उत्तराखंड की सियासत में अपनी जादुई सक्रियता और जनता के बीच गहरी पैठ के लिए मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर कुमाऊं की धरती पर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया है। हाल ही में काशीपुर के मानपुर गांव पहुंचे हरीश रावत का स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था, जहां कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष रवि धींगरा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों का एक विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और गगनभेदी नारों के बीच जब पूर्व मुख्यमंत्री का काफिला गांव में दाखिल हुआ, तो हर तरफ केवल सिर ही सिर नजर आ रहे थे। इस दौरान जनसमूह की भारी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि सत्ता में न होने के बावजूद रावत का राजनीतिक क्रेज आज भी बरकरार है। रवि धींगरा के भव्य आयोजन ने क्षेत्र में कांग्रेस की मजबूती का संकेत दिया है, जहां महिलाओं और युवाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। रावत ने सबसे पहले मानपुर के प्राचीन मंदिर में शीश नवाया और क्षेत्र की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगा, जिसके बाद उन्होंने सीधे जनता से संवाद स्थापित किया।
महिला आरक्षण के संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दे पर जब भारतीय जनता पार्टी के हमलों के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री से सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी ही बेबाकी और तल्खी के साथ पलटवार किया। हरीश रावत ने भाजपा को ‘प्रपंची’ और ‘झूठ की राजनीति’ करने वाली पार्टी करार देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक साल 2023 में संसद के भीतर सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसमें कांग्रेस और पूरे इंडिया गठबंधन ने अपना पूर्ण समर्थन दिया था। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस विधेयक की राह में जानबूझकर जनसंख्या गणना और परिसीमन जैसे रोड़े अटका दिए हैं, ताकि इसे 2034 तक ठंडे बस्ते में डाला जा सके। रावत ने तर्क दिया कि यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो इसे तुरंत लागू किया जाता, लेकिन भाजपा ने इसे केवल चुनावी लाभ के लिए एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। उन्होंने परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों की आपत्तियों का हवाला देते हुए कहा कि संघीय व्यवस्था में राज्यों के हितों की अनदेखी करना लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
कांग्रेस के दिग्गज नेता ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक आज भी जीवित है और उसे संसद की मंजूरी प्राप्त है, लेकिन जो चीज गिरी है, वह भाजपा का ‘परिसीमन का छलावा’ है। रावत ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में ईमानदार हैं, तो राज्यों के साथ बातचीत कर 10-12 दिनों के भीतर परिसीमन की रूपरेखा तय करें और तत्काल संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे का समाधान निकालें। उन्होंने कांग्रेस के पुराने प्रस्ताव को दोहराते हुए सुझाव दिया कि वर्तमान की 543 लोकसभा सीटों में से ही एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जानी चाहिए। उत्तराखंड के संदर्भ में उन्होंने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि देवभूमि को एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में देखा जाना चाहिए और साल 2027 के विधानसभा चुनाव में यहाँ की 70 में से 33 प्रतिशत सीटों पर महिला आरक्षण लागू कर दिया जाना चाहिए। रावत का यह सुझाव न केवल उनके महिला सशक्तिकरण के प्रति विजन को दर्शाता है, बल्कि भाजपा के दावों की हवा निकालने का काम भी करता है।
अपनी व्यक्तिगत छुट्टियों और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान पर चर्चा करते हुए हरीश रावत ने बड़े ही दार्शनिक और चुटीले अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 59 वर्षों से कांग्रेस के एक समर्पित श्रमिक के रूप में पार्टी की सेवा कर रहे हैं और 15 दिनों का अवकाश लेना उनका बुनियादी अधिकार है। रावत ने उन आलोचकों पर तंज कसा जिन्होंने उनके अवकाश के दौरान तरह-तरह के विवादित बयान दिए और पार्टी के भीतर गुटबाजी को हवा देने की कोशिश की। उन्होंने बड़ी स्पष्टता से कहा कि उनके खिलाफ ‘तांत्रिक’ या ‘मांत्रिक’ जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने वाले लोग खुद अपनी मर्यादा गिरा रहे हैं। रावत ने कहा कि उनके जैसे पुराने कार्यकर्ता का कुछ दिनों के लिए एकांत में जाना किसी के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए था, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर इसे ‘पलीता’ लगाने के लिए उछाला। उन्होंने साफ किया कि वह किसी भी विवाद से विचलित नहीं हैं और विश्राम के बाद अब वे दोगुनी ऊर्जा के साथ मैदान में लौट आए हैं।
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भाजपा द्वारा चेहरा घोषित किए जाने के सवाल पर रावत ने कांग्रेस की रणनीति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का एकमात्र चेहरा राहुल गांधी हैं और प्रधानमंत्री पद के लिए वे ही सबसे योग्य उम्मीदवार हैं। राज्य की राजनीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चयन एक लोकतांत्रिक और स्थापित प्रक्रिया के तहत होता है। जब पार्टी को विधानसभा में पूर्ण बहुमत मिलेगा, तब सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जिस भी नाम पर मुहर लगाएंगे, पूरी पार्टी और प्रदेश की जनता उसके पीछे एकजुट होकर खड़ी रहेगी। भाजपा द्वारा कांग्रेस के ‘वनवास’ जाने के बयानों पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा खुद 60 साल तक सत्ता से बाहर रही थी और अब जनता उन्हें फिर से उसी दौर में भेजने के लिए तैयार बैठी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का अहंकार ही उनके पतन का कारण बनेगा और जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है।
उत्तराखंड के कुमाऊं से लेकर गढ़वाल मंडल तक के अपने विस्तृत तूफानी दौरे के अनुभवों को साझा करते हुए हरीश रावत ने कांग्रेस की जीत के प्रति भारी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के कोने-कोने में उन्होंने जनता की नब्ज को टटोला है और हर जगह सत्ता परिवर्तन की एक जबरदस्त लहर दिखाई दे रही है। रावत के अनुसार, पहाड़ से लेकर मैदान तक कांग्रेस की पृष्ठभूमि मजबूत हो रही है और लोग भाजपा की नीतियों से तंग आ चुके हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है, जिसका असर आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में नया जोश है और रवि धींगरा जैसे युवा नेता जिस तरह से जमीन पर काम कर रहे हैं, उससे यह तय है कि 2027 में कांग्रेस सत्ता में जोरदार वापसी करेगी। मानपुर गांव के इस सफल कार्यक्रम ने न केवल हरीश रावत की ताकत दिखाई, बल्कि विरोधियों को यह संदेश भी दे दिया कि उत्तराखंड की राजनीति का यह ‘शिल्पी’ अभी थका नहीं है।





