काशीपुर। उत्तराखण्ड कक्रांति दल द्वारा आयोजित एक तीखी और राजनीतिक रूप से गर्म पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी और महिला मोर्चा की केंद्रीय अध्यक्ष संतोष भंडारी ने एक स्वर में अंकिता भंडारी हत्याकांड और काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले को लेकर सरकार की नीयत, कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। नेताओं ने कहा कि ये दोनों घटनाएं केवल अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता और सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश करती हैं। वार्ता में मौजूद मीडिया कर्मियों के सामने उक्रांद नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी इन मामलों को राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई मानकर सड़क से सदन तक संघर्ष कर रही है और आने वाले समय में यह आंदोलन और तेज होगा।
पत्रकारों से संवाद करते हुए आशुतोष नेगी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और इस मुद्दे पर जनता का गुस्सा किसी एक दल तक सीमित नहीं है। उन्होंने देहरादून में निकली ऐतिहासिक रैली का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश भर के लोग, सामाजिक संगठन और सभी विपक्षी दल एक मंच पर आकर सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं। नेगी ने दो टूक शब्दों में कहा कि केवल सीबीआई जांच का ऐलान कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस पूरी जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा होनी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो और सच्चाई दबाई न जा सके। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में न्याय चाहती है, तो उसे जांच को पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी बनाना होगा।
उक्रांद के केंद्रीय उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को बिना समुचित कानूनी सलाह दिए एक ऐसा आवेदन दिलवाया, जिसमें “अज्ञात” शब्द का प्रयोग कर वीआईपी नामों को जानबूझकर छिपा लिया गया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीड़ित परिवार की भावनाओं का राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दुरुपयोग किया गया। नेगी ने दावा किया कि हाल ही में जिन वीआईपी नामों जैसे दुष्यंत गौतम और अजय कुमार का सार्वजनिक रूप से उल्लेख हुआ है, यदि जांच एजेंसियां उन दिशाओं में आगे नहीं बढ़तीं, तो यह साबित हो जाएगा कि जांच केवल दिखावा है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से यह सीधा सवाल पूछा जाए कि सीबीआई जांच का लिखित आदेश आखिर कहां है और उसमें किन-किन बिंदुओं को शामिल किया गया है।
अंकिता भंडारी प्रकरण के संदर्भ में महिला मोर्चा की केंद्रीय अध्यक्ष संतोष भंडारी ने भावुक लेकिन आक्रामक अंदाज में सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने सबसे पहले काशीपुर पहुंचे पत्रकारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल ने इस मामले में शुरू से ही सड़क पर उतरकर जनता की आवाज बुलंद की है। संतोष भंडारी ने कहा कि देहरादून और दिल्ली में जो आक्रोश देखने को मिला, वह पूरे प्रदेश की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की बात कहे जाने के बाद भी पार्टी की मांग यही है कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो। उनका कहना था कि जब तक सर्वाेच्च न्यायिक निगरानी नहीं होगी, तब तक जनता का भरोसा बहाल नहीं हो सकता।
संतोष भंडारी ने इस दौरान अनिल जोशी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह से तीन वर्षों बाद अचानक कुछ चेहरे सामने आ रहे हैं, वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि जब इतने लंबे समय तक वीआईपी के नाम को लेकर सस्पेंस बना रहा, तब ये लोग चुप क्यों थे। अब जबकि उर्मिला सनावर द्वारा अपने पति सुरेश राठौर के साथ हुई बातचीत को सार्वजनिक कर वीआईपी की पहचान को स्पष्ट किया जा चुका है, तब जांच का फोकस उसी दिशा में होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अगर अब भी जांच को भटकाने की कोशिश की गई, तो उत्तराखंड क्रांति दल इसका पुरजोर विरोध करेगा और जनता को सच्चाई बताने के लिए हर मंच का उपयोग करेगा।
काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले को लेकर आशुतोष नेगी ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की आत्महत्या नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का परिणाम है, जिसमें किसान, युवा और आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है। नेगी ने आरोप लगाया कि मृतक किसान के कथित डाइंग स्टेटमेंट में तत्कालीन एसएसपी मणिकांत मिश्रा का नाम सामने आने के बावजूद सरकार ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक व्यक्ति अपने अंतिम बयान में किसी अधिकारी का नाम लेता है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं होती। उनका कहना था कि इससे साफ जाहिर होता है कि सत्ता और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच गहरी सांठगांठ है।
