रामनगर। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की वैश्विक ख्याति के बीच इन दिनों एक गहरा अंधेरा पसरा हुआ है, जिसने न केवल स्थानीय निवासियों की रातों की नींद हराम कर दी है, बल्कि करोड़ों रुपये के पर्यटन व्यवसाय की कमर भी तोड़ कर रख दी है। जिम कॉर्बेट क्षेत्र में लगातार जारी बिजली के संकट और अघोषित कटौती के तांडव ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसकी गूंज सीधे बिजली विभाग के गलियारों तक जा पहुंची है। जिम कॉर्बेट रिजॉर्ट्स जीएम एसोसिएशन ने इस गंभीर मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए शासन-प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है, क्योंकि बार-बार होने वाले पावर कट ने मेहमानों के अनुभव को कड़वा कर दिया है। एसोसिएशन के जांबाज उपाध्यक्ष सुन्दर सिंह बिष्ट के दमदार नेतृत्व में एक प्रभावशाली प्रतिनिधिमंडल ने आज ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता के द्वार पर दस्तक दी और उन्हें क्षेत्र की बदहाली का कच्चा चिट्ठा सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाएगा।
जिम कॉर्बेट के जंगलों से सटे इस शांत इलाके में बिजली की आंख-मिचौली ने कोहराम मचा रखा है, जिससे रिसॉर्ट संचालकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और इसी व्यथा को व्यक्त करने के लिए सुन्दर सिंह बिष्ट ने अधिशासी अभियंता के समक्ष कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बेहद बेबाकी से अवगत कराया कि घंटों तक बिजली गुल रहने और लो-वोल्टेज की मार झेलने के कारण पर्यटकों को वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसके लिए वे भारी-भरकम राशि चुकाते हैं। जब विदेशी और घरेलू सैलानी उमस और गर्मी के बीच अंधेरे में रहने को मजबूर होते हैं, तो इससे न केवल रिसॉर्ट की छवि धूमिल होती है, बल्कि उत्तराखंड पर्यटन की साख पर भी गहरा धब्बा लगता है। बार-बार ट्रिपिंग और वोल्टेज की अस्थिरता के कारण महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फुंक रहे हैं और जनरेटर चलाने में होने वाले भारी खर्च ने रिसॉर्ट्स के बजट को पूरी तरह असंतुलित कर दिया है, जिससे अब वहां कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों के रोजगार पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
अधिशासी अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुना और विभाग की लाचारी व्यक्त करते हुए एक ऐसा खुलासा किया जिसने समस्या की जड़ को सबके सामने लाकर रख दिया। उन्होंने बताया कि विभाग इस संकट का समाधान करने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसी कड़ी में नवंबर माह के दौरान ग्राम छोई में एक अत्याधुनिक नए विद्युत केंद्र की स्थापना के लिए व्यापक भूमि सर्वेक्षण भी कराया गया था। अभियंता का दावा है कि यदि ग्राम छोई में यह नया बिजली घर अस्तित्व में आ जाता है, तो पूरे जिम कॉर्बेट क्षेत्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी और लो-वोल्टेज की समस्या इतिहास बन जाएगी। विडंबना यह है कि विभाग के पास योजना और सर्वे तो तैयार है, लेकिन फाइलें सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रही हैं क्योंकि प्रस्तावित भूमि का आधिकारिक आवंटन अभी तक विद्युत विभाग के नाम नहीं हो सका है, जिसके कारण यह महत्वकांक्षी परियोजना अधर में लटकी हुई है।
