काशीपुर। उज्ज्वल भारत के शिल्पी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में इस बार काशीपुर की धरती एक ऐसे अविस्मरणीय और भव्य आयोजन की साक्षी बनने जा रही है, जो न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं को तोड़ेगा बल्कि आधुनिक समाज के सामने एकता की नई मिसाल पेश करेगा। एक रेस्टोरेंट में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान डॉ भीमराव अंबेडकर जन्मोत्सव समाज समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हुंकार भरते हुए घोषणा की कि आगामी 14 अप्रैल को निकलने वाली ‘अंबेडकर संदेश शोभायात्रा’ की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह महज एक जुलूस नहीं बल्कि बाबा साहब के उन विचारों का जीवंत प्रदर्शन होगा, जिन्होंने सदियों से हाशिए पर खड़े शोषित और वंचित समाज को स्वाभिमान से जीने का अधिकार दिया। समिति के जुझारू कार्यकर्ता पिछले लगभग डेढ़ महीनों से दिन-रात एक करके इस शोभायात्रा को दिव्यता और भव्यता प्रदान करने के लिए पसीना बहा रहे हैं, ताकि काशीपुर के इतिहास में यह दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सके।
अंबेडकर संदेश शोभायात्रा की नींव रखने वाले संस्थापक जितेंद्र देवांतक ने पत्रकारों से संवाद करते हुए अत्यंत भावुक और उत्साहजनक स्वर में कहा कि इस वार्षिक महोत्सव का मूल दर्शन बाबा साहब के क्रांतिकारी सिद्धांतों को केवल शोषित वर्गों तक सीमित न रखकर समाज के अंतिम व्यक्ति और सर्व समाज के प्रत्येक नागरिक तक प्रसारित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले वर्षों में जिस प्रकार काशीपुर के प्रत्येक नगरवासी ने जाति-पाति के बंधनों को तोड़कर इस शोभायात्रा का पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया, उसने वंचित समाज के भीतर एक अभूतपूर्व आत्मविश्वास और उत्साह का संचार किया है। यही कारण है कि इस वर्ष न केवल शहरी क्षेत्र बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे पूरे हर्षाेल्लास और पारंपरिक वेशभूषा के साथ इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए काशीपुर पहुंच रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि अंबेडकरवादी विचारधारा अब जन-जन की आवाज बन चुकी है।
आयोजन की सूक्ष्म रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अंबेडकर संदेश शोभायात्रा के अध्यक्ष सुक्लेश कुमार आज़ाद ने बताया कि इस बार की शोभायात्रा को नयनाभिराम बनाने के लिए आसपास के समस्त जनपदों से विशिष्ट और सुसज्जित रथों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इन रथों पर सवार होकर शोषित-वंचित समाज के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले भारत के महान महापुरुषों की सजीव झांकियां निकाली जाएंगी, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होने के साथ-साथ नई पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास से परिचित कराएंगी। उन्होंने विशेष जानकारी दी कि इस बार दिल्ली से एक विशेष दल बुलाया गया है जो पारंपरिक प्रतीकात्मक वेशभूषा में ढोल-ताशों की थाप पर शौर्य का प्रदर्शन करेगा, जबकि दर्जनों डीजे वाहनों पर बजते बाबा साहब के गीतों पर थिरकते हजारों युवा, महिलाएं और पुरुष इस पावन अवसर पर अपनी अटूट श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करेंगे, जिससे पूरा वातावरण जय भीम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठेगा।
संविधान की मर्यादा और बाबा साहब के महान योगदान को रेखांकित करते हुए समिति के महासचिव महिलाल गौतम ने समाज के हर तबके से इस महाकुंभ में सम्मिलित होने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने अत्यंत तार्किक ढंग से समझाया कि भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता ने न केवल एक वर्ग विशेष के लिए बल्कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। महिलाल गौतम ने आह्वान किया कि आज की आधी आबादी यानी महिलाओं को जो सम्मान, शिक्षा और सुरक्षा के अधिकार प्राप्त हैं, वे बाबा साहब की ही दूरदर्शिता का परिणाम हैं, इसलिए यह हर वर्ग की महिला, पुरुष और बच्चे का नैतिक कर्तव्य है कि वे 14 अप्रैल को सड़कों पर उतरकर इस गरिमामयी कार्यक्रम में सहभागिता करें और अपने मसीहा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर देश की लोकतांत्रिक जड़ों को और अधिक मजबूती प्रदान करें।
प्रेस वार्ता के दौरान आयोजन की गरिमा को बढ़ाने के लिए समिति के समस्त प्रमुख स्तंभ उपस्थित रहे, जिनमें संस्थापक जितेंद्र देवांतक, अध्यक्ष सुक्लेश कुमार आज़ाद और महासचिव महिलाल गौतम के साथ-साथ उपाध्यक्ष हर गुलाल गौतम की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम की गंभीरता को दर्शाया। इसके अतिरिक्त वित्तीय प्रबंधन देख रहे कोषाध्यक्ष शंकर सिंह, सांगठनिक मजबूती प्रदान करने वाले सदस्य जयपाल सिंह और कानूनी बारीकियों एवं व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने वाले कानूनी सलाहकार एडवोकेट अजीत सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी दिग्गजों ने एक सुर में काशीपुर की जनता को विश्वास दिलाया कि सुरक्षा से लेकर स्वागत सत्कार तक के सभी पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं, ताकि आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है, जिससे यह संदेश यात्रा शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न होकर सामाजिक समरसता का एक वैश्विक संदेश प्रसारित कर सके।
इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल एक राजनीतिक या सामाजिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक चेतना का विस्तार है जिसमें लोक कलाओं और आधुनिक संगीत का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। काशीपुर की सड़कों पर जब दिल्ली के ढोल-ताशे गूंजेंगे और विभिन्न राज्यों की कला संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करती झांकियां गुजरेंगी, तो वह दृश्य निश्चित रूप से मंत्रमुग्ध कर देने वाला होगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि शोभायात्रा के मार्ग को आकर्षक द्वारों और झंडों से पाट दिया गया है और कई स्थानों पर स्थानीय व्यापारियों एवं सामाजिक संगठनों द्वारा पेयजल और जलपान की व्यवस्था भी की गई है। यह जन-सहयोग इस बात की पुष्टि करता है कि बाबा साहब का श्शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करोश् का नारा आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है और काशीपुर की जनता इसे आत्मसात करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अंततः यह प्रेस वार्ता इस संकल्प के साथ समाप्त हुई कि 14 अप्रैल का सूर्याेदय काशीपुर में एक नई सामाजिक क्रांति और वैचारिक जागरण का संदेश लेकर आएगा। आयोजकों ने मीडिया के माध्यम से जिले के कोने-कोने में रहने वाले लोगों को आमंत्रित किया है कि वे इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए सपरिवार पधारें। जिस समर्पण भाव से डेढ़ महीने से तैयारियां की जा रही हैं, उसे देखते हुए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि 2026 की यह अंबेडकर संदेश शोभायात्रा अपने पिछले सभी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर देगी। इस महाआयोजन की सफलता के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्ग, छात्रों और श्रमिकों ने भी अपना समर्थन दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि आगामी मंगलवार को काशीपुर की धरती नीले सागर की तरह प्रतीत होगी, जहाँ हर व्यक्ति केवल एक भारतीय के रू





