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राहुल गांधी पर FIR से गरमाई सियासत रामनगर में रणजीत रावत ने खोला मोर्चा

रामलीला मैदान के कथित शुद्धीकरण मामले में कांग्रेस ने पुलिस को तहरीर सौंपकर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई, समान कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए।

रामनगर। हल्द्वानी में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद उत्तराखंड की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। इसी राजनीतिक गर्माहट के बीच रामनगर में कांग्रेस ने पलटवार करते हुए पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के नेतृत्व में कोतवाली का रुख किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस के समक्ष तहरीर सौंपते हुए रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धीकरण’ मामले में एफआईआर दर्ज करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि राजनीतिक गतिविधियों और नेताओं से जुड़े मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है, तो कथित रूप से सार्वजनिक रूप से सामने आए इस प्रकरण को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने पुलिस से मांग की कि तहरीर में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जाए और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। रामनगर कोतवाली पहुंचने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को सामाजिक सौहार्द और समान कानूनी प्रक्रिया से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।

मामले को लेकर रणजीत सिंह रावत ने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हल्द्वानी पहुंचे थे, जहां उन्होंने कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली को संबोधित किया था। कांग्रेस का दावा है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने रामलीला मैदान का कथित तौर पर ‘शुद्धीकरण’ कराया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, इस दौरान यह कहा गया कि कांग्रेस नेता के कार्यक्रम के आयोजन के कारण मैदान अपवित्र हो गया है और इसी धारणा के आधार पर वहां हवन कराया गया। इस कथित घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। रणजीत सिंह रावत का कहना है कि किसी राजनीतिक दल या उसके नेताओं से मतभेद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थल को अपवित्र बताकर उसका कथित शुद्धीकरण कराया जाना अलग तरह का विषय है। कांग्रेस ने इसी आधार पर पुलिस से मामले की जांच की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों से जुड़े ऐसे विवादों को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय कानून और तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने इस घटनाक्रम को केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का विषय मानने से इनकार करते हुए कहा कि इसका असर सामाजिक सौहार्द और धार्मिक भावनाओं पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि इस घटना को लेकर राज्यसभा में भी सवाल उठाया गया था। पार्टी नेताओं के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उस घटनाक्रम को निंदनीय बताते हुए जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अब तक ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में पुलिस थानों में पहुंचकर तहरीर देने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कथित घटना की जांच के लिए कानून की प्रक्रिया शुरू कराना है। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों, संबंधित लोगों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इस मांग के साथ पार्टी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि राजनीतिक मामलों में कानून का इस्तेमाल किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए।

दूसरी ओर, राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में मुकदमा दर्ज होने को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। रणजीत सिंह रावत ने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस द्वारा उठाए गए रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धीकरण’ मामले में अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। कांग्रेस ने इसी अंतर को आधार बनाते हुए समान कानूनी प्रक्रिया की मांग की है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी शिकायत में प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता दिखाई देती है तो पुलिस को उस पर भी कानून के अनुसार कदम उठाना चाहिए। इसी विरोध और मांग को प्रदेशव्यापी अभियान का रूप देते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर थानों में तहरीर देने का निर्णय लिया है। रामनगर में भी इसी क्रम में पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के नेतृत्व में कार्यकर्ता कोतवाली पहुंचे और पुलिस को शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद कानून-व्यवस्था को चुनौती देना या किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं है, बल्कि उनका कहना है कि प्रत्येक शिकायत पर निष्पक्ष तरीके से जांच हो और कानून सभी पक्षों पर समान रूप से लागू किया जाए।

रामनगर कोतवाली में तहरीर सौंपे जाने के बाद स्थानीय राजनीतिक माहौल में भी इस मुद्दे ने नई गर्मी पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर पुलिस के सामने अपनी मांग स्पष्ट करते हुए कहा कि तहरीर के आधार पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए और जांच के बाद जिम्मेदारी तय की जाए। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए और न ही किसी व्यक्ति के राजनीतिक पद या प्रभाव के आधार पर कार्रवाई की दिशा तय होनी चाहिए। कांग्रेस के मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और राजनीतिक विरोध की पूरी गुंजाइश है, लेकिन विवादित घटनाओं की जांच निष्पक्ष संस्थागत प्रक्रिया के तहत होना जरूरी है। अब रामनगर में पुलिस इस तहरीर पर क्या कदम उठाती है, इसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में भी नजर बनी हुई है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों पर पुलिस की ओर से किसी अंतिम निष्कर्ष या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में आगे की जांच और पुलिस का रुख ही तय करेगा कि यह मामला किस दिशा में बढ़ता है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति में आरोपों, जवाबी कार्रवाई और समान कानूनी प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।

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