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व्यापारी समुदाय का हाइट बैरियर विरोध महापौर दीपक बाली ने तुरंत समाधान का भरोसा दिया

स्टेशन रोड पर हाईट बैरियर लगाने के विरोध में जुटे व्यापारी, महापौर दीपक बाली ने जल्द सभी विभागों की बैठक कर समस्या का स्थायी समाधान करने और व्यापारिक हित सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।

काशीपुर। शहर की यातायात व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े एक अहम मुद्दे को लेकर मंगलवार को स्टेशन रोड क्षेत्र में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब आरओबी पर लगाए जा रहे हाइट बैरियर के विरोध में स्थानीय व्यापारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। स्टेशन रोड पर स्थित दुकानदारों ने एकजुट होकर इस कार्य को तत्काल रोकने की मांग उठाई और अपनी व्यथा सीधे नगर निगम के महापौर दीपक बाली के समक्ष रखी। व्यापारियों का कहना था कि बिना उनकी समस्याओं को समझे और जमीनी हालात का आकलन किए हाइट बैरियर लगाए जाने से उनका व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा। विरोध की सूचना मिलते ही महापौर दीपक बाली स्वयं मौके पर पहुंचे और दुकानदारों से संवाद कर उनकी बात सुनी, जिससे माहौल कुछ हद तक शांत हुआ।

व्यापारियों ने महापौर को अवगत कराया कि स्टेशन रोड पर आरओबी के आसपास पहले से ही सर्विस रोड बेहद संकरी है, जिसके कारण बड़े वाहनों का निकलना लगभग असंभव हो जाता है। सड़क की चौड़ाई कम होने से आए दिन यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। दुकानदारों ने बताया कि पहले से मौजूद अव्यवस्थाओं के बीच यदि हाइट बैरियर लगा दिए गए तो बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाएगी, जिससे माल की सप्लाई बाधित होगी और व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। व्यापारियों ने यह भी कहा कि कई बार ग्राहक अपने वाहनों को सड़क किनारे खड़ा कर दुकानों तक पहुंचते हैं, लेकिन पुलिस द्वारा चालान किए जाने के डर से ग्राहक यहां आने से कतराने लगे हैं। दुकानदारों ने यह पीड़ा भी साझा की कि स्टेशन रोड क्षेत्र व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां आसपास के इलाकों से लोग खरीदारी के लिए आते हैं। लेकिन सीमित स्थान, पुलिस कार्रवाई और अब हाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाओं के कारण ग्राहक धीरे-धीरे यहां से दूर होते जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना था कि पहले ही मंदी के दौर से जूझ रहे व्यापार पर यह निर्णय अंतिम चोट साबित हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरओबी पर बड़े वाहनों का चलना ही संभव नहीं रहेगा, तो फिर इतने बड़े पुल के निर्माण का औचित्य क्या है। यह प्रश्न हर दुकानदार के मन में था, जिसे उन्होंने खुलकर महापौर के सामने रखा।

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर बिना स्थानीय लोगों से संवाद किए निर्णय लेने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि किसी भी विकास कार्य को लागू करने से पहले उस क्षेत्र में रहने और व्यापार करने वाले लोगों की राय लेना आवश्यक होता है। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसे विकास का कोई मतलब नहीं जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाए। दुकानदारों ने मांग की कि हाइट बैरियर लगाने की बजाय केवल उन भारी डंपरों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए, जो आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं और सड़क को नुकसान पहुंचाते हैं।

व्यापारियों की इस एकजुट और संगठित आवाज का नेतृत्व उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रभात साहनी कर रहे थे, जिन्होंने अपने अनुभव और सामूहिक दृष्टिकोण के बल पर विरोध को ठोस और प्रभावशाली बनाया। प्रभात साहनी के नेतृत्व में स्टेशन रोड के दर्जनों व्यापारी शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र हुए और प्रशासन के समक्ष अपनी व्यथा और असंतोष को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि स्टेशन रोड पर व्यवसाय कर रहे व्यापारी वर्षों से इस मार्ग पर अपने कामकाज को संचालित कर रहे हैं और उनकी आजीविका सीधे इसी सड़क से जुड़ी हुई है। यदि अचानक ऐसे निर्णय, जैसे हाइट बैरियर लगाना, थोप दिए गए तो सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा।

प्रभात साहनी ने प्रशासन से यह स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय या स्थायी उपाय लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों, प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय हितधारकों को पूरी तरह से प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल अधिकारियों के एकतरफा निर्णय से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है और इससे व्यापारियों के हितों के साथ-साथ शहर की आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। प्रभात साहनी ने यह भी कहा कि संवाद और सहयोग के माध्यम से ही एक ऐसा संतुलित और व्यावहारिक समाधान सामने आ सकता है, जो न केवल सड़क पर वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों और ग्राहकों की सुविधा को भी बनाए रखे। उनका कहना था कि उचित समन्वय और सभी पक्षों की भागीदारी से ही एक न्यायसंगत और टिकाऊ परिणाम हासिल किया जा सकता है।