बिजली विभाग के अधिकारी ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए जिम कॉर्बेट रिजॉर्ट्स जीएम एसोसिएशन से सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए एक नई रणनीति पर काम करने का सुझाव दिया है। अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया कि यदि एसोसिएशन के सदस्य अपने स्तर पर शासन के उच्चाधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करें, तो भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक तत्परता का तालमेल नहीं होगा, तब तक ग्राम छोई में बिजली घर का निर्माण शुरू कर पाना मुमकिन नहीं होगा, इसलिए इस लड़ाई में सभी को एकजुट होना होगा। अधिकारी की इस अपील को सकारात्मक रूप लेते हुए उपाध्यक्ष सुन्दर सिंह बिष्ट ने आश्वासन दिया कि एसोसिएशन अब चुप नहीं बैठेगी और वे जल्द ही शासन के बड़े नेताओं और मंत्रियों से मुलाकात कर इस अटकी हुई फाइल को आगे बढ़ाएंगे ताकि क्षेत्र के लोगों और पर्यटन को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन और वार्ता के दौरान जिम कॉर्बेट की पर्यटन दुनिया के कई दिग्गज चेहरे एक साथ नजर आए, जो इस बात का प्रमाण है कि समस्या अब पानी से ऊपर जा चुकी है। उपाध्यक्ष सुन्दर सिंह बिष्ट के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वालों में कीर्ति जोशी, बबीता मेहरा और प्रकाश पाठक जैसे सक्रिय नाम शामिल थे, जिन्होंने बिजली संकट के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर अपनी चिंता जाहिर की। इनके अतिरिक्त लक्ष्मण रावत, मनोज कोठारी और राजेश पंत ने भी विद्युत विभाग को स्पष्ट संदेश दिया कि अब कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और धरातल पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। पूरी बैठक में दीप छाबड़ा, एन डी पालीवाल, सुन्दर रावत, मनीष शर्मा और देवी सिंह ने भी अपने विचार साझा करते हुए एकजुटता का परिचय दिया और सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि जब तक ग्राम छोई में बिजली घर का सपना सच नहीं हो जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और दबाव बनाने का सिलसिला थमेगा नहीं।
रामनगर के इस समृद्ध क्षेत्र में बिजली की कमी केवल एक तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों के भविष्य का सवाल है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम कॉर्बेट के पर्यटन पर निर्भर हैं। यदि वोल्टेज की समस्या के कारण विदेशी सैलानियों ने यहाँ आना कम कर दिया, तो इसका सीधा असर स्थानीय टैक्सी चालकों, गाइडों और छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा, जिससे इलाके में आर्थिक मंदी का दौर शुरू हो सकता है। सुन्दर सिंह बिष्ट और उनके साथियों ने ज्ञापन के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और सरकार को अविलंब ग्राम छोई की भूमि का आवंटन कर निर्माण कार्य शुरू करवाना चाहिए। फिलहाल, बिजली विभाग और रिसॉर्ट एसोसिएशन के बीच हुई इस वार्ता ने उम्मीद की एक नई किरण तो जगाई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकारी तंत्र कितनी जल्दी कुंभकर्णी नींद से जागता है और रामनगर की अंधेरी रातों को रोशनी से सराबोर करता है।
अंततः यह मामला अब केवल एक ज्ञापन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जिम कॉर्बेट के अस्तित्व और उत्तराखंड के गौरव की रक्षा का प्रश्न बन गया है जिसमें जनभागीदारी की सख्त जरूरत है। जिस तरह से सुन्दर सिंह बिष्ट, कीर्ति जोशी, बबीता मेहरा, प्रकाश पाठक, लक्ष्मण रावत, मनोज कोठारी, राजेश पंत, दीप छाबड़ा, एन डी पालीवाल, सुन्दर रावत, मनीष शर्मा और देवी सिंह जैसे लोगों ने नेतृत्व संभाला है, उससे शासन पर भारी दबाव बनना निश्चित है। पर्यटन सत्र अपने चरम पर है और ऐसे में बिजली की किल्लत किसी बड़े आत्मघाती कदम से कम नहीं है, इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वे औपचारिकताएं त्याग कर युद्धस्तर पर काम करें। रामनगर की जनता और रिजॉर्ट मालिक अब बस उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब ग्राम छोई का नया पावर स्टेशन चालू होगा और जिम कॉर्बेट का कोना-कोना फिर से दूधिया रोशनी में नहा उठेगा, जिससे न केवल व्यापार फलेगा-फूलेगा बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन भी सुगम होगा।





