काशीपुर। फाल्गुन मास की पूर्णिमा की पावन संध्या पर होलिका दहन का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और नैतिक मूल्यों के पुनर्स्मरण का अवसर बनकर सामने आता है। इसी भावभूमि पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सक्रिय सदस्य AICC सदस्य अनुपम शर्मा, जो महासचिव प्रदेश कांग्रेस कमेटी उत्तराखंड के रूप में भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, ने प्रदेशवासियों और देशभर के नागरिकों को होलिका दहन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उनके संदेश में भारतीय परंपरा की गहराई, सामाजिक समरसता की भावना और सकारात्मक बदलाव की आकांक्षा स्पष्ट रूप से झलकती है। अनुपम शर्मा ने कहा कि होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जो हमें अपने भीतर छिपी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने और समाज में प्रेम, सौहार्द और सद्भाव को अपनाने की प्रेरणा देता है। उनका यह संदेश केवल औपचारिक शुभकामना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को आत्ममंथन की दिशा में आगे बढ़ाने वाला विचारशील आह्वान भी है।
परंपराओं की लौ जब होलिका दहन की अग्नि में प्रज्वलित होती है, तब उसके साथ-साथ समाज की कुरीतियां, द्वेष, अहंकार और भेदभाव भी भस्म होने का संदेश देती हैं। इसी संदर्भ में अनुपम शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह पर्व हमें याद दिलाता है कि नकारात्मकता चाहे कितनी भी शक्तिशाली प्रतीत हो, अंततः सत्य और सदाचार की विजय सुनिश्चित होती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज के समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों, वैचारिक विभाजन और सामाजिक तनावों से गुजर रहा है, तब होलिका दहन का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। अनुपम शर्मा के अनुसार, इस पर्व का वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा जब हम व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में नफरत, हिंसा और असहिष्णुता को त्यागकर भाईचारे और मानवता के मार्ग पर अग्रसर होंगे। उनका मानना है कि भारतीय संस्कृति की यही मूल आत्मा है, जो विविधताओं के बावजूद एकता को मजबूत बनाती है।
समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की सोच को आगे बढ़ाते हुए अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि होलिका दहन हमें आत्मशुद्धि और आत्मनिरीक्षण का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व केवल अग्नि प्रज्वलन तक सीमित नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का क्षण है कि हम अपने विचारों और कर्मों में सकारात्मक बदलाव लाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सामाजिक भेदभाव, नकारात्मक सोच और आपसी वैमनस्य को उसी प्रकार अग्नि में समर्पित करें, जैसे प्रतीकात्मक रूप से होलिका का दहन किया जाता है। अनुपम शर्मा के अनुसार, जब तक समाज का हर व्यक्ति समानता, न्याय और सम्मान के मूल्यों को आत्मसात नहीं करेगा, तब तक विकास और समृद्धि का सपना अधूरा ही रहेगा। उनके इस संदेश में एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की वह सोच दिखाई देती है, जो केवल राजनीतिक दायरे तक सीमित न रहकर सामाजिक उत्थान की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाने की आकांक्षा रखती है।
राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अनुपम शर्मा ने अपने संदेश में यह भी कहा कि होलिका दहन का पर्व हमें अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। यह पर्व पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सत्य, साहस और नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रह्लाद की भक्ति और विश्वास ने अत्याचार और अहंकार पर विजय पाई, उसी प्रकार आज के समाज में भी सत्य और ईमानदारी की शक्ति हर प्रकार की नकारात्मकता को परास्त कर सकती है। अनुपम शर्मा ने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे इस पर्व के संदेश को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपने जीवन मूल्यों से जोड़कर आत्मसात करें। उनका मानना है कि युवा पीढ़ी यदि सामाजिक समरसता और नैतिकता को अपनाएगी, तभी देश एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर होगा।

समकालीन सामाजिक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हुए अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि होलिका दहन हमें आपसी भाईचारे और सद्भाव की भावना को और मजबूत करने का अवसर देता है। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में स्पष्ट किया कि यह पर्व किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरे समाज को जोड़ने वाला उत्सव है। अनुपम शर्मा के अनुसार, रंगों का पर्व होली तभी सार्थक होगा जब उससे पहले होलिका दहन के माध्यम से हम अपने भीतर और समाज में व्याप्त द्वेष, नकारात्मकता और भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया तेजी से बदल रही है और सामाजिक रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है, तब ऐसे पर्व हमें एक-दूसरे के करीब लाने का कार्य करते हैं। उनका यह संदेश सामाजिक एकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूती प्रदान करता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की बात करते हुए अनुपम शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि होलिका दहन का पर्व हमें अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार होलिका का दहन अधर्म के अंत का प्रतीक है, उसी प्रकार समाज में व्याप्त अन्याय, भ्रष्टाचार और असमानता के विरुद्ध भी हमें संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए। अनुपम शर्मा के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन केवल नारों से नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयासों से संभव होता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस पर्व पर अपने-अपने स्तर पर समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लें। उनका मानना है कि जब हर व्यक्ति अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाएगा, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन देखने को मिलेगा।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना का उल्लेख करते हुए अनुपम शर्मा ने कहा कि यह प्रदेश विविध परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध है। उन्होंने अपने संदेश में यह विश्वास व्यक्त किया कि होलिका दहन का पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा। अनुपम शर्मा ने कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन से दुख, तनाव और निराशा को दूर करे तथा नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करे। उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास ही किसी भी राज्य और देश की सबसे बड़ी ताकत होती है। उनका यह संदेश न केवल धार्मिक भावना को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक विकास और एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।
अंत में अनुपम शर्मा ने एक बार फिर देश और प्रदेशवासियों को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में नई शुरुआत, नई उम्मीद और नई दिशा लेकर आए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि होलिका दहन की अग्नि में सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां, वैमनस्य और कुरीतियां जलकर समाप्त होंगी और समाज में प्रेम, भाईचारा और सौहार्द का वातावरण स्थापित होगा। उनके इस संदेश में एक जननेता के रूप में सामाजिक जिम्मेदारी, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों का समन्वय स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य के रूप में अनुपम शर्मा का यह संदेश न केवल एक पर्व की शुभकामना है, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का प्रेरणादायी आह्वान भी है, जो निश्चित रूप से पाठकों और आमजन के मन में गहरी छाप छोड़ता है।





