रामनगर। उत्तराखंड के रामनगर स्थित लखनपुर में आज उस समय सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब राज्य आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार की विनिवेश नीतियों के खिलाफ खुलेआम बिगुल फूंक दिया। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत काम करने वाली और देश सहित प्रदेश की एकमात्र सार्वजनिक क्षेत्र की आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा निर्माता कंपनी, इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) मोहान को निजी हाथों में सौंपे जाने के फैसले ने पूरे क्षेत्र में जन-आक्रोश की एक नई चिंगारी सुलगती हुई दिखाई दे रही है। आंदोलनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि जो सरकारी संस्थान लगातार मुनाफे में चल रहा था, उसे कौड़ियों के भाव किसी निजी घराने को बेचना न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि उत्तराखंड के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात भी है। लखनपुर स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित इस विशाल जनसभा में मौजूद प्रदर्शनकारियों की आंखों में व्यवस्था के प्रति तीखा गुस्सा साफ देखा जा सकता था, जो अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने और उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को एक मजबूत मंच पर एकजुट करने के इरादे से राज्यव्यापी दौरे पर निकले राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं दर्जा प्राप्त पूर्व राज्य मंत्री, धीरेंद्र प्रताप का रामनगर आगमन पर लखनपुर क्रांति चौक पर भव्य और जोरदार स्वागत सत्कार किया गया। इसके तुरंत बाद आयोजित हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता राज्य सेनानी मंच रामनगर के कुशल संयोजक चंद्रशेखर जोशी द्वारा की गई, जबकि पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी ने अपनी ओजस्वी शैली में संपन्न किया। बैठक में वक्ताओं ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि देश की इस इकलौती आयुर्वेदिक धरोहर आईएमपीसीएल मोहान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा निजी उद्योगपतियों के हवाले करने का फैसला पूरी तरह से जनविरोधी है, क्योंकि यह फैक्ट्री किसी घाटे में नहीं बल्कि लगातार बेहतर वित्तीय मुनाफा कमाकर देश की सेवा कर रही थी।
विनिवेश के इस अप्रत्याशित सरकारी फैसले के दूरगामी और बेहद खतरनाक परिणामों को रेखांकित करते हुए आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि इस अंधाधुंध निजीकरण के कारण वहां पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सैकड़ों स्थाई एवं अस्थाई कर्मचारियों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। इतना ही नहीं, आईएमपीसीएल मोहान को कच्चा माल और जड़ी-बूटियां सप्लाई करने वाले हजारों स्थानीय किसानों के सामने भी अब रोजी-रोटी और आजीविका का एक बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पूर्व दर्जा मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने इस मंच से क्षेत्र के तमाम बड़े जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र के सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट, पौड़ी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनिल बलूनी, सल्ट विधानसभा क्षेत्र के विधायक महेश जीना, नैनीताल की महिला विधायक सरिता आर्या और रामनगर क्षेत्र के स्थानीय विधायक दीवान सिंह विष्ट से सीधे शब्दों में अपना मौन व्रत तोड़ने की पुरजोर अपील की है।

आंदोलनकारियों ने इन सभी सांसदों और विधायकों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि जनता ने उन्हें चुनकर बड़े पदों पर इसलिए बिठाया है ताकि वे उत्तराखंड की संपत्तियों की रक्षा कर सकें, न कि चुपचाप तमाशा देखने के लिए। धीरेंद्र प्रताप ने दहाड़ते हुए कहा कि अगर ये तमाम माननीय सांसद और विधायक इस महत्वपूर्ण कारखाने को बर्बादी से बचाने के लिए तुरंत आगे नहीं आते हैं, तो क्षेत्र की जागरूक जनता इन्हें चैन से नहीं बैठने देगी और जल्द ही इन्हें अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह मजबूर कर देगी। इस गर्मागरम बैठक में न केवल आईएमपीसीएल मोहान के निजीकरण का मुद्दा छाया रहा, बल्कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पूर्व में की गई बड़ी घोषणाओं के क्रियान्वयन न होने पर भी राज्य आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ तीखा असंतोष व्यक्त किया।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी की स्पष्ट और सार्वजनिक घोषणा के बावजूद, राज्य के वीर आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को मिलने वाले 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का वास्तविक लाभ धरातल पर अभी तक किसी को नहीं मिल पा रहा है, जिससे युवाओं में भारी निराशा है। इसके साथ ही, वर्ष 2021 तक जमा किए गए आंदोलनकारी चिह्नीकरण के तमाम आवेदनों को विभिन्न जनपदों के जिलाधिकारियों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनका समय पर निस्तारण बिल्कुल नहीं किया जा रहा है। इन तमाम सुलगते हुए मुद्दों को लेकर सर्वसम्मति से यह बड़ा निर्णय लिया गया कि कल यानी 29 मई को देश के प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को एक बेहद कड़ा और विस्तृत मांग पत्र यानी ज्ञापन भेजा जाएगा। इस ऐतिहासिक आक्रोश बैठक में प्रमुख रूप से धीरेंद्र प्रताप, प्रभात ध्यानी, चंद्रशेखर जोशी, इंद्र सिंह मनराल, अनिल अग्रवाल खुलासा, हाफिज सईद अहमद और नवीन नैथानी सहित दर्जनों जुझारू कार्यकर्ता और जनमानस मौजूद रहे।





