काशीपुर। प्रदेश में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला दिन-ब-दिन गंभीर रूप लेता जा रहा है और अब यह केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं रह गया है। इस दुखद घटना ने राजनीति, प्रशासन और समाज के हर वर्ग को झकझोर दिया है। एक ओर जहां विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है, वहीं सत्ता पक्ष और प्रशासन अपने-अपने तर्कों के साथ सामने आ रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वह सवाल खड़ा है, जो हर किसी के मन में है कि आखिर किसान सुखवंत सिंह और उसके परिवार को न्याय कैसे मिलेगा और न्याय की वास्तविक परिभाषा क्या है। जिस तरह से यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है, उससे साफ जाहिर होता है कि यह केवल एक आत्महत्या का प्रकरण नहीं, बल्कि व्यवस्था पर उठता एक बड़ा सवाल बन चुका है। किसान संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संस्थाओं की सक्रियता ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हर मंच से यही आवाज उठ रही है कि मृतक किसान के परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
इसी कड़ी में किसान सुखवंत सिंह के आवास पर उस समय माहौल और भी गंभीर हो गया, जब किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हरेंद्र सिंह ‘लाड़ी’ अपने साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ वहां पहुंचे। उनके पहुंचते ही घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई और हर कोई यह जानने को उत्सुक दिखा कि आगे क्या होने वाला है। हरेंद्र सिंह लाड़ी ने सबसे पहले मृतक के परिजनों से मुलाकात की और उनके दुख को सुना। बातचीत के दौरान परिवार की पीड़ा साफ झलक रही थी और हर शब्द में गहरा दर्द महसूस किया जा सकता था। इस मुलाकात के दौरान न्याय को लेकर लंबी चर्चा हुई और यह सवाल बार-बार उठा कि आखिर किसान सुखवंत सिंह को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए किन हालातों ने मजबूर किया। नेताओं ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं और किसी भी हाल में न्याय दिलाने के लिए पीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया और कई लोग अपने आंसू नहीं रोक सके।

परिजनों की बातों को सुनते हुए हरेंद्र सिंह लाड़ी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि जिस व्यक्ति ने मरने से पहले यह कह दिया कि वह खुद को मरा हुआ मान चुका है, उस पर कितना असहनीय दबाव रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब कोई इंसान इस हद तक टूट जाता है कि उसे अपने परिवार, अपने बच्चों और अपनी पत्नी को भी मृत घोषित करने जैसा बयान देना पड़े, तो यह सीधे तौर पर इस बात का संकेत है कि उसे कहीं से भी न्याय की उम्मीद नहीं बची थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि मरते वक्त इंसान जो बोलता है, वही सबसे बड़ा सच होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हरेंद्र सिंह लाड़ी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह एक परिवार के अस्तित्व और सम्मान का सवाल है। उन्होंने कहा कि सबसे पहली मांग यही है कि किसान सुखवंत सिंह का पैसा, जो उसकी मेहनत और खून-पसीने की कमाई है, उसे तुरंत वापस किया जाए, क्योंकि यह किसी सरकार या प्रशासन का एहसान नहीं है।
बातचीत के दौरान दबाव के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। नेताओं और परिजनों ने सवाल किया कि आखिर अब तक मृतक के मोबाइल फोन क्यों नहीं लौटाए गए और उन्हें अपने पास क्यों रखा गया है। उनका कहना था कि अगर जांच के लिए कोई सबूत चाहिए तो वह ले लिए जाएं, लेकिन फोन अपने पास रखकर पूरे मामले को संदिग्ध बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे यह आशंका पैदा होती है कि कहीं न कहीं सबूतों को कमजोर करने या खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान यह भी कहा गया कि परिवार पर किसी भी तरह का मानसिक या प्रशासनिक दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। वक्ताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तराखंड पहले भी ऐसी घटनाएं देख चुका है, जहां दबाव और राजनीति के चलते न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले में भी जनता को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था।
हरेंद्र सिंह लाड़ी ने इस मौके पर सख्त लहजे में कहा कि अगर किसी भी धर्म या समुदाय का बच्चा इस तरह का कदम उठाता है, तो वह पूरे प्रदेश को हिला देता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकती। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग आज सत्ता या बड़े पदों पर बैठे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये पद हमेशा के लिए नहीं होते। ऊपर बैठा ईश्वर सब देख रहा है और एक दिन हर किसी को अपने कर्मों का जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को यह हिम्मत नहीं करनी चाहिए कि वह इस परिवार पर दबाव बनाए। उनका कहना था कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि न्याय की है और इसमें जो भी दोषी है, चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो, उसे सजा मिलनी चाहिए।

