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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने सोनिया गांधी के ऐतिहासिक महिला आरक्षण पत्र पर खोला बड़ा राज

डॉक्टर मनमोहन सिंह सरकार की अधूरी जंग और सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लिखे उस गोपनीय पत्र का खुलासा जिसने महिला आरक्षण के लिए सत्ता को पूर्ण समर्थन देकर राजनीति में मचा दिया था हड़कंप।

काशीपुर। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने ‘‘दैनिक सहर प्रजातंत्र’ के साथ एक विशेष और बेहद गंभीर बातचीत के दौरान भारतीय राजनीति के उस ऐतिहासिक पन्ने को खोला जो वर्षों से धूल फांक रहा था। अलका पाल ने बेहद बेबाकी से तर्क दिया कि नारी शक्ति के सम्मान की बातें करने वाले राजनीतिक दलों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस ने हमेशा से महिला हितों को सर्वाेपरि रखा है। उन्होंने याद दिलाया कि साल दो हज़ार सत्रह में जब देश की राजनीति एक नए मोड़ पर थी, तब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पत्र लिखा था। इस पत्र का जिक्र करते हुए अलका पाल ने कहा कि यह केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं की उन आकांक्षाओं का प्रतिबिंब था जो दशकों से संसद की चौखट पर न्याय का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सोनिया गांधी ने बड़े दिल का परिचय देते हुए सत्ता पक्ष को बिना किसी शर्त के समर्थन देने का वादा किया था ताकि आधी आबादी को उनका संवैधानिक हक मिल सके।

विस्तृत चर्चा के दौरान अलका पाल ने समय के चक्र को पीछे घुमाते हुए नौ मार्च दो हज़ार दस की उस ऐतिहासिक तारीख का उल्लेख किया, जब देश में डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए(2) की सरकार सत्तासीन थी। उस दौर में कांग्रेस की प्रबल इच्छाशक्ति के कारण ही राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल को भारी हंगामे के बीच पारित करवा लिया गया था। अलका पाल के अनुसार, वह क्षण भारतीय लोकतंत्र के लिए एक स्वर्णिम अवसर था, जहाँ डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अपनी सौम्य लेकिन दृढ़ राजनीति के जरिए इस जटिल कानून को उच्च सदन की मंजूरी दिलाई थी। हालांकि, राजनीति की बिसात कुछ ऐसी बिछी कि राज्यसभा से हरी झंडी मिलने के बाद भी यह बिल लोकसभा की दहलीज पार नहीं कर सका। अलका पाल ने स्पष्ट किया कि उस समय कांग्रेस के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत का अभाव था और गठबंधन की मजबूरियों के कारण यह क्रांतिकारी कदम कानून का रूप लेने से चूक गया। उन्होंने वर्तमान सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस ने तो अपनी नीयत साफ कर दी थी, लेकिन तत्कालीन राजनीतिक समीकरणों ने महिलाओं के इस अधिकार को अधर में लटका दिया, जिससे यह बिल लोकसभा में जाकर अटक गया और ठंडे बस्ते में चला गया।

अपनी बात को और अधिक धार देते हुए अलका पाल ने ‘हिन्दी दैनिक सहर प्रजातंत्र’ को बताया कि दो हज़ार सत्रह में सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र की मुख्य मंशा यही थी कि जो अधूरा काम कांग्रेस के समय बहुमत की कमी के कारण रुक गया था, उसे अब पूरा किया जाए। सोनिया गांधी ने पत्र में बड़ी स्पष्टता के साथ लिखा था कि चूंकि अब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, इसलिए उनके पास इस ऐतिहासिक सुधार को लागू करने का स्वर्णिम अवसर है। अलका पाल ने कहा कि सोनिया गांधी ने पत्र में यह भी दोहराया था कि कांग्रेस इस बिल को पारित कराने के लिए सरकार को हर संभव सहयोग देने को तैयार है। उनका कहना था कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और चूंकि राज्यसभा में बिल पहले से ही पारित हो चुका था, इसलिए लोकसभा में इसे पारित कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए थी। अलका पाल ने जोर देकर कहा कि सोनिया गांधी की वह चिट्ठी दरअसल महिलाओं के प्रति कांग्रेस की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण थी, जिसमें उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और नारी शक्ति के उत्थान को प्राथमिकता दी थी।

काशीपुर कांग्रेस की कमान संभाल रहीं अलका पाल ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए मौजूदा सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने कहा कि जब सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने बहुमत का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था, तो उसके पीछे मंशा साफ थी कि महिलाओं को जल्द से जल्द संसद और विधानसभाओं में तैंतीस प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। अलका पाल के अनुसार, सोनिया गांधी ने उस समय साफ तौर पर आगाह किया था कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह एक निर्णायक कदम होगा और इसके बिना देश के सर्वांगीण विकास की कल्पना करना बेमानी है। अलका पाल ने बताया कि अध्यक्ष रहते हुए सोनिया गांधी ने जिस उदारता का परिचय दिया और विपक्ष में होने के बावजूद सरकार का साथ देने की पेशकश की, वह भारतीय संसदीय इतिहास में विरला ही देखने को मिलता है। अलका पाल ने भावुक होते हुए कहा कि आज जब महिला सुरक्षा और अधिकारों की बातें होती हैं, तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार ने ही इस सपने को हकीकत में बदलने की पहली ठोस बुनियाद रखी थी और उसे अंतिम मुकाम तक पहुंचाने की अपील भी कांग्रेस की ओर से ही की गई थी।

‘हिन्दी दैनिक सहर प्रजातंत्र’ के साथ इस विशेष संवाद के अंत पर अलका पाल ने बेहद आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि आज की राजनीति में श्रेय लेने की होड़ मची है, लेकिन इतिहास गवाह है कि महिला आरक्षण के लिए असली संघर्ष कांग्रेस ने किया है। उन्होंने दोहराया कि लोकसभा में बिल के अटकने का मुख्य कारण केवल और केवल बहुमत का आंकड़ा कम होना था, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बड़ी जिम्मेदारी का परिचय दिया था। अलका पाल का मानना है कि अगर उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनिया गांधी के सुझावों और सहयोग की पेशकश पर गंभीरता से अमल किया होता, तो देश की महिलाओं को अपना हक पाने के लिए और कई वर्षों का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। उन्होंने अंत में कहा कि कांग्रेस हमेशा महिलाओं की आवाज बनती रहेगी और सोनिया गांधी द्वारा दिखाई गई वह राह आज भी पार्टी के लिए मार्गदर्शक है। काशीपुर की जनता के बीच इस मुद्दे को ले जाने का संकल्प दोहराते हुए अलका पाल ने स्पष्ट कर दिया कि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई को वह और उनकी पार्टी अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेगी, क्योंकि यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है।

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