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पर्यावरण चेतना का सशक्त मंचन द लॉस्ट वर्ल्ड ने दर्शकों को झकझोरा

पर्वतीय सभा प्रांगण में विद्यार्थियों के प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से प्रकृति संरक्षण, मानवीय जिम्मेदारी और भविष्य की चेतावनी को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर नाटक ने समाज को गहराई से सोचने पर मजबूर किया।

काशीपुर। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना जगाने के उद्देश्य से एक प्रभावशाली सांस्कृतिक पहल उस समय देखने को मिली, जब शान्तिकुंज कल्याण समिति द्वारा शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल के सहयोग से पर्यावरण आधारित चर्चित नाटक “The Lost World” का भव्य मंचन पर्वतीय सभा के प्रांगण में किया गया। यह आयोजन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं था, बल्कि प्रकृति और मानव के रिश्ते पर गहराई से सोचने का अवसर भी बना। नाटक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि समय रहते पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी नहीं समझी गई, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है। दर्शकों से खचाखच भरे प्रांगण में नाटक शुरू होते ही मंच पर जीवंत अभिनय, प्रभावशाली संवाद और सशक्त कथानक ने सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। आयोजन की शुरुआत से ही यह स्पष्ट हो गया कि यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली है।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक और गरिमामय वातावरण में हुआ, जहां प्रभात ध्यानी, बी0 एस0 डंगवाल, स्कूल प्रबंधक डी0 एस0 रावत तथा समिति के अध्यक्ष रोहित बिष्ट ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर आयोजन की औपचारिक शुरुआत की। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार देखने को मिला। मंच से वक्ताओं ने अपने संक्षिप्त संबोधनों में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम होते हैं। अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। दर्शकों में बैठे विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने तालियों के साथ इस पहल का स्वागत किया। इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से ही समाज में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है, और यही उद्देश्य इस आयोजन के पीछे निहित है।

पूरे कार्यक्रम का संचालन पर्वतीय सभा के उपाध्यक्ष हेम चन्द्र पाण्डे ने अत्यंत प्रभावशाली और सधे हुए अंदाज में किया। उनकी वाणी में गंभीरता और विषय की समझ साफ झलक रही थी, जिससे कार्यक्रम की निरंतरता बनी रही। संचालन के दौरान उन्होंने नाटक की पृष्ठभूमि, उसके संदेश और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जब पर्यावरण असंतुलन, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी समस्याएं सामने खड़ी हैं, तब ऐसे नाट्य मंचन समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं। उनके संचालन ने दर्शकों को नाटक से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। मंच और दर्शक दीर्घा के बीच एक ऐसा संवाद स्थापित हुआ, जिसने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया और लोगों को अंत तक बांधे रखा।

नाटक की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए डी0 एस0 नेगी ने वर्तमान परिदृश्य में इसकी उपयोगिता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “The Lost World” केवल कल्पना की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित सच्चाई को दर्शाता है। मानव की लालच, प्रकृति के प्रति लापरवाही और संसाधनों के अत्यधिक दोहन से किस प्रकार पृथ्वी संकट की ओर बढ़ रही है, यह नाटक बड़े प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जब बच्चे इस तरह के गंभीर विषयों पर मंच के माध्यम से संदेश देते हैं, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा होता है। उनके विचारों ने दर्शकों को आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित किया और यह समझाया कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहारिक बदलाव से संभव है।

इस नाट्य प्रस्तुति को साकार करने में नाटक के निर्देशक संजय रिखाड़ी की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उनके कुशल निर्देशन में शाइनिंग स्टार पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने मंच पर ऐसा जीवंत अभिनय प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। संवाद अदायगी, भाव-भंगिमाएं और मंच पर सामंजस्यपूर्ण प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि बच्चों ने इस नाटक के लिए गहन तैयारी की थी। नाटक के प्रत्येक दृश्य में पर्यावरण के प्रति चेतावनी और संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया। बच्चों की मेहनत और समर्पण को दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ सराहा। यह मंचन इस बात का उदाहरण बना कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो विद्यार्थी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।

नाटक के समापन के बाद दर्शकों और कलाकारों के बीच एक विशेष संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसने पूरे कार्यक्रम को और भी अर्थपूर्ण बना दिया। दर्शकों ने नाटक के पात्रों और सहयोगी स्टाफ से पर्यावरण से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इस संवाद के दौरान बच्चों ने भी आत्मविश्वास के साथ अपने विचार साझा किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने विषय को केवल अभिनय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आत्मसात भी किया है। यह सत्र दर्शकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा और कई लोगों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की। इस संवाद ने नाटक और दर्शकों के बीच की दूरी को समाप्त कर दिया और आयोजन को एक सार्थक सामाजिक संवाद का रूप दे दिया।

कार्यक्रम में शान्तिकुंज कल्याण समिति के सचिव धर्मपाल डंगवाल सहित समिति के अनेक सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें चंद्रशेखर पंत, प्रदीप पाण्डे, रमेश बिष्ट, पूरन पाण्डे, नवीन तिवारी, आनन्द पाण्डे, अनूप बिष्ट, शंकर पाण्डे, नवेन्दु जोशी, संतोष पपनै सहित कई गणमान्य लोग शामिल थे। सभी ने इस आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की और भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस तरह यह नाट्य आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति सजग करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।

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