spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
HomeUncategorizedशराब ठेके पर बवाल और उग्र प्रदर्शन के बाद अब महापौर दीपक...

शराब ठेके पर बवाल और उग्र प्रदर्शन के बाद अब महापौर दीपक बाली के दरबार पहुंचा मामला

धार्मिक आस्था और छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ के खिलाफ उग्र हुई मातृशक्ति के बाद अब महापौर दीपक बाली ने आबकारी विभाग को किया तलब, क्या प्रशासन जनभावनाओं के आगे झुककर हटाएगा विवादित शराब का ठेका?

काशीपुर। काशीपुर के सुप्रसिद्ध और धार्मिक आस्था के केंद्र चैती चौराहे के समीप विदेशी मदिरा की दुकान खोले जाने का विवाद अब एक भीषण जन-आंदोलन का रूप धारण कर चुका है। बीते कुछ दिनों से इस क्षेत्र में जो माहौल बना हुआ है, उसे देखकर स्पष्ट है कि स्थानीय जनता अपनी धार्मिक और सामाजिक मर्यादाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में बिल्कुल नहीं है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रशासन ने जनभावनाओं को दरकिनार करते हुए इस पवित्र स्थल के पास शराब की दुकान को हरी झंडी दे दी, जिसके बाद स्थानीय महिलाओं और छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कल इस विरोध ने तब उग्र रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारी महिलाओं और आबकारी विभाग के अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और देखते ही देखते वहां तोड़फोड़ की स्थिति पैदा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन की हठधर्मिता और अधिकारियों के अमर्यादित व्यवहार ने आग में घी डालने का काम किया, जिसके परिणाम स्वरूप चैती चौराहे पर रणक्षेत्र जैसा नजारा देखने को मिला और अब यह मामला सीधे काशीपुर के प्रथम नागरिक यानी महापौर के दरबार तक जा पहुंचा है।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में काशीपुर के छात्रसंघ अध्यक्ष जतिन शर्मा खड़े नजर आ रहे हैं, जिन्होंने छात्रों और युवाओं की आवाज को मुखरता से बुलंद किया है। जतिन शर्मा ने मीडिया से रूबरू होते हुए अत्यंत गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जब मुख्यमंत्री महोदय आईजीएल (IGL) परिसर के कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे, तब उन्होंने स्वयं महापौर दीपक बाली की उपस्थिति में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस दुकान को रोकने की गुहार लगाई थी। उस समय उन्हें आश्वस्त किया गया था कि जनहित और धार्मिक आस्था को देखते हुए यह दुकान वहां नहीं खुलेगी, लेकिन विडंबना देखिए कि आश्वासन के ठीक अगले दिन से वहां निर्माण कार्य और व्यावसायिक तैयारियां दोगुनी रफ्तार से शुरू हो गईं। जतिन शर्मा का कहना है कि जब उनकी टीम, अभिभावक और महिला शक्ति शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचे, तो आबकारी विभाग के अधिकारियों ने उनके साथ सहयोग करने के बजाय अत्यंत अभद्र और अपमानजनक व्यवहार किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महिलाओं ने तोड़फोड़ की कार्रवाई केवल तभी की जब उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई और उन्हें उकसाया गया, इसलिए अब वे इस मांग पर अड़े हैं कि इस ठेके को तुरंत स्थानांतरित किया जाए।

नगर निगम काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने भी मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए इस पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि उनके पास पंडा परिवार, छात्रसंघ अध्यक्ष जतिन शर्मा और विभिन्न महिला समूहों की ओर से इस संदर्भ में पत्र प्राप्त हुए हैं और वे जनता की पीड़ा को भली-भांति समझ रहे हैं। महापौर ने स्पष्ट किया कि जब प्रदर्शनकारी उनके पास अपनी व्यथा लेकर पहुंचे, तो उन्होंने तुरंत आबकारी विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया और उन्हें दोपहर दो बजे अपने कार्यालय में तलब किया है। दीपक बाली का कहना है कि वे किसी भी विभाग को मनमानी करने की छूट नहीं देंगे और शासन-प्रशासन के बीच बैठकर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी ऐसा निर्णय न लिया जाए जिससे जनता की धार्मिक भावनाओं को जरा भी ठेस पहुंचे। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया है कि वे सभी पक्षों की बात सुनने के बाद एक ऐसा न्यायपूर्ण निर्णय लेंगे जिससे शहर की शांति व्यवस्था और आस्था दोनों सुरक्षित रहें, क्योंकि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए लोगों की संवेदनाओं की बलि नहीं दी जा सकती।

