रामनगर। नगर की रामनगर की शनीवार कि सुबह रोज जैसी बिल्कुल नहीं थी, क्योंकि फिजाओं में एक अजीब सी बेचैनी और उम्मीदों की महक घुली हुई थी। एम0 पी0 हिंदू इंटर कॉलेज की पुरानी दीवारें भी आज जैसे किसी बड़े चमत्कार की प्रतीक्षा कर रही थीं, क्योंकि उत्तराखंड बोर्ड 2026 के परीक्षा परिणाम की घड़ी बिल्कुल करीब आ चुकी थी। जैसे ही कंप्यूटर की स्क्रीन पर अंकों का सैलाब उमड़ा, कॉलेज के गलियारों में सन्नाटा टूट गया और उसकी जगह जीत की गूंज ने ले ली। यह केवल अंकों का खेल नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों सपनों की उड़ान थी, जिन्हें इस संस्थान के शिक्षकों ने अपने पसीने से सींचा था। इस पूरी गौरवशाली गाथा और छात्रों की मेहनत के आंकड़ों को संजोकर दुनिया के सामने लाने की जिम्मेदारी विद्यालय के मीडिया प्रभारी हेम चन्द्र पाण्डे निभा रहे थे, जिनकी सूचनाओं ने इस जीत को एक उत्सव में बदल दिया।
विद्यालय के मीडिया प्रभारी हेम चन्द्र पाण्डे ने जब परिणामों की विस्तृत सूची हाथ में ली, तो उनकी आँखों में गर्व की चमक साफ देखी जा सकती थी। उन्होंने पूरी तत्परता के साथ जानकारी साझा की कि इस साल कॉलेज ने न केवल सफलता पाई है, बल्कि कामयाबी के नए मानक स्थापित कर दिए हैं। हेम चन्द्र पाण्डे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हाईस्कूल की परीक्षा में मेधावी छात्र अक्षत गोपाल ने अपनी प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया कि हर कोई दंग रह गया। अक्षत ने 98.20% अंक अर्जित कर मेरिट सूची में न केवल कॉलेज, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाते हुए प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। उसकी इस जादुई उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती और हेम चन्द्र पाण्डे जी की रिपोर्टिंग ने इस मेधावी छात्र के संघर्ष को नई पहचान दी।
सफलता की इस कहानी में हेम चन्द्र पाण्डे ने उन बेटियों का भी विशेष जिक्र किया जिन्होंने इस सफलता की कहानी में चार चाँद लगा दिए। निहारिका सती नाम की उस होनहार छात्रा ने, जिसकी आंखों में हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना रहता था, 94.40% अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट सूची में 16वाँ स्थान झटक लिया। निहारिका की इस उपलब्धि ने विद्यालय की छात्राओं के बीच एक नई प्रेरणा का संचार कर दिया। वहीं दूसरी ओर, इसी गौरवशाली पथ पर चलते हुए नमिता पडलिया ने भी अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया और 93% अंकों के साथ मेरिट लिस्ट में 23वाँ स्थान हासिल कर यह दिखा दिया कि लड़कियां अब हर क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। मीडिया प्रभारी द्वारा जारी इन आंकड़ों ने समाज को यह कड़ा संदेश दिया कि प्रतिभा किसी लिंग या सीमा की मोहताज नहीं होती।
जब प्रधानाचार्य संजीव शर्मा विद्यालय के मुख्य कक्ष में मीडिया और अभिभावकों के रूबरू हुए, तो उनके चेहरे का संतोष और गर्व देखने लायक था। उन्होंने इस कहानी के आंकड़ों को विस्तार देते हुए बताया कि इंटरमीडिएट के मोर्चे पर कुल 427 जांबाज मैदान में थे, जिनमें से 373 विद्यार्थियों ने विजयश्री हासिल की। इस विशाल समूह में से 45 विद्यार्थियों ने तो ‘सम्मान’ के उस सर्वोच्च पायदान को छुआ, जिसे पाना हर छात्र का सपना होता है। इसके अलावा 217 छात्रों ने प्रथम श्रेणी में आकर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता सिद्ध की, जबकि 111 विद्यार्थियों ने द्वितीय श्रेणी में जगह बनाकर इस सफलता के ग्राफ को पूर्णता प्रदान की। प्रधानाचार्य के शब्दों में एक पिता जैसा गर्व महसूस हो रहा था, क्योंकि उनके नेतृत्व में इंटरमीडिएट का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 87.35% तक पहुँच गया था।
हाईस्कूल के परिणामों की परतें खोलते हुए संजीव कुमार शर्मा ने एक और सुखद रहस्य साझा किया कि छोटे बच्चों ने तो बड़े भाई-बहनों को भी पीछे छोड़ दिया है। हाईस्कूल में 412 विद्यार्थियों के दल में से 376 ने अपनी मंजिल पा ली, जिससे विद्यालय का उत्तीर्ण प्रतिशत 91.26% के अविश्वसनीय आंकड़े को छू गया। इस दल में 44 ऐसे नन्हे सितारे थे जिन्होंने ससम्मान सफलता पाई, जबकि 100 ने प्रथम श्रेणी, 196 ने द्वितीय श्रेणी और 36 ने तृतीय श्रेणी प्राप्त कर इस कहानी के हर पन्ने को खुशियों से भर दिया। परीक्षा प्रभारी चेतन स्वरूप की सटीक रणनीति और अन्य अध्यापकों के अथक परिश्रम ने मिलकर एक ऐसा तंत्र तैयार किया था, जहाँ हर कमजोर कड़ी को मजबूती में बदला गया और आज उसका परिणाम एक सामूहिक उत्सव के रूप में सबके सामने था।
कहानी का समापन तब हुआ जब विद्यालय के मार्गदर्शक और प्रबंधक विनय जिंदल ने सभी सफल विद्यार्थियों को अपने आशीर्वाद से सराबोर किया। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक पड़ाव है, मंजिल अभी और भी ऊँची है। प्रधानाचार्य संजीव कुमार शर्मा, परीक्षा प्रभारी चेतन स्वरूप और विद्यालय के समर्पित शिक्षकों की टीम ने जब एक स्वर में बच्चों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं, तो कॉलेज का वातावरण भावुक हो उठा। मीडिया प्रभारी हेम चन्द्र पाण्डे द्वारा प्रसारित यह सफलता की दास्तां आज हर जुबान पर है, जो बताती है कि जब अनुशासन, मार्गदर्शन और अटूट विश्वास का मेल होता है, तो 2026 जैसे ऐतिहासिक परिणाम जन्म लेते हैं। आज रामनगर का हर कोना इन बच्चों की जय-जयकार कर रहा है, जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से अपने भाग्य की लकीरों को स्वर्ण अक्षरों में बदल दिया है।





