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रैन बसेरे और एल डी भट्ट चिकित्सालय पहुँचकर विनय रोहेला ने व्यवस्थाओं का लिया जायज़ा

कड़ाके की ठंड के बीच कैबिनेट मंत्री विनय रोहेला ने रैन बसेरे और अस्पताल पहुँचकर ज़मीनी हालात देखे, कंबल बाँटे, मरीजों से संवाद किया और व्यवस्थाओं को और मज़बूत करने के सख़्त निर्देश दिए।

काशीपुर। रविवार की शाम ठंड के बीच एक सशक्त प्रशासनिक सक्रियता देखने को मिली, जिसने यह स्पष्ट संकेत दिया कि शीतकालीन व्यवस्थाएँ केवल कागज़ी निर्देशों तक सीमित नहीं हैं। नगर निगम क्षेत्र के महेशपुरा में स्थित रैन बसेरे से इस अभियान की शुरुआत हुई, जहाँ कैबिनेट मंत्री एवं आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रोहेला स्वयं व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने पहुँचे। सर्द हवाओं के बीच मंत्री की मौजूदगी ने न सिर्फ प्रशासनिक अमले को सक्रिय किया, बल्कि रैन बसेरे में ठहरे जरूरतमंदों में भी भरोसा जगाया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बिस्तरों की स्थिति, कंबलों की उपलब्धता, हीटर, साफ-सफाई, पीने के पानी, शौचालय और सुरक्षा इंतज़ामों को बारीकी से देखा। साथ ही उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों से बातचीत कर उनकी ज़मीनी परेशानियाँ भी सुनीं। मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्पष्ट मंशा है कि कड़ाके की ठंड में कोई भी व्यक्ति असहाय न रहे, और इसी उद्देश्य से सरकार स्वयं ज़मीन पर उतरकर हालात का मूल्यांकन कर रही है।

रैन बसेरे में ठहरे ओर गारीब और जरूरत मंदो लोगों को कंबल वितरित करते हुए विनय रोहेला ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्दी के मौसम में प्रशासन की संवेदनशीलता सबसे अधिक परीक्षा में होती है। उन्होंने कहा कि रैन बसेरे केवल ठहरने की जगह नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए सुरक्षित आश्रय होने चाहिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नगर निगम द्वारा बनाए गए रजिस्टर, कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था और रात्रि निगरानी व्यवस्था को भी देखा। मंत्री ने संतोष जताया कि अधिकांश व्यवस्थाएँ बेहतर हैं, लेकिन साथ ही यह भी निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। यदि ठंड के कारण कोई व्यक्ति सड़क पर बेसहारा हालत में मिले, तो उसे तत्काल रैन बसेरे तक पहुँचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह काम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य है, जिसे पूरी गंभीरता और संवेदना के साथ निभाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर काशीपुर के महापौर दीपक बाली, नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट, जिला अध्यक्ष मनोज पाल, नगर निगम के अधिकारी, पार्षदगण और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर रैन बसेरे की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और मौके पर आवश्यक सुझाव साझा किए। विनय रोहेला ने नगर निगम द्वारा की गई तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि बिस्तर, कंबल, हीटर, साफ-सफाई और कर्मचारियों की तैनाती संतोषजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी बेहद आवश्यक है, क्योंकि ठंड के दिनों में परिस्थितियाँ तेजी से बदलती हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अलाव जलाने की व्यवस्था प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में लगातार बनी रहनी चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति ठंड से प्रभावित न हो।

रैन बसेरे के निरीक्षण के दौरान विनय रोहेला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे शीतकालीन प्रबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा गया है और सभी जिलाधिकारियों, पुलिस प्रशासन, नगर निगमों और स्थानीय निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ठंड के मौसम में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी को ध्यान में रखते हुए रास्तों को सुचारु रखने के लिए मशीनरी और नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में रैन बसेरे, कंबल वितरण और अलाव जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई है। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि ठंड और आपदा के समय कोई भी नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस न करे।

रैन बसेरे के निरीक्षण के बाद कैबिनेट मंत्री विनय रोहेला काशीपुर स्थित एल डी भट्ट राजकीय चिकित्सालय पहुँचे, जहाँ उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। बिना किसी पूर्व सूचना के किए गए इस दौरे में मंत्री ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, आपातकालीन कक्ष, ओपीडी और अन्य विभागों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें किस प्रकार की सुविधाएँ मिल रही हैं और किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि अस्पताल में कई व्यवस्थाएँ ठीक हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी और कुछ संसाधनों का अभाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। मंत्री ने इस पर गहरी नाराज़गी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन कमियों को गंभीरता से लिया जाए।

