काशीपुर। नगर में राजनीति और व्यापार के गठजोड़ के बीच पनपे एक कथित विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है, जहाँ एक युवा नेता पर आर्थिक शोषण और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। काशीपुर की शांत वादियों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब स्थानीय कोतवाली में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे पीड़ितों ने राजनीति के उभरते चेहरे गगन कंबोज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पीड़ितों का दावा है कि पसीने की कमाई और दिन-रात की मेहनत के बाद जब उन्होंने अपने हक के पैसे मांगे, तो उन्हें बदले में आश्वासन के बजाय खौफनाक धमकियां मिलीं। यह मामला केवल कुछ लाख रुपयों के लेन-देन का नहीं रह गया है, बल्कि यह उस भरोसे के टूटने की कहानी है जो एक छोटे ठेकेदार ने एक रसूखदार व्यक्तित्व पर किया था। काशीपुर के सरवर खेड़ा क्षेत्र के निवासी ज़हूर और उनके साथ आए सफेद नामक ठेकेदार ने पुलिस के सामने जो दास्तां बयां की, वह व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर के सियासी गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है, क्योंकि आरोपी कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि एक चर्चित युवा नेता है।
शिकायतकर्ताओं ने कोतवाली प्रभारी हरेंद्र चौधरी को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में विस्तार से बताया कि किस तरह वर्ष 2024 में सुनहरे सपने दिखाकर उनसे काम लिया गया था। ज़हूर और सफेद ने आरोप लगाया कि जसपुर बस अड्डे के समीप गगन कंबोज के प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए उनके बीच एक औपचारिक समझौता हुआ था। शुरुआत में यह अनुबंध लगभग 21 लाख रुपये में तय हुआ था, जिसमें बाद में अतिरिक्त कार्यों जैसे ब्लड बैंक और फिजियोथैरेपी सेंटर के निर्माण को भी जोड़ा गया। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ लगभग 25 लाख रुपये की लागत का काम संपन्न किया, लेकिन जब भुगतान की बारी आई तो उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया। शुरुआती दौर में कुछ मामूली रकम देकर उन्हें बहला लिया गया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, बाकी के लाखों रुपयों का भुगतान ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आज स्थिति यह है कि ये मजदूर और ठेकेदार अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, जबकि दूसरी ओर काम का आनंद लिया जा रहा है।
पीड़ितों की व्यथा यहीं समाप्त नहीं होती; उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से गगन कंबोज के चक्कर काट रहे हैं। ठेकेदार सफेद ने बताया कि जब भी वे पैसों की बात करते, तो उन्हें ‘लोन’ पास होने का झांसा दिया जाता था। उन्हें बार-बार यह कहकर आश्वस्त किया गया कि जैसे ही बैंक से ऋण स्वीकृत होगा और मशीनें आनी शुरू होंगी, वैसे ही उनके बकाया 25 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान कर दिया जाएगा। बीच में जब ठेकेदारों ने भुगतान न मिलने पर काम रोकने की कोशिश की, तो उन्हें बड़े-बड़े वादे करके फिर से काम पर लगा दिया गया। सफेद और ज़हूर का आरोप है कि उन्होंने गगन कंबोज की बातों पर भरोसा कर अपना पूरा संसाधन झोंक दिया, लेकिन आज उन्हें केवल तारीखों पर तारीखें मिल रही हैं। विश्वास की इस डोर को तब झटका लगा जब हाल ही में पैसों की मांग करने पर युवा नेता का रवैया पूरी तरह बदल गया और उन्होंने कथित तौर पर मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए पीड़ितों को डराना-धमकाना शुरू कर दिया।
घटना के ताजा मोड़ के बारे में बताते हुए पीड़ितों ने कहा कि अभी तीन-चार दिन पहले ही गगन कंबोज ने उनसे एक आखिरी वादा किया था। उन्होंने बेहद भावुक और नाटकीय अंदाज में कहा था कि चाहे उन्हें अपना घर बेचना पड़े या खुद को, लेकिन वे 1 तारीख तक हर हाल में सारा पैसा चुका देंगे। लेकिन जब वह नियत तिथि आई और ठेकेदार अपना हक मांगने पहुंचे, तो वहां का नजारा ही बदला हुआ था। आरोप है कि पैसे देने के बजाय गगन कंबोज ने उन्हें सख्त लहजे में धमकी दे डाली, जिससे डरे-सहमे पीड़ित सीधे कोतवाली पहुंच गए। कोतवाली प्रभारी हरेंद्र चौधरी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में यह मामला केवल पैसों के विवाद का है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है। काशीपुर की जनता अब यह देख रही है कि क्या एक रसूखदार नेता के खिलाफ इन छोटे कामगारों को न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने ठेकेदारी प्रथा और नेताओं के रसूख के बीच पिसते आम आदमी की तस्वीर को उजागर कर दिया है। पीड़ित ज़हूर का कहना है कि उन्होंने और उनके साथियों ने पसीना बहाकर अस्पताल के ऊपर ब्लड बैंक और फिजियोथैरेपी यूनिट तैयार की, ताकि लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल सके, लेकिन उन्हें क्या पता था कि इसी काम का पैसा मांगने के लिए उन्हें पुलिस की चौखट तक आना पड़ेगा। 25 लाख रुपये की यह भारी-भरकम राशि किसी भी छोटे ठेकेदार की कमर तोड़ने के लिए काफी है। वर्तमान में काशीपुर कोतवाली पुलिस दोनों पक्षों के दस्तावेजों और एग्रीमेंट की जांच कर रही है। शहर में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि क्या राजनीति की आड़ में इस तरह की आर्थिक अनियमितताओं को अंजाम दिया जा रहा है। बहरहाल, कोतवाल हरेंद्र चौधरी के आश्वासन के बाद पीड़ितों को उम्मीद बंधी है, लेकिन गगन कंबोज की ओर से दी गई कथित धमकी ने उनके मन में एक अनजाना भय पैदा कर दिया है, जिसे दूर करना अब प्रशासन की जिम्मेदारी बन गई है।





