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पीएम मोदी की रैली से पहले गणेश गोदियाल के तीखे प्रहार और दस ज्वलंत सवाल

अंकिता भंडारी न्याय और कानून व्यवस्था पर गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री को घेरा, चुनावी शंखनाद से पहले उत्तराखंड की बदहाली और भारी कर्ज पर जवाब मांगते हुए कांग्रेस ने सत्ता के गलियारों में मचाया जोरदार हड़कंप।

देहरादून।देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में उस वक्त सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून आगमन की आहट ने राजधानी की फिजाओं को चुनावी रंग में सराबोर कर दिया। मंगलवार 14 अप्रैल को होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में पीएम मोदी जहां दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की सौगात देकर विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करने जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस दौरे को लेकर सवालों की एक ऐसी बौछार कर दी है जिसने सत्ता पक्ष के खेमे में खलबली मचा दी है। गणेश गोदियाल ने बेहद आक्रामक तेवरों के साथ प्रधानमंत्री से 10 तीखे सवाल पूछे हैं, जिनमें अंकिता भंडारी हत्याकांड से लेकर प्रदेश की जर्जर कानून व्यवस्था और आर्थिक बदहाली का जिक्र किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही केंद्र के नेताओं को उत्तराखंड की याद सताने लगी है, लेकिन जनता इस बार केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि ठोस जवाबों से संतुष्ट होगी। उन्होंने याद दिलाया कि 9 साल पहले इसी धरती से प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड को नंबर एक राज्य बनाने का वादा किया था, लेकिन आज यह राज्य अपराध और भ्रष्टाचार के दलदल में धंसता नजर आ रहा है।

अंकिता भंडारी के इंसाफ की गूंज एक बार फिर देहरादून की सड़कों पर सुनाई दी जब गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने निर्भया कांड का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भाजपा ने विपक्ष का धर्म निभाते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को घेरा था और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया गया था, लेकिन आज अपनी ही सरकार में एक बेटी की हत्या पर प्रधानमंत्री का मौन रहना आश्चर्यजनक है। गणेश गोदियाल ने सवाल उठाया कि आखिर वह कौन सा ‘वीआईपी’ है जिसे बचाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी ढाल बनी हुई है और मुख्यमंत्री धामी ने आखिर क्यों सीबीआई जांच के नाम पर केवल समय बर्बाद किया? उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि अंकिता के माता-पिता की गुहार को दरकिनार कर किसी बाहरी साजिश के तहत जांच की दिशा मोड़ी गई। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री अपने रोड शो के दौरान कम से कम एक बार उस बेटी का नाम लें और उत्तराखंड की अस्मिता को तार-तार करने वाले उन तथाकथित बड़े नेताओं का पर्दाफाश करें जो सत्ता के संरक्षण में छुपे हुए हैं।

राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। गणेश गोदियाल ने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड अब अपराधियों की शरणस्थली बनता जा रहा है, जहां बाहरी राज्यों के वांछित अपराधियों को न केवल व्यापार करने की छूट दी जा रही है बल्कि उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई जा रही है। उन्होंने फौजी रिटायर्ड अफसर जोशी की दुखद मृत्यु का उदाहरण देते हुए पूछा कि आखिर कब तक प्रदेश के सम्मानित नागरिक इस गुंडाराज और आपसी संघर्ष की भेंट चढ़ते रहेंगे? उन्होंने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि अधिकारी मुख्यमंत्री के ‘चरण चुंबन’ में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें अपने फर्ज की याद तक नहीं रही। प्रधानमंत्री से यह पूछा गया है कि क्या वे अपने प्रवास के दौरान राज्य सरकार से इस बिगड़ती कानून व्यवस्था पर जवाब तलब करेंगे या फिर केवल चुनावी रैलियों में व्यस्त रहेंगे, क्योंकि प्रदेश की जनता अब इस शासन पर से अपना पूरा भरोसा खो चुकी है।