उक्रांद नेता ने मणिकांत मिश्रा पर अवैध खनन, वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों के कारण ही प्रदेश में अपराध और असंतोष बढ़ रहा है। नेगी ने दावा किया कि मणिकांत मिश्रा ने वर्षों से अपनी एनुअल प्रॉपर्टी रिटर्न दाखिल नहीं की, जबकि नियमों के अनुसार यह अनिवार्य है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र में करोड़ों की कोठी का निर्माण हो रहा है और उनकी पत्नी श्वेता चौबे को भी प्रभावशाली पोस्टिंग मिली हुई है। नेगी ने कहा कि यह सब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संरक्षण के बिना संभव नहीं हो सकता और इसी वजह से आम जनता का भरोसा सरकार से उठता जा रहा है।
पत्रकार वार्ता के दौरान उक्रांद नेताओं ने प्रदेश में अवैध खनन, बढ़ते अपराध, महिला सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति और रोजगार संकट को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला बोला। आशुतोष नेगी ने कहा कि भाजपा के पिछले दस वर्षों का कार्यकाल उत्तराखंड के लिए “काला युग” साबित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान न केवल बेरोजगारी बढ़ी है, बल्कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी इजाफा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के कारण गर्भवती महिलाओं की मौतें बढ़ी हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। नेगी ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के दावे तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
मूल निवास के मुद्दे को उठाते हुए उक्रांद नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड के संसाधनों पर सबसे पहला अधिकार यहां के मूल निवासियों का होना चाहिए। आशुतोष नेगी ने स्पष्ट किया कि पार्टी की मांग है कि 1950 से पहले उत्तराखंड में निवास करने वालों को ही मूल निवासी का दर्जा मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल कर यहां के रोजगार, जमीन और संसाधनों पर कब्जा कराया जा रहा है। नेगी ने कहा कि यही कारण है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा और उन्हें पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनका कहना था कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उत्तराखंड के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है।
संतोष भंडारी ने महिला सुरक्षा के सवाल पर सरकार को घेरते हुए कहा कि आज उत्तराखंड महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रदेश नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके कारण उनके हौसले बुलंद हैं। उन्होंने कहा कि जब तक भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त लोगों को जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। संतोष भंडारी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल सत्ता में आने पर महिला सुरक्षा, रोजगार और शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी की नीतियां आम जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव लाएंगी।
पत्रकार वार्ता के अंतिम चरण में उक्रांद नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी का मूल मंत्र “जय पहाड़, जय पहाड़ी” है और इसी विचारधारा के साथ वह 2027 के चुनावों में जनता के बीच जाएगी। आशुतोष नेगी ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल की सरकार बनने पर भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करना है। नेताओं ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी प्रदेशभर में जनसभाएं कर इन मुद्दों को और मजबूती से उठाएगी और जनता को जागरूक करेगी।
कुल मिलाकर काशीपुर की इस पत्रकार वार्ता में उत्तराखंड क्रांति दल ने साफ कर दिया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड और सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला उनके लिए केवल खबर नहीं, बल्कि आंदोलन का आधार है। उक्रांद नेताओं के तेवर और आरोपों से यह संकेत भी मिला कि आने वाले समय में ये दोनों मामले प्रदेश की राजनीति में और अधिक उबाल ला सकते हैं। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच की दिशा और मंशा पर उन्हें संदेह हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर जनता के साथ संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेंगे।