महापौर दीपक बाली ने मौके पर पहुंचकर व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम और प्रशासन का उद्देश्य कभी भी व्यापारियों को नुकसान पहुंचाना नहीं होता, बल्कि शहर को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाना होता है। महापौर ने स्पष्ट किया कि बिना संवाद के कोई भी फैसला अंतिम नहीं होगा। उन्होंने व्यापारियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित विभागों से चर्चा कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। मौके पर जब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अभियंता से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे फोन पर बात नहीं हो सकी। इस पर महापौर दीपक बाली ने तत्काल हाइट बैरियर लगाने का कार्य कर रहे ठेकेदार जितेंद्र कुमार शर्मा से मोबाइल पर बातचीत की। बातचीत के दौरान महापौर ने ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए कि 4 फरवरी तक बैरियर लगाने का कार्य तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस अवधि के बाद नगर निगम, एनएच विभाग, पुलिस प्रशासन और व्यापारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी पहलुओं पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

महापौर के इस निर्देश के बाद व्यापारियों में कुछ राहत देखने को मिली। दुकानदारों ने कहा कि कम से कम फिलहाल काम रुकने से उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने महापौर का आभार जताया कि उन्होंने मौके पर आकर उनकी समस्या सुनी और तत्काल निर्णय लेकर काम रुकवाया। व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित बैठक में उनकी सभी व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो और व्यापार भी प्रभावित न हो।

प्रदर्शन में शामिल व्यापारियों ने एक-एक कर अपने विचार और व्यावहारिक समस्याएं उपस्थित अधिकारियों के समक्ष रखीं। जतिन नरूला ने स्पष्ट किया कि बड़े वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की कोई व्यवस्था किए बिना हाइट बैरियर लगाना पूरी तरह अव्यवहारिक है और इससे माल आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ेगा। विजय कुमार ने कहा कि पहले ही पुलिस की सख्ती के कारण ग्राहक रोड पर आने में डरते हैं और अब इस नए निर्णय के लागू होने से स्थिति और गंभीर हो जाएगी। विजय सिंह सोलंकी ने स्टेशन रोड की संकरी भौगोलिक स्थिति और व्यस्तता को ध्यान में रखे बिना लिया गया यह निर्णय पूरी तरह गैर-व्यावहारिक और व्यापार विरोधी बताया। विशाल गुप्ता और आसिफ इशानखान ने भी इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कदम से दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और स्थानीय व्यापार में अविश्वास और असंतोष की भावना बढ़ेगी, जो शहर की आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

इशानखान और सुप्रीत चड्ढा ने कहा कि व्यापारियों का विरोध केवल अपनी दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक सेहत से जुड़ा मुद्दा है। इंद्र मोहन अग्रवाल और जगजीत सिंह ने भी प्रशासन से अपील की कि वे मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति को समझें। उनके अनुसार कागजों पर बनाई गई योजनाएं जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खातीं, और यही वजह है कि ऐसे निर्णय विरोध का कारण बनते हैं। प्रदर्शन के दौरान यह बात भी सामने आई कि स्टेशन रोड पर कई बार बड़े डंपरों की वजह से गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। व्यापारियों का कहना था कि यदि प्रशासन वास्तव में सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे सबसे पहले डंपरों के अनियंत्रित आवागमन पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारी वाहनों के लिए समय निर्धारित किया जाए या वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए, ताकि आम लोगों और व्यापारियों को परेशानी न हो।

महापौर दीपक बाली ने व्यापारियों की बातों पर सहमति जताते हुए कहा कि किसी भी शहर का विकास तभी सार्थक होता है, जब उसमें सभी वर्गों का हित सुरक्षित रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित बैठक में व्यापारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और कोई भी निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन और व्यापारी एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के बीच टकराव की बजाय संवाद होना चाहिए। काम स्थगित होने के बाद स्टेशन रोड पर स्थिति सामान्य होती नजर आई, हालांकि व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे आगे भी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना था कि यह लड़ाई केवल हाइट बैरियर के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और सम्मान की है। व्यापारी चाहते हैं कि विकास कार्य उनकी सहमति और सुविधा को ध्यान में रखकर किए जाएं।

कुल मिलाकर, काशीपुर के स्टेशन रोड पर आरओबी पर लगाए जा रहे हाइट बैरियर को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, वह अब प्रशासन और व्यापारियों के बीच गंभीर संवाद के दौर में प्रवेश कर चुका है। शहर के व्यापारी अपनी आजीविका, माल सप्लाई और ग्राहक सुविधा को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्माण या नियोजन के निर्णय को उनकी राय के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए। महापौर दीपक बाली के त्वरित हस्तक्षेप और ठेकेदार को 4 फरवरी तक काम स्थगित करने के आदेश से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में आ गई है, लेकिन यह केवल अस्थायी राहत है। आगामी बैठक में नगर निगम, संबंधित विभाग और व्यापारिक प्रतिनिधि एक साथ बैठकर व्यावहारिक और संतुलित समाधान निकालेंगे। इस बैठक से यह उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसा निर्णय लिया जाएगा जो यातायात सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखे, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या विरोध की संभावना न्यूनतम रहे।

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