उत्तराखंड। मौसम ने एक बार फिर ऐसा रुख अपनाया है, जिसने आम जनजीवन से लेकर प्रशासन तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बार ठंड सिर्फ तापमान गिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की दिनचर्या, स्वास्थ्य और आवाजाही पर सीधा असर डाल रही है। मैदानी क्षेत्रों में जहां घना कोहरा, शीतलहर और कोल्ड डे की स्थिति बन गई है, वहीं पर्वतीय इलाकों में गिरता पारा, बर्फबारी, पाला और जमी हुई पेयजल पाइपलाइन लोगों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। साफ शब्दों में कहें तो पूरा प्रदेश इस समय ठंड के दोहरे प्रहार की चपेट में है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार 7 जनवरी से 10 जनवरी तक हालात में किसी तरह की राहत के संकेत नहीं हैं। लगातार ठंड और खराब दृश्यता के कारण आम लोगों को खासा सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है, क्योंकि मौसम की यह मार अभी और लंबी चलने वाली है।
मौसम विभाग ने मैदानी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी कर साफ कर दिया है कि आने वाले कुछ दिन बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून, नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जैसे जिलों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना जताई गई है। खासतौर पर सुबह और देर रात के समय दृश्यता बेहद कम हो रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। उधम सिंह नगर में कोल्ड डे की चेतावनी जारी की गई है, जहां दिनभर धूप न निकलने से ठंड का असर और ज्यादा महसूस किया जा रहा है। कई इलाकों में सुबह के समय विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर तक सिमट गई है। हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है।
कोहरे और कड़ाके की सर्दी का असर स्वास्थ्य पर भी साफ नजर आने लगा है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह मौसम जोखिम भरा साबित हो रहा है। अस्पतालों में सर्दी, खांसी और सांस से जुड़ी शिकायतों के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने खासतौर पर वाहन चालकों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। फॉग लाइट का उपयोग करने, धीमी गति से वाहन चलाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। कई जगहों पर सुबह के समय स्कूल बसों और सार्वजनिक परिवहन को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है ताकि लोग मौसम की गंभीरता को समझें और खुद को सुरक्षित रख सकें।
अब अगर पहाड़ी जिलों की बात करें तो यहां ठंड सिर्फ महसूस करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह जीवन को थाम देने वाली चुनौती बन चुकी है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में शीतलहर और पाले के हालात बने हुए हैं। बागेश्वर और नैनीताल में भी स्थिति सामान्य नहीं कही जा सकती। कई इलाकों में तापमान शून्य से नीचे पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पहाड़ों में लगातार गिरते तापमान के कारण पेयजल पाइपलाइन जम गई हैं और लोगों को पीने के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। पशुपालकों के सामने भी पशुओं को ठंड से बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि खुले इलाकों में पाला जमने से चारा और पानी दोनों की समस्या पैदा हो रही है।
राजधानी देहरादून में भी सर्दी ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यहां अधिकतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हल्का से मध्यम कोहरा शहर में छाया हुआ नजर आ रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार देखा गया है और यह घटकर 140 पर पहुंच गया है, जबकि पहले यह 300 तक पहुंच चुका था। इसके बावजूद ठंड का असर लोगों की दिनचर्या पर साफ दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम के समय ठिठुरन बढ़ जाती है, जिससे लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर भी लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम नजर आ रही है।

उधम सिंह नगर जिले में हालात और भी ज्यादा सख्त हैं। यहां अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 4.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। कोल्ड डे की चेतावनी के चलते पूरे जिले में ठंड का असर दिनभर बना हुआ है। धूप न निकलने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है और कोहरे की वजह से सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है। वहीं नैनीताल में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम मात्र 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मुक्तेश्वर में भी अधिकतम 14 डिग्री और न्यूनतम 0.5 डिग्री सेल्सियस तक पारा गिर चुका है। नई टिहरी में अधिकतम तापमान 14 डिग्री और न्यूनतम 2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सर्दी की गंभीरता को दर्शाता है।
अगर सबसे ज्यादा ठंड से जूझ रहे इलाके की बात करें तो पिथौरागढ़ का मुनस्यारी इस समय चर्चा में है। यहां का तापमान माइनस 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो लंदन से भी करीब नौ गुना ज्यादा ठंडा बताया जा रहा है। तुलना करें तो लंदन में इस समय तापमान करीब 1 डिग्री सेल्सियस है। यानी जहां यूरोप की ठंड भी हल्की महसूस हो रही है, वहीं उत्तराखंड के पहाड़ों में कंपकंपा देने वाली सर्दी पड़ रही है। मुनस्यारी में लोग घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं और रोजमर्रा के कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। ठंड का यह स्तर न सिर्फ सामान्य जनजीवन, बल्कि पर्यटन गतिविधियों पर भी असर डाल रहा है।
मौसम विभाग के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। बद्रीनाथ में तापमान माइनस 17 डिग्री सेल्सियस, गंगोत्री में माइनस 23 डिग्री, केदारनाथ में माइनस 2 डिग्री, हर्षिल में माइनस 16 डिग्री, यमुनोत्री में माइनस 19 डिग्री और हेमकुंड में माइनस 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। लगातार गिरते तापमान से पाला जम रहा है और हालात दिन-ब-दिन और कठिन होते जा रहे हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में आज भी बर्फबारी की संभावना जताई गई है और कुछ जगहों पर हल्की बर्फ गिरने के आसार हैं। हालांकि फिलहाल किसी बड़े मौसम सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना नहीं बताई गई है।
आने वाले दिनों के मौसम को लेकर विभाग ने साफ किया है कि 7 और 8 जनवरी को मैदानी इलाकों में घना कोहरा बना रहेगा और उधम सिंह नगर में कोल्ड डे की स्थिति जारी रहेगी। पहाड़ी इलाकों में पाले का खतरा बरकरार रहेगा। 9 जनवरी को भी हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून, नैनीताल, चंपावत और पौड़ी में सुबह के समय दृश्यता बेहद कम रहने की संभावना है। 10 जनवरी को भी कोहरे का असर खत्म होने के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन ठंड से राहत नहीं मिलेगी। ऐसे में सुबह और देर रात अनावश्यक यात्रा से बचने, फॉग लाइट का उपयोग करने और बुजुर्गों व बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड इस समय मैदानी इलाकों में कोहरा और कोल्ड डे, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी, पाला और माइनस तापमान की गिरफ्त में है। मौसम विभाग साफ तौर पर कह रहा है कि ठंड अभी जाने वाली नहीं है और आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रहेंगे। प्रशासन और विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और मौसम से जुड़ी हर जानकारी पर नजर बनाए रखें। इस भीषण सर्दी के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए जरूरी है कि हर नागरिक समय रहते सावधानी बरते और इस ठंड के दौर को सुरक्षित तरीके से पार करे।





