काशीपुर। उत्तराखंड की पावन धरा को पृथक राज्य का स्वरूप दिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों के हक और हकूक की रक्षा के लिए आज ऊधमसिंहनगर में एक बड़ी हलचल देखी गई। राज्य निर्माण सक्रिय आन्दोलनकारी समिति उधमसिंहनगर के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला महामंत्री विनय कुमार विश्नोई के ओजस्वी नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन के साथ निर्णायक वार्ता की। इस महत्वपूर्ण मुलाक़ात के दौरान समिति ने उपजिलाधिकारी महोदय के कार्यालय में दस्तक दी और उन तमाम आवेदन पत्रों की वर्तमान स्थिति और प्रगति की विस्तृत जानकारी मांगी, जो लंबे समय से लंबित पड़े थे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में अवगत कराया कि राज्य निर्माण में अपनी आहुति देने वाले योद्धाओं के चिन्हीकरण में आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं अब उनके धैर्य की परीक्षा ले रही हैं। समिति ने न केवल समस्याओं को गिनाया, बल्कि उनके त्वरित निस्तारण के लिए एक व्यावहारिक और प्रभावी समाधान का खाका भी उपजिलाधिकारी महोदय के सम्मुख प्रस्तुत किया। प्रशासन ने भी मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए समिति को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया और आश्वस्त किया कि आंदोलनकारियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए एक अति महत्वपूर्ण ज्ञापन भी प्रशासन को सौंपा, जो सीधे सत्ता के सर्वोच्च गलियारों तक आंदोलनकारियों की आवाज पहुँचाने का प्रयास है। इस ज्ञापन के माध्यम से समिति ने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु निर्धारित मानकों के ‘बिन्दु च’ में तत्काल शिथिलता देने की पुरजोर वकालत की। इस मांग पत्र को माननीय राज्यपाल, गृह सचिव, मुख्य सचिव, माननीय मुख्यमंत्री महोदय और यहाँ तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम प्रेषित किया गया है। उपजिलाधिकारी महोदय के माध्यम से इन सभी प्रतियों को विधिवत रिसीव कराकर उनकी प्रतिलिपियां प्राप्त की गईं, ताकि भविष्य में इस पर होने वाली कार्यवाही की निगरानी की जा सके। समिति का मानना है कि जटिल नियमों की वजह से कई वास्तविक आंदोलनकारी अभी भी सरकारी लाभों और सम्मान से वंचित हैं, जिन्हें मुख्यधारा में लाना राज्य सरकार का नैतिक कर्तव्य है। ‘बिन्दु च’ में रियायत की यह मांग अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती जा रही है, जिससे शासन-प्रशासन के स्तर पर खलबली मचनी तय मानी जा रही है।

उपजिलाधिकारी कार्यालय में अपनी बात मजबूती से रखने के पश्चात प्रतिनिधिमंडल का रुख तहसीलदार महोदय के कार्यालय की ओर हुआ, जहाँ वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु चिन्हीकरण समिति के सदस्यों हेतु लंबित जांच रिपोर्ट रही। समिति ने तहसीलदार महोदय से अत्यंत विनम्रता परंतु दृढ़ता के साथ अनुरोध किया कि जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को समाप्त कर शीघ्र अति शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आंदोलनकारियों के समर्पण का सम्मान करते हुए तहसीलदार महोदय ने तत्परता दिखाई और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए कि जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार का विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन के इस सकारात्मक और त्वरित रवैये ने आंदोलनकारियों के बीच एक नई उम्मीद की किरण जगाई है। राज्य निर्माण सक्रिय आन्दोलनकारी समिति ने तहसीलदार महोदय द्वारा प्रदर्शित की गई इस कार्यकुशलता और संवेदनशीलता के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह वार्ता इस बात का प्रमाण है कि यदि संगठन एकजुट हो, तो प्रशासनिक तंत्र को भी जनहित के कार्यों में तेजी लाने के लिए विवश किया जा सकता है।
इस पूरे अभियान और प्रशासनिक घेराबंदी के दौरान संगठन की शक्ति और एकजुटता साफ तौर पर नजर आई। प्रतिनिधिमंडल में जिला महामंत्री विनय कुमार विश्नोई के साथ मीनू गुप्ता, प्रदीप कुमार, रामभरोसे और अमित कुमार जैसे कर्मठ सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से प्रशासन पर दबाव बनाए रखा। इन सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड राज्य की नींव उन आंदोलनकारियों के बलिदान पर टिकी है जिन्होंने सड़कों पर उतरकर लाठियां और गोलियां झेली थीं, और आज उन्हें अपने अधिकार के लिए कार्यालयों के चक्कर काटना शोभा नहीं देता। समिति ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज को और अधिक बुलंद करने के लिए बाध्य होंगे। ऊधमसिंहनगर की यह हलचल अब पूरे उत्तराखंड के आंदोलनकारियों के लिए एक प्रेरणा बन गई है, जो अपने स्वाभिमान और पहचान की इस कानूनी लड़ाई को अंतिम मुकाम तक ले जाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। यह प्रेस नोट समाज और सत्ता के लिए एक कड़ा संदेश है कि राज्य निर्माताओं की अनदेखी अब और संभव नहीं है।





