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चैती मेला परिसर में जनसैलाब ने रचा इतिहास, दीपक बाली के नेतृत्व में मिटाया गंदगी का नामोनिशान

महापौर दीपक बाली के प्रचंड आह्वान पर उमड़ा जनसैलाब, कचरे के साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए समाज के हर वर्ग ने उठाई झाड़ू, चैती मेला मैदान की कायाकल्प कर स्वच्छता का ऐसा अद्भुत कीर्तिमान रचा।

काशीपुर। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और आस्था के केंद्र काशीपुर में चैती मेले के भव्य समापन के उपरांत आज एक ऐसी अलख जगी, जिसने आधुनिक भारत के स्वच्छता संकल्प को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। जैसे ही बुधवार की पहली किरण ने कुमाऊं की इस ऐतिहासिक धरती को छुआ, नगर निगम काशीपुर के तत्वाधान में एक अभूतपूर्व ‘स्वच्छता महाअभियान’ का शंखनाद हो गया, जिसका एकमात्र ध्येय मेले की चकाचौंध के पीछे छूटे कूड़े के अंबार को साफ कर मां बाल सुंदरी के दरबार की दिव्यता को पुनर्जीवित करना था। इस विराट आयोजन की कमान स्वयं यशस्वी महापौर दीपक बाली ने संभाली, जो सुबह के धुंधलके में ही कार्यकर्ताओं और नगर निगम की विशाल टीम के साथ मेला मैदान में डट गए। यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था, जहाँ हाथ में झाड़ू और मन में सेवा का भाव लिए हजारों लोग एक साथ कदमताल कर रहे थे, मानो वे काशीपुर को कूड़े के अभिशाप से मुक्त कराने के लिए किसी धर्मयुद्ध पर निकले हों।

चैती मेले के समापन के साथ ही परिसर में फैली प्लास्टिक, कांच के टुकड़े और खाद्य अवशेषों की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी थी, लेकिन महापौर दीपक बाली की दूरदर्शी सोच ने इसे एक जन-आंदोलन में बदल दिया। सुबह ठीक सात बजे जब पूरा शहर अंगड़ाई ले रहा था, तब मेला परिसर “जहाँ उत्सव, वहाँ स्वच्छता” के नारों से गुंजायमान हो उठा। महापौर ने जैसे ही प्रतीकात्मक रूप से सफाई अभियान का शुभारंभ किया, उपस्थित जनसमूह में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार हो गया। इस अभियान की सबसे आकर्षक कड़ी वह व्यापक जनभागीदारी रही, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों और जागरूक नागरिकों ने अपने पद और प्रतिष्ठा को दरकिनार कर श्रमदान किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस पुनीत कार्य में अपना योगदान देने के लिए आतुर दिखा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि काशीपुर की जनता अब अपने शहर को केवल रहने लायक नहीं, बल्कि देशभर के लिए एक आदर्श स्वच्छता मॉडल बनाने की दिशा में अग्रसर है।

अभियान के दौरान मेला मैदान के कोने-कोने को खंगाला गया, जहाँ नगर निगम की मशीनों और मानव श्रम के संगम ने चंद घंटों में ही कायाकल्प कर दिया। विशेष रूप से उन संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहाँ भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा और कांच की बोतलें जमा थीं, जो न केवल पर्यावरण के लिए घातक थीं बल्कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती थीं। महापौर दीपक बाली ने खुद अग्रिम पंक्ति में रहकर न केवल निर्देश दिए, बल्कि स्वयं कूड़ा उठाकर जनता के सामने एक मिसाल पेश की कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि नियत साफ होनी चाहिए। इस दौरान नगर निगम के सफाई मित्रों ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाई और विशाल कचरा वाहनों के माध्यम से एकत्र किए गए कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया गया। मैदान के वे हिस्से जो कल तक गंदगी की मार झेल रहे थे, दोपहर होते-होते पूरी तरह से व्यवस्थित और स्वच्छ नजर आने लगे, जो काशीपुर की सामूहिक शक्ति का जीवंत प्रमाण था।

सफाई के इस महायज्ञ के बीच उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए महापौर दीपक बाली ने अत्यंत भावुक और ओजस्वी शब्दों में कहा कि चैती मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, परंपरा और धार्मिक भावनाओं का संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस स्थान पर मां बाल सुंदरी का वास हो, वहाँ गंदगी का वास होना हमारी सांस्कृतिक मर्यादा के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वृहद अभियान का वास्तविक उद्देश्य केवल कूड़ा हटाना नहीं है, बल्कि प्रत्येक काशीपुर वासी के भीतर स्वच्छता के प्रति एक ऐसी ज्वाला प्रज्वलित करना है जो निरंतर जलती रहे। दीपक बाली ने आह्वान किया कि यदि हम उत्सव मनाना जानते हैं, तो हमें उस उत्सव स्थल को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी भी खुद ही उठानी होगी। उनकी यह अपील लोगों के दिलों को छू गई और कई परिवारों ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में किसी भी सार्वजनिक आयोजन के बाद गंदगी नहीं फैलाएंगे, जिससे इस अभियान को सामाजिक परिवर्तन की एक नई दिशा मिली।

महापौर ने आगे कहा कि काशीपुर को एक आदर्श और स्वच्छ शहर बनाने का सपना केवल सरकारी तंत्र के भरोसे पूरा नहीं किया जा सकता, इसके लिए हर नागरिक का सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने उद्योगों और विद्यालयों की भागीदारी की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि जब समाज के जिम्मेदार स्तंभ एक साथ आते हैं, तो सफलता सुनिश्चित हो जाती है। दीपक बाली के अनुसार, नगर निगम निरंतर शहर के विकास और सौंदर्यकरण के लिए तत्पर है, लेकिन जनता का प्रेम और सक्रियता ही इस शहर की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि आज का यह सफाई अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि हम अपनी धरोहरों को किस प्रकार सहेज कर रखते हैं। इस दौरान मेला परिसर के आसपास के निवासियों और दुकानदारों ने भी महापौर के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और भविष्य में भी नगर निगम के हर कदम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का आश्वासन दिया।

अभियान के समापन पर जब पूरा मेला मैदान अपनी वास्तविक पवित्रता में लौट आया, तब हर चेहरा संतोष की मुस्कान से भरा था। इस विशाल स्वच्छता उत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि काशीपुर की जनता अपनी विरासत और पर्यावरण के प्रति कितनी सजग है। महापौर दीपक बाली के कुशल नेतृत्व में शुरू हुआ यह कारवां अब रुकने वाला नहीं है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि स्वच्छता एक बार का कार्य नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आज का दिन काशीपुर के इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, जहाँ एक राजनेता ने जमीन पर उतरकर आम जनमानस के साथ मिलकर स्वच्छता की नई परिभाषा लिखी। शहर के कोने-कोने में आज इसी महाअभियान की चर्चा हो रही है, जिसने न केवल कचरा साफ किया, बल्कि लोगों की सोच को भी एक नई स्वच्छता और स्पष्टता प्रदान की है, जिससे काशीपुर की चमक अब और भी ज्यादा प्रखर हो गई है।

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