हरेंद्र सिंह लाड़ी ने कहा कि पता चला है कि मृतक की पत्नी के बयान दो बार बदले गए और दोनों बार बयान अलग-अलग थे, जिससे संदेह और गहरा हो गया है। उन्होने कहा कि परिजनों का कहना है कि यह सब दबाव का ही नतीजा है। मृतक के भाई पलविंदर सिंह का भी जिक्र करते हुए कहा गया कि पहले दिए गए बयानों और बाद में सामने आए बयानों में फर्क साफ नजर आता है। नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और किसके इशारे पर यह सब कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, एसएसपी और अन्य अधिकारियों का नाम लेकर बयान दिलवाना इस बात की ओर इशारा करता है कि परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होने साफ कहा कि वे किसी से भी टकराव नहीं चाहते, लेकिन न्याय के रास्ते में जो भी बाधा बनेगा, उसके खिलाफ आवाज जरूर उठाई जाएगी।
इस दौरान यह भी कहा गया कि मृतक किसान के परिवार को सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। हरेंद्र सिंह लाड़ी ने कहा कि जो पैसा किसान सुखवंत सिंह का है, वह उसे मिलना ही चाहिए, ताकि उसके बच्चों और पत्नी का भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक परिवार को उनका हक नहीं मिलता, तब तक आंदोलन और आवाज उठाने का सिलसिला जारी रहेगा। हरेंद्र सिंह लाड़ीें ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यक्ति की आत्मा की शांति का सवाल नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अगर आज इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कल कोई और किसान इसी तरह टूट सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में छोटे-छोटे गिरोह सक्रिय हैं, जो लोगों को ठगते हैं और उनकी मेहनत की कमाई लूटते हैं, ऐसे तत्वों को खत्म करना बेहद जरूरी है।

गुरुद्वारा और संगत की भूमिका पर भी इस दौरान विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि अगर प्रशासन और सरकार इस मामले में निष्पक्षता नहीं दिखाती, तो संगत आगे आकर परिवार की मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यह कोई दान नहीं, बल्कि किसान का अपना हक है, जिसे दिलाने के लिए समाज एकजुट है। यह भी ऐलान किया गया कि जरूरत पड़ने पर गुरुद्वारे में बैठक कर साधु-संतों और समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग ठगी और शोषण में शामिल हैं, उन्हें सामाजिक स्तर पर भी जवाबदेह बनाया जाएगा। हरेंद्र सिंह लाड़ी ने कहा कि अगर प्रशासन दोषियों को सजा नहीं देगा, तो समाज उन्हें जवाब देगा, क्योंकि गुरु की संगत अन्याय को बर्दाश्त नहीं कर सकती।
मौके पर मौजूद अनुपम शर्मा ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि इस पूरे मामले को राजनीति से जोड़ना सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि जब एक किसान वीडियो बनाकर अपनी पीड़ा बताने के बाद अपनी जान दे देता है, तो क्या उसकी आवाज उठाना राजनीति कहलाएगा। उन्होंने सवाल किया कि अगर ऐसे मामलों में चुप रहा जाए, तो फिर जनता किससे उम्मीद करेगी। अनुपम शर्मा ने कहा कि मृतक किसान ने जिन अधिकारियों के नाम लेकर आरोप लगाए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी परिवार पर बयान बदलवाने का दबाव बनाया जा रहा है, जो बेहद शर्मनाक है। उनका कहना था कि एक परिवार अपना बच्चा खो चुका है और ऐसे समय में उसे परेशान करना अमानवीय है।
अंत में यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला अब एक बड़े जन आंदोलन की शक्ल लेता जा रहा है। प्रदेश भर में इस घटना को लेकर गुस्सा और संवेदना दोनों देखने को मिल रही हैं। लोग यह मांग कर रहे हैं कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी किया जाए। हर मंच से यही कहा जा रहा है कि दोषियों को सजा मिले, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों। यह मामला अब केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की आवाज बन चुका है। जनता यह साफ कर चुकी है कि वह किसी भी तरह के दबाव, राजनीति या लीपापोती को स्वीकार नहीं करेगी और जब तक किसान सुखवंत सिंह के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आवाज बुलंद होती रहेगी।





