काशीपुर। भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्ते की मर्यादा को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। रिश्तों की आड़ में भरोसे के साथ कथित विश्वासघात और एक नाबालिग के साथ गंभीर अपराध के आरोपों ने काशीपुर से जसपुर तक हलचल पैदा कर दी है। शिकायत के अनुसार, 17 वर्षीय नाबालिग पीडिता के साथ उसके रिश्तेदार के बेटे मोहित पुत्र कौशल सिंह पर 30 जुलाई 2026 को कथित दुष्कर्म करने और घटना के बाद उसे जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता आंचल ने प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली जसपुर, जिला ऊधम सिंह नगर को दिए प्रार्थना-पत्र में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में बताया गया है कि पल्क का जन्म 21 फरवरी 2009 को हुआ है और वह वर्तमान में नाबालिग है। दर्ज विवरण के अनुसार, 24 जुलाई 2026 को पल्क अपनी रिश्तेदार बुआ अमलेश पत्नी कौशल सिंह, निवासी साई कॉलोनी, कासमपुर रोड, थाना जसपुर, जिला ऊधम सिंह नगर के घर गई थी। इसके बाद 31 जुलाई को घर लौटने पर उसके व्यवहार में अचानक ऐसा बदलाव दिखाई दिया, जिसने परिजनों को गहरी चिंता में डाल दिया। वह किसी से ठीक से बातचीत नहीं कर रही थी और उसके व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई दे रहा था। परिवार ने जब उसकी स्थिति देखी तो मामला सामान्य न होने का अंदेशा हुआ और इसके बाद घटनाक्रम धीरे-धीरे सामने आने लगा।
पीडिता की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे उपचार के लिए एम्स हॉस्पिटल ऋषिकेश ले गए, जहां उसकी महिला चिकित्सक द्वारा जांच और उपचार किया गया। शिकायत में दर्ज विवरण के अनुसार, उपचार के दौरान महिला चिकित्सक ने पीडिता की मां को कथित घटना के संबंध में जानकारी दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि चिकित्सक ने बताया कि पीडिता के साथ उसके रिश्तेदार के बेटे मोहित पुत्र कौशल सिंह ने 30 जुलाई 2026 को कथित दुष्कर्म किया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी। यह जानकारी परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। जिस रिश्ते में एक लड़की अपने परिवार और रिश्तेदारों के बीच सुरक्षा और विश्वास महसूस करती है, उसी दायरे से इस तरह के गंभीर आरोप सामने आने से परिजन स्तब्ध रह गए। शिकायत के अनुसार, घटना के संबंध में जब पीडिता से उसके माता-पिता ने पूछताछ की तो उसने कथित तौर पर रोते हुए पूरी बात बताई। इसके बाद अस्पताल की ओर से ऋषिकेश की स्थानीय पुलिस को भी घटना की सूचना दिए जाने की बात शिकायत में कही गई है और पुलिस द्वारा पीडिता से पूछताछ किए जाने का भी उल्लेख है। पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर पहलू नाबालिग की कथित मानसिक स्थिति है, क्योंकि शिकायत में बताया गया है कि घटना के बाद उसके व्यवहार और मानसिक अवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। हालांकि, लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और घटना की परिस्थितियां पुलिस जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेंगी।
घटना के बाद भी परिवार के सामने परिस्थितियां आसान नहीं रहीं। शिकायतकर्ता आंचल के अनुसार, 25 अगस्त 2026 को वह अपनी नाबालिग बेटी पल्क को ऋषिकेश से उपचार के बाद काशीपुर स्थित अपने घर लेकर आईं। शिकायत में कहा गया है कि उस समय बेटी के इलाज और उसकी स्थिति को संभालना परिवार की पहली प्राथमिकता थी। इसी कारण तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी हुई। मां के लिए अपनी नाबालिग बेटी को इस तरह की गंभीर परिस्थिति से बाहर निकालना किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं था। शिकायत में बताया गया है कि भय और बेटी के उपचार में व्यस्त रहने के कारण समय पर पुलिस के समक्ष रिपोर्ट नहीं कराई जा सकी। इसके बाद 30 अगस्त 2026 को शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पुलिस से आरोपी मोहित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। शिकायत में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और नाबालिग से जुड़े होने के कारण मामला और भी संवेदनशील बन जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच के दौरान पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय तथ्यों, घटना से संबंधित परिस्थितियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से परखा जाना आवश्यक है। वहीं, नाबालिग की पहचान और उसकी निजता की सुरक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच पीड़िता को किसी अतिरिक्त मानसिक या सामाजिक दबाव का सामना न करना पड़े।
इस पूरे प्रकरण ने भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्तों में विश्वास, मर्यादा और सुरक्षा की भावना को लेकर एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। जिस रिश्ते को भारतीय समाज में स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, उससे जुड़े दायरे में नाबालिग के साथ कथित यौन अपराध के आरोप सामने आना निश्चित रूप से झकझोर देने वाला है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल मामले में सामने आए आरोप शिकायत में दर्ज कथनों पर आधारित हैं और इनकी अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। आरोपी के संबंध में भी अंतिम दोषसिद्धि न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगी। पुलिस के सामने अब यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि मामले की प्रत्येक कड़ी की गंभीरता से जांच हो और किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए। साथ ही नाबालिग की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। रिश्ते तभी पवित्र कहलाते हैं जब उनमें विश्वास की रक्षा हो, लेकिन यदि उसी विश्वास की आड़ में अपराध का आरोप सामने आए तो कानून की निष्पक्ष और सख्त प्रक्रिया ही सच्चाई तक पहुंचने का रास्ता बनती है। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं।





