रूद्रपुर। उधम सिंह नगर के पंतनगर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के शांत और शैक्षणिक वातावरण में शनिवार को विकास और सुशासन की एक नई इबारत लिखी गई। उत्तराखंड शासन के सचिव दीपक कुमार, जो संस्कृत शिक्षा, जनगणना और कार्यक्रम क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभाल रहे हैं, ने जनपद के आला अधिकारियों के साथ एक मैराथन समीक्षा बैठक की। इस उच्च स्तरीय विमर्श का मुख्य केंद्र बिंदु न केवल आगामी जनगणना की रणनीतियां थीं, बल्कि धरातल पर आम आदमी को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता भी रही। सचिव ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को वातानुकूलित दफ्तरों की सुख-सुविधा छोड़कर सीधे जनता के बीच जाने का मंत्र दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि विकास की असली तस्वीर तभी साफ होगी जब प्रशासन के पहरेदार गांवों की पगडंडियों पर चलेंगे और वहां रात्रि विश्राम कर ग्रामीणों के चूल्हे-चौके की समस्याओं से रूबरू होंगे। शासन का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब फाइलों में दर्ज आंकड़ों के बजाय जमीनी संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाएगी।
आगामी जनगणना 2027 को लेकर शासन की गंभीरता इस बैठक में साफ झलकी। दीपक कुमार ने इस महाभियान को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि जनगणना के कार्य में शिक्षकों की भारी संख्या में तैनाती होती है, लेकिन यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। उन्होंने व्यवस्था दी कि ड्यूटी इस तरह लगाई जाए कि विद्यालय भी चलते रहें और राष्ट्रीय महत्व का यह कार्य भी बाधित न हो। सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने जनता को आगाह किया कि जनगणना के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी तब तक न दें, जब तक वह अपना आधिकारिक पहचान पत्र न दिखा दे। इस जन-जागरूकता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पंतनगर रेडियो स्टेशन और अन्य संचार माध्यमों के व्यापक उपयोग की योजना बनाई गई है, ताकि धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न रहे।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक और भाषाई अस्मिता को नया आयाम देते हुए सचिव ने भाषा नीति पर विशेष बल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि देवभूमि में हिंदी हमारी पहली राजभाषा है, तो संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का गौरव प्राप्त है। इस गौरव को सरकारी कामकाज और विजुअल आइडेंटिटी में भी झलकना चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों के साइनबोर्ड और अधिकारियों की नाम पट्टिकाएं अब हिंदी के साथ-साथ अनिवार्य रूप से संस्कृत में भी अंकित की जाएंगी। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को छूट दी कि यदि उन्हें अनुवाद में कठिनाई आती है, तो वे सीधे संस्कृत विभाग की विशेषज्ञ सेवाएं ले सकते हैं। केवल दफ्तर ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थलों पर पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों का स्वागत भी अब संस्कृत के श्लोकों और संदेशों से होगा, जिससे राज्य की आध्यात्मिक और भाषाई विरासत को एक वैश्विक पहचान मिल सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए दीपक कुमार ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ डीपी सिंह को स्वास्थ्य केंद्रों की दशा सुधारने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण अक्सर दूरदराज के मरीजों को शहरों की ओर दौड़ना पड़ता है। इसका समाधान उन्होंने ‘टेलीमेडिसिन’ के प्रभावी क्रियान्वयन में बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सीधे विशेषज्ञों से जोड़ा जाए ताकि गांव के अंतिम व्यक्ति को भी उच्च गुणवत्ता वाला इलाज मिल सके। इसके साथ ही, बढ़ते डिजिटल दौर में उन्होंने साइबर अपराधों पर भी चिंता जताई। सचिव ने पुलिस और प्रशासन को निर्देशित किया कि आम जनता को ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।

युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे नशे के कारोबार पर प्रहार करते हुए सचिव ने “ड्रग्स फ्री उत्तराखण्ड” के संकल्प को दोहराया। उन्होंने ड्रग्स इंस्पेक्टर और पुलिस विभाग को एक टीम की तरह काम करने की हिदायत दी और कहा कि नशे के सौदागरों के खिलाफ संयुक्त छापेमारी और सख्त कानूनी कार्रवाई में कोई कोताही न बरती जाए। पर्यटन की संभावनाओं को भुनाने के लिए उन्होंने विभाग को जिले में होमस्टे की संख्या बढ़ाने के लक्ष्य दिए, ताकि स्थानीय युवाओं को अपने घर में ही रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके अतिरिक्त, गैस आपूर्ति जैसी बुनियादी जरूरतों की नियमित निगरानी और आयुष्मान भारत योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र व्यक्ति केवल जागरूकता या पंजीकरण की कमी के कारण इलाज से वंचित नहीं रहना चाहिए, इसके लिए जिला प्रशासन को घर-घर दस्तक देनी होगी।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं और जन-शिकायतों के निपटारे को लेकर सचिव का रुख बेहद कड़ा रहा। उन्होंने जिले में चल रही मुख्यमंत्री की सभी घोषणाओं की फाइलें खंगाली और अधिकारियों से उनकी अद्यतन स्थिति जानी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी परियोजना में बजट या समन्वय की कमी है, तो उसका समाधान तत्काल जिलाधिकारी के स्तर पर या शासन स्तर पर किया जाए, लेकिन कार्य में देरी बर्दाश्त नहीं होगी। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के संबंध में उन्होंने कहा कि जनता की संतुष्टि ही सेवा का मापदंड है। उन्होंने निर्देश दिया कि शिकायतों का निस्तारण एल-1 स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण ढंग से किया जाए ताकि आमजन को उच्चाधिकारियों के चक्कर न लगाने पड़ें। जिन विभागों में शिकायतें लंबे समय से पेंडिंग हैं, उन्हें कारण स्पष्ट करने और त्वरित समाधान करने की अंतिम चेतावनी दी गई।
अंत में, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने “गड्ढा मुक्त सड़क” अभियान की प्रगति जांची। उन्होंने संबंधित अभियंताओं को मानसून आने से पहले सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत पूरी करने के आदेश दिए ताकि बारिश के मौसम में जनता को कीचड़ और हादसों से न जूझना पड़े। विशेष रूप से स्कूलों में महिला सुरक्षा और स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने बालिकाओं और महिला कर्मचारियों के लिए बने शौचालयों के नियमित रखरखाव की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिरों में एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण छात्राओं का अधिकार है। बैठक में अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र ने आश्वस्त किया कि जनगणना के लिए प्रगणकों और सुपरवाइजरों की तैनाती हो चुकी है और पोर्टल पर डाटा प्रतिदिन अपडेट किया जा रहा है। इस मौके पर सुशील मोहन डोभाल, हिमांशु जोशी, शिप्रा जोशी, नफील जमील, विद्या सिंह सोमनाल, विपिन कुमार और अमन अनिरुद्ध सहित समस्त विभाग प्रमुखों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।