भारतीय जनता पार्टी की मंडल अध्यक्ष रजनी ठाकुर ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखते हुए सरकार का बचाव तो किया, लेकिन प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाने से भी पीछे नहीं हटीं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करना नहीं है, परंतु यदि कोई निर्णय धरातल पर गलत साबित हो रहा है, तो उसे स्वीकार कर सुधारना ही बुद्धिमानी है। रजनी ठाकुर ने एक जिम्मेदार सामाजिक कार्यकर्ता और मंडल अध्यक्ष के नाते यह स्टैंड लिया है कि बच्चों के भविष्य और महिलाओं की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि चैती चौराहा कोई साधारण स्थान नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र कई स्कूलों और धार्मिक संस्थानों से घिरा हुआ है, जहां छात्र-छात्राओं का निरंतर आवागमन रहता है। ऐसे में वहां शराब की दुकान खोलना भविष्य की पीढ़ी को अंधकार में धकेलने जैसा है। उन्होंने सीधे तौर पर आबकारी विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी नियमों और सामाजिक मर्यादाओं की पूरी तरह से अनदेखी कर रहे हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, भाजपा नेत्री निशा चौहान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार करते हुए पूरी घटना का विस्तार से ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के बावजूद आबकारी विभाग ने जिस तरह की “अडिंगता” दिखाई, वह हैरान करने वाली है। निशा चौहान के अनुसार, अधिकारियों ने स्थानीय लोगों की मांग को अनसुना कर दिया और रातों-रात बिजली के मीटर लगवाने से लेकर अन्य सारी व्यवस्थाएं पूरी कर लीं, जैसे वे जनता को चुनौती दे रहे हों। उन्होंने अत्यंत दुख के साथ साझा किया कि जब महिलाएं और युवा शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे, तब आबकारी विभाग के लोगों ने ऐसी अभद्र भाषा और अपशब्दों का प्रयोग किया जिसे सार्वजनिक मंच से दोहराना भी मुमकिन नहीं है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नारी जब तक शांत है, वह अपनी मर्यादा में रहती है, लेकिन जब उसकी सहनशीलता की सीमा पार हो जाती है और उसे छेड़ा जाता है, तो वह चंडी का रूप धारण कर लेती है। कल जो तोड़फोड़ हुई, वह दरअसल महिलाओं के उसी आक्रोश का विस्फोट था जो अधिकारियों की बदतमीजी के कारण उपजा था, और जब तक यह ठेका वहां से नहीं हटता, यह संघर्ष थमेगा नहीं।

वर्तमान में काशीपुर का यह पूरा इलाका एक वैचारिक और सामाजिक युद्ध का मैदान बना हुआ है, जहां एक तरफ सरकारी राजस्व की दलीलें हैं और दूसरी तरफ समाज की नैतिक और धार्मिक मान्यताएं। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि चैती मंदिर की मान्यता पूरे क्षेत्र में है और उस मार्ग पर शराब का ठेका होना श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है। इसके अलावा, स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए उस मार्ग से गुजरना असुरक्षित और असहज हो जाएगा। छात्रसंघ अध्यक्ष जतिन शर्मा और उनके साथी युवाओं का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस ठेके को वहां से हटाने का आदेश जारी नहीं किया, तो यह आंदोलन अभी और उग्र रूप लेगा। फिलहाल सबकी नजरें महापौर दीपक बाली और आबकारी विभाग की होने वाली बैठक पर टिकी हैं। क्या प्रशासन जनशक्ति के आगे झुकेगा या फिर अपनी हठधर्मिता पर कायम रहेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि काशीपुर की मातृशक्ति और युवा वर्ग अब पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और वे इस धार्मिक स्थल की पवित्रता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को संकल्पबद्ध दिखाई दे रहे हैं।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!