काशीपुर। श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के प्रांगण में बीते मंगलवार को भावनाओं का एक अनूठा ज्वार उमड़ पड़ा, जब बी.सी.ए. विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अपने वरिष्ठ साथियों को विदाई देने के लिए एक अविस्मरणीय और भव्य ‘फेयरवेल समारोह’ का आयोजन किया। 28 अप्रैल 2026 की यह दोपहर संस्थान के बहुउद्देशीय सभागार में केवल विदाई का औपचारिक अवसर मात्र नहीं थी, बल्कि यह बीते तीन वर्षों की मेहनत, दोस्ती और साझा किए गए सुनहरे पलों के जश्न का एक शिखर सम्मेलन बन गई। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने कार्यक्रम के प्रारंभ होने का संकेत दिया, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साहपूर्ण शोर से गूँज उठा, जो अंतिम वर्ष के छात्रों के प्रति कनिष्ठों के गहरे सम्मान और प्रेम को दर्शा रहा था। हर कोने में रंग-बिरंगी सजावट और उमंग का माहौल था, जिसने इस विदाई बेला को गमगीन होने के बजाय एक नई शुरुआत के उत्सव में तब्दील कर दिया।
शैक्षणिक अनुशासन और सांस्कृतिक परंपराओं के संगम के साथ इस शानदार महफिल का औपचारिक आगाज हुआ, जब संस्थान के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार, निदेशक प्रो. (डॉ.) योग राज सिंह एवं प्राचार्य डॉ. एस. एस. कुशवाहा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर और ज्ञान की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम को विधिवत गति प्रदान की। दीपशिखा की उस पावन ज्योति के साथ ही पूरे परिसर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया, जिससे उपस्थित छात्र-छात्राओं के चेहरों पर एक नई चमक दिखाई देने लगी। मंत्रोच्चार और वंदना के सुरों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, वहीं अतिथियों द्वारा दी गई इस गरिमामय उपस्थिति ने छात्रों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। विदाई की इस घड़ी में शिक्षकों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन पाकर अंतिम वर्ष के विद्यार्थी भावुक तो थे, लेकिन अपने भविष्य के प्रति एक नए आत्मविश्वास से लबरेज भी नजर आ रहे थे।
कार्यक्रम की सबसे आकर्षक और रोमांचक कड़ी रही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की झड़ी, जिसने दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखा और पूरे माहौल में चार चाँद लगा दिए। आकर्षक और अत्याधुनिक परिधानों में सजे-धजे बी.सी.ए. के छात्र-छात्राओं ने जब रैंप पर अपनी कैटवॉक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया, तो पूरा सभागार सीटियों और तालियों से गुंजायमान हो उठा। रैंप वॉक के दौरान हर प्रतिभागी अपनी एक अलग पहचान और व्यक्तित्व की छाप छोड़ रहा था, जो उनके भीतर छिपे पेशेवर गुणों को उजागर करने का एक बेहतरीन मंच साबित हुआ। इसके उपरांत आयोजित किए गए विभिन्न फन गेम्स और मनोरंजक गतिविधियों ने गंभीरता को हंसी-मजाक में बदल दिया, जहाँ सीनियर्स और जूनियर्स ने मिलकर उन क्षणों का भरपूर लुत्फ उठाया। नृत्य और संगीत के जादू ने इस शाम को और भी ज्यादा हसीन बना दिया, जिससे हर कोई कला के इस सागर में गोता लगाने को मजबूर हो गया।

समारोह के मुख्य अतिथि और संस्थान के ऊर्जावान अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों के इस अभिनव और सराहनीय प्रयास की खुले मन से प्रशंसा की और विदा हो रहे छात्र-छात्राओं को जीवन की नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने का मूल मंत्र दिया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि केवल डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं है, बल्कि अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण और ईमानदारी ही एक सफल करियर की असली पहचान है। अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे जहाँ भी जाएं, संस्थान की मर्यादा और अपनी नैतिकता को कभी न भूलें। उन्होंने जूनियर छात्रों द्वारा अपने वरिष्ठों के सम्मान में किए गए इस विशाल आयोजन की बारीकियों को सराहा और बताया कि ऐसे आयोजन छात्रों के बीच टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं, जो भविष्य में उनके काफी काम आने वाला है।
