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नगला तराई बना आदर्श संस्कृत ग्राम सचिव ने दी देववाणी को स्वरोजगार से जोड़ने की गारंटी

नगला तराई की चौपाल पर गूँजी वेदों की ऋचाएं और दिखा देववाणी का अद्भुत जादू, अब सात समंदर पार भी युवाओं को रोजगार दिलाएगी उत्तराखंड की यह प्राचीन भाषा, सचिव ने थपथपाई ग्रामीणों की पीठ!

खटीमा। देववाणी संस्कृत के पुनरुद्धार की एक नई और गौरवशाली गाथा ग्राम पंचायत नगला तराई में लिखी जा रही है, जहाँ शासन की सक्रियता और जनभागीदारी के अद्भुत संगम ने एक नई मिसाल पेश की है। हाल ही में इस आदर्श संस्कृत ग्राम में उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार का आगमन हुआ, जिन्होंने ग्राम सभा के बहुउद्देशीय भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए भविष्य की योजनाओं का खाका खींचा। इस महत्वपूर्ण दौरे की शुरुआत एक गरिमामयी वातावरण में हुई, जहाँ ग्राम प्रधान देवेन्द्र सिंह और खंड विकास अधिकारी संजय कुमार गांधी ने सचिव का पुष्पगुच्छ और माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया। यह आयोजन केवल एक सरकारी बैठक मात्र नहीं था, बल्कि यह संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के उस संकल्प का प्रतिबिंब था, जिसे वर्तमान शासन और स्थानीय प्रशासन पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। ग्राम पंचायत नगला तराई के बहुउद्देशीय भवन की दीवारें उस वक्त संस्कृत के श्लोकों से गूंज उठीं, जब स्थानीय शिक्षार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

संस्कृत की इस मधुर धारा के बीच आयोजित स्वागत समारोह में ग्रामवासी शिक्षार्थियों ने अपनी भाषाई दक्षता का परिचय देते हुए संस्कृत में स्वागत गीत, वंदना और शास्त्रोक्त श्लोकों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति दी। इस दौरान करन चंद, प्रीति, इशारा खान, मेहरू निशा, मीणा थापा और रिंकू राणा जैसे उत्साही शिक्षार्थियों ने न केवल अपना आत्म-परिचय संस्कृत में दिया, बल्कि विभिन्न गीतों और वंदनाओं के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि देववाणी अब केवल पांडुलिपियों तक सीमित नहीं है। विशेष रूप से श्रीमती मीना थापा ने दैनिक जीवन में संस्कृत मंत्रों के सकारात्मक प्रभाव और उनके आध्यात्मिक एवं मानसिक लाभों पर विस्तार से चर्चा की, जिससे उपस्थित जनसमूह को इस प्राचीन भाषा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की प्रेरणा मिली। शिक्षार्थियों के इस आत्मविश्वास और शुद्ध उच्चारण ने सचिव दीपक कुमार को भी काफी प्रभावित किया, जिन्होंने ग्रामीण स्तर पर संस्कृत के प्रति इस गहरे जुड़ाव की मुक्त कंठ से सराहना की और इसे राज्य की सांस्कृतिक पहचान का गौरव बताया।

बैठक को संबोधित करते हुए सचिव दीपक कुमार ने देश के प्रथम संस्कृत ग्राम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला और इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि उत्तराखंड देश का वह अग्रणी राज्य बन चुका है, जिसके प्रत्येक जनपद में संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। उन्होंने उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम, निदेशालय, परिषद और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि संस्कृत अब केवल पूजा-पाठ की भाषा नहीं, बल्कि रोजगार का एक सशक्त माध्यम बनने की दिशा में अग्रसर है। सचिव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि उत्तराखंड शासन द्वारा संस्कृत को देश और विदेश में रोजगार के अवसरों से जोड़ने की ठोस कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने षोडश संस्कारों की कार्यशालाओं के आयोजन से लेकर विदेशों में संस्कृत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ निरंतर संपर्क साधे जाने की बात कही। उनका संबोधन स्पष्ट संकेत था कि शासन अब संस्कृत को आधुनिक वैश्विक परिदृश्य में एक प्रतिष्ठित और लाभकारी भाषा के रूप में स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध है।

सचिव ने उपस्थित जनसमूह का आह्वान किया कि वे श्रुति माध्यम यानी सुनने और बोलने की परंपरा का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए संस्कृत भाषा को सीखने और सिखाने के अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक यह भाषा आम लोगों की बोलचाल में शामिल नहीं होगी, तब तक इसका वास्तविक विकास संभव नहीं है। इस पूरी सभा का कुशल संचालन और अतिथियों का आभार प्रदर्शन संस्कृत ग्राम की समर्पित प्रशिक्षिका श्रीमती ललिता भट्ट द्वारा किया गया, जिन्होंने इस अभियान को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समीक्षा बैठक और निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अमले की भी व्यापक उपस्थिति रही, जिसमें खंड विकास अधिकारी संजय कुमार गांधी, सहायक खंड विकास अधिकारी चन्द्र शेखर जोशी और ग्राम प्रधान देवेन्द्र सिंह ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इनके साथ ही सहायक निदेशक (संस्कृत), ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्रामोत्थान परियोजना सहित एन आर एल एम स्टाफ और ग्राम के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आदर्श संस्कृत ग्राम के सपने को साकार करने का संकल्प दोहराया।

नगला तराई का यह दौरा शासन की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जहाँ परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारियों की इस सक्रियता और ग्रामीणों के उत्साह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में उत्तराखंड का यह आदर्श संस्कृत ग्राम न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक प्रेरणा पुंज बनेगा। सचिव द्वारा दी गई रोजगार संबंधी जानकारियों ने युवाओं में एक नई आशा का संचार किया है, जिससे अब यह स्पष्ट हो गया है कि संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों के लिए केवल अध्यापन ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक द्वार खुल रहे हैं। ग्राम पंचायत नगला तराई में आयोजित यह समीक्षा बैठक विकास और संस्कृति के उस अनूठे तालमेल की गवाह बनी, जो आने वाले समय में उत्तराखंड को ‘संस्कृत प्रदेश’ के रूप में विश्व पटल पर एक नई ऊँचाई प्रदान करेगी। प्रशासन की इस संवेदनशीलता और जनता के अटूट विश्वास ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति प्रबल हो, तो प्राचीन वैभव को पुनः प्राप्त करना असंभव नहीं है।

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