काशीपुर। 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर काशीपुर नगर निगम सभागार केवल राष्ट्रीय उत्सव का साक्षी नहीं बना, बल्कि साहित्य और संवेदनाओं के संगम का भी केंद्र रहा। तिरंगे की गरिमा, संविधान के आदर्शों और राष्ट्रभक्ति के वातावरण के बीच आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भगत की तीसरी पुस्तक, कहानी संग्रह ‘दरकते सपने’ का विधिवत विमोचन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन ने गणतंत्र दिवस को एक नई वैचारिक ऊंचाई प्रदान की, जहां राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ सामाजिक चेतना और संवेदनशील अभिव्यक्ति पर भी गंभीर विमर्श देखने को मिला। नगर निगम सभागार में आयोजित यह कार्यक्रम साहित्यप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। यह अवसर इस बात का प्रमाण बना कि राष्ट्रीय पर्वों के साथ साहित्य और विचारों का मेल समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस विशेष अवसर पर पुस्तक ‘दरकते सपने’ का विमोचन काशीपुर महापौर दीपक बाली, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती चंद्रप्रभा तथा मुख्य नगर आयुक्त रविंद्र बिष्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। जैसे ही मंच पर पुस्तक का अनावरण हुआ, सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। उपस्थित अतिथियों ने लेखक विनोद भगत को इस साहित्यिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर किसी साहित्यिक कृति का विमोचन होना अपने आप में एक विशेष संदेश देता है। यह संदेश केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों, संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को साझा करने का भी है। मंच से वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के भीतर संवाद, अभिव्यक्ति और चिंतन की स्वतंत्रता का भी प्रतीक है, और साहित्य इस स्वतंत्रता का सबसे सशक्त माध्यम है।
कहानी संग्रह ‘दरकते सपने’ की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने बताया कि इस पुस्तक में कुल 26 कहानियां शामिल हैं, जो समकालीन समाज की जटिलताओं, आमजन के संघर्ष, टूटती उम्मीदों और सामाजिक विसंगतियों को बेहद संवेदनशील और यथार्थपरक ढंग से प्रस्तुत करती हैं। लेखक विनोद भगत ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के उन पहलुओं को उजागर किया है, जिन पर प्रायः चर्चा नहीं होती, लेकिन जो आम आदमी के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। कहानियों में कहीं मजदूर वर्ग की पीड़ा झलकती है, तो कहीं मध्यवर्गीय जीवन की उलझनें, कहीं रिश्तों की दरारें दिखाई देती हैं, तो कहीं सपनों के बिखरने का दर्द। यह संग्रह केवल कल्पना का संसार नहीं रचता, बल्कि पाठकों को उनके आसपास के यथार्थ से रूबरू कराता है।
लेखक विनोद भगत की लेखन शैली पर चर्चा करते हुए साहित्यप्रेमियों ने कहा कि उनकी कहानियों की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है। उनकी रचनाओं में न तो अनावश्यक अलंकारिकता है और न ही कृत्रिम भावुकता, बल्कि एक सधी हुई संवेदनशीलता है, जो पाठक को भीतर तक छू जाती है। ‘दरकते सपने’ की कहानियां समाज के भीतर चल रहे मौन संघर्षों की आवाज बनकर सामने आती हैं। यह संग्रह पाठक को केवल पढ़ने का अनुभव नहीं देता, बल्कि सोचने, सवाल करने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी रचनाएं आज के समय में बेहद जरूरी हैं, क्योंकि ये समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं और हमें अपने आसपास की सच्चाइयों से आंख मिलाने का साहस देती हैं।
विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए काशीपुर महापौर दीपक बाली ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने की शक्ति रखता है और विनोद भगत की यह कृति सामाजिक चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस का मूल भाव नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाना है, और साहित्य इन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। महापौर ने यह भी कहा कि जब कोई लेखक समाज की पीड़ा, संघर्ष और सपनों को शब्द देता है, तो वह केवल लेखक नहीं रहता, बल्कि समाज का प्रतिनिधि बन जाता है। उन्होंने लेखक को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी विनोद भगत इसी तरह सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत करते रहेंगे।
ब्लॉक प्रमुख चंद्रप्रभा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक प्रयास नई पीढ़ी को सोचने और समझने की दिशा में प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में, जब युवा वर्ग तेजी से बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में जी रहा है, साहित्य उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखने का काम करता है। ‘दरकते सपने’ जैसे कहानी संग्रह युवाओं को यह समझने में मदद करते हैं कि समाज की वास्तविक चुनौतियां क्या हैं और उनसे कैसे जूझा जा सकता है। उन्होंने लेखक की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कहानियां संवेदनशीलता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी बोध कराती हैं, जो किसी भी रचना की सबसे बड़ी ताकत होती है।
मुख्य नगर आयुक्त रविंद्र बिष्ट ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि सामाजिक सरोकारों से जुड़ा साहित्य आज समय की मांग है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज को समझने और महसूस करने की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, और साहित्य इस समझ को गहराई प्रदान करता है। विनोद भगत की कहानियां समाज के उन वर्गों की आवाज बनती हैं, जो अक्सर हाशिये पर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की रचनाएं न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में भी सहायक होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यप्रेमियों, पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने लेखक विनोद भगत को उनकी तीसरी पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं दीं। कई वक्ताओं ने कहा कि ‘दरकते सपने’ केवल एक कहानी संग्रह नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी पीड़ाओं, उम्मीदों और संघर्षों का सशक्त दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को लंबे समय तक सोचने पर मजबूर करती है और उन्हें यह एहसास कराती है कि सपनों का टूटना केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रक्रिया भी हो सकती है। आयोजन के दौरान यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर साहित्यिक विमर्श का आयोजन समाज के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में एक सार्थक पहल है।
पूरे आयोजन का वातावरण राष्ट्रभक्ति, विचारशीलता और साहित्यिक गरिमा से ओतप्रोत रहा। यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण बना कि काशीपुर केवल प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी सशक्त पहचान रखता है। ‘दरकते सपने’ के विमोचन के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि लोकतंत्र की मजबूती केवल कानून और व्यवस्था से नहीं, बल्कि विचारों, संवेदनाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ी हुई है। गणतंत्र दिवस पर आयोजित यह साहित्यिक उत्सव निश्चित रूप से काशीपुर के सांस्कृतिक इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।
इस दौरान विनोद भगत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए उपस्थित साहित्यप्रेमियों और गणमान्य नागरिकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कहानी संग्रह ‘दरकते सपने’ में प्रस्तुत कहानियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के भीतर छिपी वास्तविकताओं, टूटते सपनों, संघर्ष और सामाजिक विसंगतियों को उजागर करना है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक कहानी पाठक को सोचने पर मजबूर करती है और समाज के विभिन्न पहलुओं का आईना प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक अपने आसपास की वास्तविकताओं से रूबरू होता है। विनोद भगत ने कहा कि साहित्य समाज को संवेदनशील बनाने और नागरिकों में सामाजिक जिम्मेदारी पैदा करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि लेखन के माध्यम से वे समाज की उन आवाज़ों को मंच पर लाना चाहते हैं, जिन्हें अक्सर अनसुना किया जाता है। उन्होंने उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि पाठकों और साहित्यप्रेमियों का समर्थन उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है।