निदेशक प्रो. (डॉ.) योग राज सिंह ने अपने बौद्धिक और प्रेरणादायी वक्तव्य के माध्यम से भविष्य के आईटी विशेषज्ञों को वास्तविकता का आईना दिखाते हुए सफलता के गुप्त सूत्रों से अवगत कराया। उन्होंने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर पूरी दुनिया की रीढ़ बन चुका है और इस क्षेत्र में करियर की अपार एवं अनंत संभावनाएँ निरंतर विकसित हो रही हैं। उन्होंने छात्रों को समझाया कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और एक सकारात्मक दृष्टिकोण ही वह आधारशिला है जिस पर सफलता का महल खड़ा किया जा सकता है। प्रो. सिंह ने जोर देकर कहा कि तकनीक के दौर में खुद को निरंतर अपडेट रखना और नई चीजों को सीखने की ललक ही आपको भीड़ से अलग खड़ा करेगी। उनका यह संबोधन उन छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह रहा, जो अब प्रोफेशनल दुनिया में अपने कदम रखने जा रहे हैं।
संस्थान के प्राचार्य डॉ. एस. एस. कुशवाहा ने भी इस भावुक अवसर पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए आगामी विश्वविद्यालयी परीक्षाओं की महत्ता पर प्रकाश डाला और उन्हें श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों को धैर्य बनाए रखने, अटूट लगन के साथ मेहनत करने और खुद पर पूर्ण आत्मविश्वास रखने की सलाह दी ताकि वे न केवल परीक्षाओं में बल्कि जीवन के हर मोर्चे पर विजेता बनकर उभर सकें। डॉ. कुशवाहा ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि बी.सी.ए. विभाग के छात्रों ने न केवल पढ़ाई में बल्कि खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी संस्थान का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी शुभकामनाओं में कहा कि शिक्षा का असली उद्देश्य इंसान को आत्मनिर्भर बनाना है और श्रीराम संस्थान के ये होनहार विद्यार्थी निश्चित रूप से समाज के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे, जो शिक्षकों के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होगा।

प्रतियोगिताओं के रोमांचक दौर के समापन के बाद वह क्षण भी आया जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था, यानी मिस्टर और मिस फेयरवेल के खिताबों की घोषणा। निर्णायक मंडल, जिसमें सह-प्राध्यापक शशांक गौड़ एवं सुरभि बंसल शामिल थे, के लिए विजेता चुनना एक अत्यंत कठिन कार्य था क्योंकि हर प्रतिभागी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया था। गहन विचार-विमर्श और छात्रों के व्यक्तित्व, बुद्धिमत्ता व प्रतिभा को परखने के बाद अंततः उदयराज सिंह को ‘मिस्टर फेयरवेल’ और हर्षिता दुर्गापाल को ‘मिस फेयरवेल’ के प्रतिष्ठित खिताब से नवाजा गया। जैसे ही इन नामों की घोषणा हुई, पूरा सभागार खुशी से झूम उठा और विजेताओं को उपहार व ताज पहनाकर सम्मानित किया गया। निर्णायक मंडल की भूमिका निभाने वाले शशांक गौड़ एवं सुरभि बंसल ने छात्रों की प्रतिभा की जमकर तारीफ की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें सम्मानित किया।
इस महा-समारोह की अपार सफलता के पीछे संस्थान के हर एक सदस्य की कड़ी मेहनत, योजना और अटूट समर्पण साफ दिखाई दे रहा था, जिसमें समस्त प्रवक्ताओं एवं छात्र-छात्राओं ने अपना विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में विभाागाध्यक्ष (कंप्यूटर विज्ञान विभाग) बलविन्दर सिंह ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया, जिनके मार्गदर्शन में यह पूरा आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार, निदेशक प्रो. (डॉ.) योग राज सिंह और प्राचार्य डॉ. एस. एस. कुशवाहा के साथ-साथ समस्त प्रवक्ता गण एवं सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे, जिन्होंने इस विदाई समारोह को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, तो सभी की आँखों में भविष्य के सपने और यादों का एक खूबसूरत खजाना था, जिसे वे हमेशा अपने दिल में संजोकर रखेंगे।





