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पीएनजी कॉलेज में शोध की नई उड़ान प्री पीएचडी ओरिएंटेशन में शोधार्थियों को मिला मार्गदर्शन

रामनगर काशीपुर और बाजपुर के नवनियुक्त शोधार्थियों ने लिया हिस्सा विशेषज्ञ शिक्षकों ने शोध पद्धति नैतिकता गुणवत्ता और विश्वविद्यालयीय दिशानिर्देशों की बारीकियां समझाकर अकादमिक सफर मजबूत बनाया।

पी.एन.जी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर में शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई दिशा देने की पहल के तहत सत्र 2026-27 के लिए प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क ओरिएंटेशन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। शोध के क्षेत्र में नए कदम रखने वाले शोधार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में रामनगर के अलावा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय काशीपुर तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बाजपुर से नवनियुक्त शोधार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों को प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क की प्रक्रिया, शोध की गुणवत्ता, शोध पद्धति, नैतिक मानकों तथा आवश्यक अकादमिक दिशानिर्देशों से परिचित कराना रहा। महाविद्यालय के संरक्षक एवं प्राचार्य प्रो. एम. सी. पाण्डे की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। उनके साथ महाविद्यालय के विद्वान प्राध्यापक एवं प्राध्यापिकाएं भी मौजूद रहे। वरिष्ठ शिक्षकों की मौजूदगी ने नए शोधार्थियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें शोध के प्रति गंभीर, अनुशासित तथा जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। रिसर्च सेल के समन्वय से आयोजित यह कार्यक्रम शोधार्थियों के अकादमिक सफर की मजबूत शुरुआत के रूप में सामने आया।

शोध की गुणवत्ता और उसके व्यापक महत्व को केंद्र में रखते हुए कार्यक्रम के दौरान शोधार्थियों को उच्चस्तरीय अकादमिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम की शुरुआत आई.क्यू.ए.सी. समन्वयक प्रो. सी. एस. नेगी के संबोधन से हुई। उन्होंने शोध की गुणवत्ता, उसकी उपयोगिता और अकादमिक जगत में उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने शोधार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि शोध केवल किसी विषय पर सामग्री एकत्र करने तक सीमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रमाणिकता, मौलिकता और विषय की गहरी समझ का विशेष महत्व होता है। इसके बाद प्रो. सी. एस. जोशी, प्रो. जानकी सुयाल, प्रो. अनीता जोशी, प्रो. ऊषा पंत जोशी तथा डॉ. महेन्द्र पाल सिंह परमार ने शोधार्थियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने अपने व्यस्त शैक्षणिक कार्यक्रम के बावजूद समय निकालकर शोधार्थियों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। उन्होंने रिसर्च मेथोडोलॉजी यानी शोध पद्धति, रिसर्च एथिक्स यानी शोध नैतिकता तथा शोध कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों पर उपयोगी जानकारी दी। इस दौरान शोधार्थियों को शोध की प्रक्रिया में तथ्यपरकता, मौलिकता, अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने मार्गदर्शन के माध्यम से शोधार्थियों के सामने शोध कार्य की बारीकियों और अकादमिक जिम्मेदारियों का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि एक कुशल शोधकर्ता का निर्माण केवल डिग्री प्राप्त करने से नहीं होता, बल्कि निरंतर अध्ययन, तार्किक सोच, प्रमाणिक तथ्यों के विश्लेषण और शोध के निर्धारित मानकों का पालन करने से होता है। प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क इसी दिशा में शोधार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक आधार उपलब्ध कराने वाला महत्वपूर्ण चरण है। कार्यक्रम में शोधार्थियों को शोध पद्धति की व्यवस्थित समझ विकसित करने के साथ-साथ शोध कार्य के दौरान नैतिक मूल्यों और निर्धारित नियमों के पालन की आवश्यकता बताई गई। वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि गुणवत्तापूर्ण शोध समाज, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने की क्षमता रखता है। ऐसे में शोधार्थियों को अपने विषय का चयन करते समय उसकी प्रासंगिकता, शोध की मौलिकता और संभावित उपयोगिता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम में साझा किए गए अनुभव और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश नए शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित हुए। वक्ताओं के अनुसार यह मार्गदर्शन उन्हें भविष्य में एक सक्षम, जिम्मेदार और प्रभावी शोधकर्ता तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

आयोजन को सफल एवं व्यवस्थित बनाने में महाविद्यालय के शिक्षकों और रिसर्च सेल से जुड़े सदस्यों की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अभिषेक गोयल, डॉ. अलका, डॉ. कुसुम गुप्ता, डॉ. गुरप्रीत सिंह, डॉ. देव आशीष, डॉ. पंकज प्रियदर्शी एवं डॉ. बृजेश कुमार यादव ने उपस्थित रहकर आयोजन को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिक्षकों की उपस्थिति ने शोधार्थियों को अकादमिक वातावरण से जुड़ने का अवसर प्रदान किया और उन्हें शोध कार्य की आगामी प्रक्रिया को लेकर आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। महाविद्यालय की ओर से आयोजित इस पहल को शोध संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। विभिन्न महाविद्यालयों से आए शोधार्थियों के एक मंच पर जुटने से उन्हें अपने शैक्षणिक अनुभव साझा करने तथा शोध से जुड़े विषयों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने के लिए निरंतर अकादमिक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग आवश्यक है। इस आयोजन ने नए शोधार्थियों में शोध के प्रति गंभीरता, उत्साह और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का काम किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर रिसर्च सेल के समन्वयक डॉ. ललित मोहन ने शोधार्थियों को प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण औपचारिकताओं और आवश्यकताओं की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से कुमाऊँ विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार कोर्स वर्क में शोधार्थियों की भागीदारी तथा उपस्थिति से संबंधित प्रावधानों और आवश्यक दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने शोधार्थियों से अपेक्षा की कि वे कोर्स वर्क के दौरान नियमित रूप से सहभागिता करते हुए निर्धारित अकादमिक मानकों का पालन करेंगे और शोध कार्य को गंभीरता के साथ आगे बढ़ाएंगे। डॉ. ललित मोहन ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम. सी. पाण्डे, सभी सम्मानित प्राध्यापकों एवं प्राध्यापिकाओं तथा प्रतिभागी शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की। प्री-पीएच.डी. कोर्स वर्क का यह ओरिएंटेशन कार्यक्रम नए शोधार्थियों के लिए शोध की औपचारिक यात्रा की महत्वपूर्ण शुरुआत के रूप में सामने आया, जिसमें उन्हें शोध की गुणवत्ता, पद्धति, नैतिकता और विश्वविद्यालयीय निर्देशों की स्पष्ट समझ देने का प्रयास किया गया।

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