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गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर यूकेडी का शक्ति प्रदर्शन, भाजपा–कांग्रेस पर तीखा हमला

स्थाई राजधानी गैरसैंण के मुद्दे पर चौखुटिया से भराड़ीसैण तक गूंजे आंदोलन के स्वर, आशीष नेगी और पुष्पेश त्रिपाठी के नेतृत्व में यूकेडी ने पहाड़, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया।

गैरसैंण। उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर एक बार फिर पहाड़ों में राजनीतिक चेतना और आंदोलन की धार तेज होती दिखाई दी, जब उत्तराखंड क्रांति दल के सैकड़ों कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतरे। युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी और द्वाराहाट के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी के संयुक्त नेतृत्व में निकाली गई स्थाई राजधानी गैरसैंण जनजागृति संवैधानिक संदेश यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया कि गैरसैंण का मुद्दा आज भी राज्य की राजनीति का सबसे संवेदनशील और जीवंत सवाल बना हुआ है। अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया से प्रारंभ हुई यह यात्रा माईथान, खनसर घाटी और मेहलचोरी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों से गुजरते हुए गैरसैंण पहुंची। यात्रा के दौरान जगह-जगह कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने समर्थन जताया। नारों, झंडों और बैनरों के साथ निकली इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि गैरसैंण केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि उत्तराखंड आंदोलन की आत्मा और राज्य निर्माण के मूल सपने का प्रतीक है, जिसे सत्ता में बैठी सरकारों ने वर्षों तक नजरअंदाज किया।

गैरसैंण पहुंचने के बाद उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस से गैरसैंण मुख्य बाजार तक एक विशाल रैली निकाली। इस रैली में सैकड़ों की संख्या में मौजूद यूकेडी कार्यकर्ताओं ने भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाजार क्षेत्र में “गैरसैंण को राजधानी बनाओ”, “भाजपा-कांग्रेस का दोहरा चरित्र नहीं चलेगा” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बन रहा था। कई वर्षों से दबा हुआ आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने भी अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर इस रैली को देखा और कई स्थानों पर समर्थन जताया। यूकेडी नेताओं का कहना था कि गैरसैंण को राजधानी न बनाए जाने की पीड़ा आज भी हर पहाड़ी के दिल में है और यही पीड़ा अब राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुकी है।

मुख्य बाजार पहुंचने के बाद रैली रामलीला मैदान की ओर बढ़ी, जहां उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पेशावर कांड के महानायक वीर सिंह गढ़वाली की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान वीर सिंह गढ़वाली के योगदान और बलिदान को याद करते हुए नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण किसी एक पार्टी की देन नहीं है, बल्कि यह हजारों आंदोलनकारियों की कुर्बानी और संघर्ष का परिणाम है। माल्यार्पण के बाद नेताओं ने गैरसैंण से भराड़ीसैण विधानसभा की ओर कूच करने का ऐलान किया। पहले से तय कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया और भराड़ीसैण क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बावजूद यूकेडी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहे, जिससे यह साफ हो गया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

भराड़ीसैण पहुंचने पर उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता विधानसभा भवन के मुख्य गेट पर एकत्रित हुए और वहां जोरदार नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने हाथों में झंडे और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद सभी कार्यकर्ता विधानसभा परिसर के भीतर पहुंचे, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में यूकेडी नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एकजुटता का संदेश दिया। नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उत्तराखंड की राजनीति को पहाड़ के हित में मोड़ना है, तो यूकेडी को मजबूत करना जरूरी है। भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वक्ताओं ने कहा कि दोनों राष्ट्रीय दलों ने सत्ता में रहते हुए गैरसैंण को केवल चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन कभी भी ईमानदारी से इसे स्थाई राजधानी बनाने की पहल नहीं की।

यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन केवल राजधानी की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष जल, जंगल, जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को बचाने का है। आशीष नेगी ने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों में भाजपा और कांग्रेस ने बारी-बारी से सत्ता में रहकर उत्तराखंड को लूटने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई पूरी तरह संवैधानिक है और गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाना राज्य की जनता का हक है। आशीष नेगी ने कहा कि जब उत्तराखंड क्रांति दल राज्य निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है, तो गैरसैंण को राजधानी बनाने का संकल्प भी वही पूरा करेगा।

आशीष नेगी ने आगे कहा कि अब यूकेडी चुप बैठने वाली नहीं है और जरूरत पड़ी तो बड़े से बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य आज जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, वह किसी भी जिम्मेदार नागरिक के लिए चिंता का विषय है। पहाड़ों से पलायन बढ़ रहा है, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है, लेकिन सरकारें केवल सत्ता के गणित में उलझी हुई हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर गैरसैंण के मुद्दे को जन आंदोलन बनाएं और जनता को यह बताएं कि राजधानी का सवाल उनके भविष्य से जुड़ा हुआ है। उनके भाषण के दौरान कार्यकर्ताओं ने तालियों और नारों के साथ पूरा समर्थन जताया।

राज्य आंदोलनकारी कांता देवी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की लड़ाई उत्तराखंड क्रांति दल ने लड़ी थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद दिल्ली से चलने वाली सरकारों ने प्रदेश को बर्बादी की ओर धकेल दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता के लिए उत्तराखंड के संसाधनों का लगातार दोहन कर रही हैं। कांता देवी ने विश्वास जताया कि अब जनता जाग चुकी है और आने वाले समय में इन दलों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। उन्होंने सभी आंदोलनकारियों और आम लोगों से एकजुट होकर यूकेडी के साथ खड़े होने की अपील की और कहा कि यही पार्टी पहाड़ के दर्द और संघर्ष को सही मायने में समझती है।

द्वाराहाट के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने अपने संबोधन में बेहद तीखे शब्दों में भाजपा और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीते 25 वर्षों में इस राज्य की लगातार उपेक्षा हुई है और दोनों ही दलों ने उत्तराखंड को बर्बादी की ओर धकेल दिया है। पुष्पेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस के नेता तथा इस प्रदेश के नौकरशाह देहरादून में बैठकर प्रोपर्टी डीलर की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर पहाड़ का भला करना है, तो एक बार उत्तराखंड क्रांति दल के हाथों को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सत्ता में आने पर यूकेडी पर्यटन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जल-जंगल-जमीन को लेकर ठोस नीतियां लागू करेगी।

पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने राज्य आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता ने यह राज्य शहादतों और संघर्ष के बल पर हासिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन केंद्र की भाजपा सरकार ने गैरसैंण को राजधानी बनाने के बजाय सरकार को देहरादून में बैठाने का निर्णय लिया, जिससे पहाड़ की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची। उन्होंने कहा कि आज गैरसैंण ही नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ का आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पहाड़ की जनता एकजुट हो और अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई लड़े। सभा के अंत में नेताओं ने दोहराया कि गैरसैंण की लड़ाई अब रुकेगी नहीं और उत्तराखंड क्रांति दल इसे हर मंच पर पूरी ताकत से उठाता रहेगा।

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