

टीएसआई अरुण कुमार ने सड़क सुरक्षा माह के अवसर पर आयोजित जागरूकता अभियान के दौरान कहा कि यातायात नियम किसी पर बोझ डालने के लिए नहीं बनाए गए हैं, बल्कि इनका उद्देश्य हर नागरिक की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के अधिकांश मामलों में मानवीय लापरवाही मुख्य कारण होती है, जिसे नियमों का पालन करके काफी हद तक रोका जा सकता है। अरुण कुमार ने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे साधारण सुरक्षा उपाय गंभीर हादसों में जीवन रक्षक साबित होते हैं, लेकिन लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे निर्धारित गति सीमा का पालन करें, नशे की हालत में वाहन न चलाएं और मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए ड्राइविंग करने से बचें। टीएसआई अरुण कुमार ने स्पष्ट किया कि यह अभियान लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ सुरक्षित यातायात संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है, जिसमें जनता का सहयोग बेहद आवश्यक है।

यातायात पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा माह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक जनआंदोलन के रूप में चलाया जा रहा है। इस दौरान स्कूलों, कॉलेजों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से लक्षित करते हुए उन्हें कम उम्र में ही यातायात नियमों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि युवा वर्ग नियमों को अपनाएगा तो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में स्वतः कमी आएगी। इसके लिए पोस्टर, बैनर और लाउडस्पीकर के माध्यम से भी संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। अलग-अलग स्थानों पर चल रहे इस अभियान में पुलिस टीम लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं को भी सुन रही है। कई वाहन चालकों ने यातायात व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतों को अधिकारियों के सामने रखा, जिनके समाधान का आश्वासन दिया गया। पुलिस का प्रयास है कि नियमों का पालन कराने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान चेतावनी के साथ-साथ नियमों की अनदेखी करने वालों पर चालानी कार्रवाई की जाएगी, ताकि सड़क पर अनुशासन कायम रह सके।

कुल मिलाकर काशीपुर में चल रहा 36वां सड़क सुरक्षा माह जागरूकता अभियान शहर के लिए एक सकारात्मक पहल साबित हो रहा है। यातायात पुलिस और सीपीयू की संयुक्त मेहनत से आमजन में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। TSI अरुण कुमार, TSI रमेश कुमार, सीपीयू सब इंस्पेक्टर जसवंत सिंह, सुरेश रावत और हेम सुयाल सहित पूरी पुलिस टीम लगातार मैदान में उतरकर लोगों को सुरक्षित यातायात के लिए प्रेरित कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस अभियान के माध्यम से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि लोग नियमों को अपनी आदत में शामिल करेंगे और सड़कें पहले से अधिक सुरक्षित बनेंगी।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!