उत्तराखंड के पहाड़ी जनजीवन में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक नासूर बन चुका है, जिस पर गणेश गोदियाल ने केंद्र और राज्य सरकार की विफलता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि पौड़ी गढ़वाल के छोटे से विकास खंड से लेकर पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चकराता तक, वन्यजीवों के हमलों में मासूमों की जान जा रही है, लेकिन सरकार के पास न तो कोई ठोस डाटा है और न ही कोई रोकथाम की योजना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को रोड शो करने के बजाय मंत्रिमंडल की बैठक लेनी चाहिए थी ताकि वे पूछ सकें कि पहाड़ के लोगों को आदमखोरों के रहमोकरम पर क्यों छोड़ दिया गया है। वन्यजीवों के साथ इस खूनी संघर्ष में उत्तराखंड का जो नुकसान हो रहा है, उसकी भरपाई के लिए विशेष पैकेज और सुरक्षा तंत्र की मांग करते हुए कांग्रेस ने साफ किया कि ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ का जुमला देने वाले प्रधानमंत्री को अब यह बताना होगा कि उन्होंने वास्तव में इन दोनों संसाधनों को रोकने के लिए क्या किया है। इसके लिए एक श्वेत पत्र जारी करने की भी पुरजोर मांग की गई है।

डबल इंजन की सरकार के दावों की पोल खोलते हुए गणेश गोदियाल ने सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दों पर पीएम मोदी का ध्यान खींचा। उन्होंने उपनल (UPNAL) कर्मचारियों का पक्ष लेते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में आदेश दे दिया है, तो राज्य सरकार आखिर किस आधार पर बहानेबाजी कर रही है? भ्रष्टाचार का आलम यह है कि भाजपा के अपने ही विधायक ने सहकारिता मंत्री पर नौकरियों को बेचने के गंभीर लिखित आरोप लगाए हैं, लेकिन सरकार मौन साधे बैठी है। इसके अलावा प्रदेश में 826 स्कूलों का बंद होना शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है। गणेश गोदियाल ने मांग की कि प्रधानमंत्री स्वयं इन बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खुलवाने के लिए हस्तक्षेप करें और उस मंत्री से जवाब मांगें जो जनता के टैक्स के पैसे पर ऐश कर रहे हैं लेकिन युवाओं को रोजगार देने के नाम पर भ्रष्टाचार का नंगा नाच कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि जनता के पैसे की कीमत पर शासन करने वालों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।

आर्थिक मोर्चे पर प्रदेश को कर्ज के जाल में धकेलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने मुख्यमंत्री धामी की नीतियों की कड़ी आलोचना की। गणेश गोदियाल ने कहा कि राज्य का आर्थिक प्रबंधन इतना गिर चुका है कि अब कर्ज चुकाने के लिए शराब और खनन का सहारा लिया जा रहा है। कुमाऊं मंडल में 55 नई शराब की दुकानें खोलना इसका प्रमाण है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें नशे की ओर धकेल रही है। उन्होंने अरविंद पांडे के बयानों का संदर्भ देते हुए कहा कि नदियों में गड्ढे करके और शराब पिलाकर कर्ज चुकाने की तैयारी की जा रही है, जो कि उत्तराखंड के भविष्य के लिए आत्मघाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि चूंकि यह सरकार जाने वाली है, इसलिए केंद्र सरकार को उत्तराखंड पर लदे तमाम कर्ज की प्रतिपूर्ति कर इसे कर्ज मुक्त घोषित करना चाहिए। प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक उत्तराखंड का आर्थिक ढांचा केवल अवैध खनन और शराब की बोतलों पर निर्भर रहेगा और प्रधानमंत्री इस पर क्या ठोस कार्रवाई करेंगे।

अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण सवाल एलपीजी (LPG) गैस की किल्लत और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की विफलताओं को लेकर उठाया गया। गणेश गोदियाल ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की बदलती अंतरराष्ट्रीय नीतियों के कारण ईरान जैसे देशों के साथ हमारे संबंध प्रभावित हुए, जिसका नतीजा यह हुआ कि एलपीजी जहाजों का मार्ग अवरुद्ध हो गया और आज आम आदमी को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। आगामी चारधाम यात्रा और गर्मियों की छुट्टियों के मद्देनजर जहां कुमाऊं और गढ़वाल में लाखों पर्यटक उमड़ने वाले हैं, वहां गैस की भारी किल्लत होटल व्यवसायियों और आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से गारंटी मांगी कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार उत्तराखंड को कम से कम 10 प्रतिशत अतिरिक्त गैस की सप्लाई सुनिश्चित की जाए ताकि यात्रा सुचारू रूप से चल सके। इन 10 ज्वलंत प्रश्नों के जरिए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के दौरे से ठीक पहले एक बड़ी सियासी लकीर खींच दी है, अब देखना यह होगा कि देहरादून की जनसभा में पीएम मोदी इन सवालों का क्या जवाब देते हैं।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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