अस्पताल निरीक्षण के दौरान कुछ लोगों ने आपातकालीन वार्ड में डॉक्टरों की कमी, कच्ची पट्टियों के इस्तेमाल और संक्रमण के खतरे जैसी समस्याएँ भी मंत्री के सामने रखीं। एक व्यक्ति ने बताया कि बड़ी आबादी वाले क्षेत्र के इस अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या अपर्याप्त है, जिससे मरीजों को समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पाता। विनय रोहेला ने इन शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि सभी मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से लिखित रिपोर्ट मंगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा उठाई गई समस्याएँ शासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन्हीं के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनसेवा केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्याओं का समाधान निकालना भी उतना ही जरूरी है।

विनय रोहेला ने कहा कि अस्पताल में प्राथमिक स्तर पर इलाज की व्यवस्था संतोषजनक है, लेकिन गंभीर मरीजों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक संसाधनों की आवश्यकता है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कहा कि डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों और उपकरणों से जुड़ी आवश्यकताओं की एक विस्तृत सूची तैयार की जाए, ताकि शासन को सही जानकारी भेजी जा सके। मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुसार प्रदेश की चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है, विशेषकर शीतकालीन और आपदा की परिस्थितियों में। उन्होंने भरोसा दिलाया कि डॉक्टरों की कमी और अन्य संसाधन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।

इस मौके पर काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने अस्पताल से जुड़े भविष्य के विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से इसी स्थान पर 200 बेड का आधुनिक अस्पताल बनने जा रहा है। इसके लिए लगभग 65 करोड़ रुपये की धनराशि राज्य सरकार द्वारा ट्रांसफर की जा चुकी है। अस्पताल का डिज़ाइन तैयार हो चुका है और पेयजल निर्माण निगम को इसकी निर्माण एजेंसी बनाया गया है। महापौर ने उम्मीद जताई कि सभी औपचारिकताएँ पूरी होते ही जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा, जिससे काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकेंगी।

दीपक बाली ने यह भी कहा कि वे नियमित रूप से अस्पताल का निरीक्षण करते रहते हैं और साफ-सफाई, पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि डॉक्टरों की कमी एक वास्तविक समस्या है, जिसे दूर करने के लिए शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री की योजना के तहत काशीपुर में पाँच आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं, जहाँ रोज़ाना पाँच से छह हज़ार लोगों की ओपीडी होती है और मरीजों को दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ज़मीन पर भी उनका प्रभाव दिखाई दे रहा है।

मीडिया से बातचीत करते हुए विनय रोहेला ने कहा कि लगातार बारिश और मौसम में बदलाव के कारण ठंड और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सरकार ने सभी विभागों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में शीतकालीन व्यवस्थाओं के तहत दवाइयों का पर्याप्त भंडारण, एंबुलेंस और ट्रांसपोर्टेशन की उपलब्धता तथा आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय रखा गया है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करें, मफलर पहनें और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, ताकि ठंड के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रहा जा सके।

पूरे निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान बार-बार यह संदेश सामने आया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार जनहित को सर्वाेपरि मानते हुए व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रही है। रैन बसेरे से लेकर अस्पताल तक, ठंड और आपदा से निपटने के लिए बनाई गई योजनाओं का वास्तविक परीक्षण किया जा रहा है। विनय रोहेला ने बताया कि वे स्वयं प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों और नगर पालिकाओं का दौरा कर चुके हैं और अधिकांश स्थानों पर व्यवस्थाएँ संतोषजनक पाई गई हैं। जहाँ कहीं भी कमियाँ सामने आती हैं, वहाँ तुरंत सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

अंततः काशीपुर का यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण भर नहीं रहा, बल्कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के बीच संवाद का एक प्रभावी मंच बन गया। समस्याएँ सामने आईं, उनके समाधान के लिए आश्वासन मिले और भविष्य की योजनाओं की स्पष्ट तस्वीर भी रखी गई। सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने के बावजूद प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। रैन बसेरे, अस्पताल, अलाव और आपदा प्रबंधन की यह सक्रियता इस बात का संकेत है कि शीतकालीन चुनौतियों के बीच भी शासन व्यवस्था जनता के साथ मजबूती से खड़ी है।

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